Friday, September 21, 2018
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बदलते ‘मौसम’ को साधने की चुनौती

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पंकज के. सिंह

पड़ोसी देश श्रीलंका भारत के लिए एक महत्वपूर्ण राष्ट्र रहा है। श्रीलंका के साथ भारत के रिश्तों में पिछले कुछ दशकों में उतार-चढ़ाव आता रहा है। भारत ने अब नए ढंग से श्रीलंका के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को गति देने की कोशिश की है। हाल ही में असैन्य परमाणु समझौते के द्वारा दोनों देशों ने पुनः परस्पर विश्वास के भाव को स्पष्ट रूप से दर्शाया है। श्रीलंका ने पहली बार किसी देश के साथ इस प्रकार का असैन्य परमाणु समझौता किया है। इस समझौते के बाद भारत और श्रीलंका के मध्य कृषि और स्वास्थ्य सेवाओं सहित कतिपय अन्य क्षेत्रों में भी द्विपक्षीय सहयोग के नए मार्ग प्रशस्त होंगे। इस परमाणु समझौते से भारत और श्रीलंका के मध्य सूचना, जानकारी और विशेषज्ञता वाले अनेक क्षेत्रों में द्विपक्षीय आदान-प्रदान को नई गति मिलेगी। इसके अतिरिक्त परमाणु ऊर्जा की शांतिपूर्ण प्रयोग के क्षेत्र में संसाधनों को साझा करने, परमाणु क्षमताओं को विकास करने, परमाणु सुरक्षा तथा प्रशिक्षण के क्षेत्रों में भी इस समझौते से व्यापक लाभ होने की संभावना है। श्रीलंका एक जीवंत और मजबूत लोकतंत्र है। इससे भी अधिक अहम यह है कि इस देश में आजादी यानी 1948 के बाद से लोकतंत्र निर्बाध रूप से चल रहा है। भारत के अलावा श्रीलंका दक्षिण एशिया का दूसरा ऐसा देश है जहां कभी सेना की ओर से तख्तापलट नहीं किया गया। ऐसा नहीं है कि श्रीलंका में लोकतंत्र पूरी शांति से चल रहा है। यहां तीस साल तक भयानक गृहयुद्ध भी चला। इस युद्ध ने ऐसी विकृतियां उत्पन्न की हैं जिन्हें दूर किया जाना जरूरी हो गया है। अलग तमिल राष्ट्र की मांग को लेकर आतंक मचाने वाले संगठन लिट्टे का प्रभाव अब तमिल समुदाय में भी सीमित रह गया है। कोलंबो से शिकायतें और अनेक मतभेद रखने वाले अल्पसंख्यक तमिल समुदाय ने चुनाव में बड़ी तादाद में वोट डाले। ऐसा ही मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय ने भी किया। यह समुदाय भी सिंहली वर्चस्व की आशंका से भयभीत है। इन दोनों अल्पसंख्यक समुदायों ने मिलकर राजपक्षे को सत्ता से बाहर कर दिया। राजपक्षे के प्रति उनके साझा विरोध ने सिरीसेना का पलड़ा भारी कर दिया। जो भी हो, नतीजों की यह व्याख्या करना सही नहीं होगा कि तमिल और मुस्लिम समुदाय की एकजुटता ने गृहयुद्ध के विजेता राजपक्षे की हार सुनिश्चित कर दी। सिरीसेना इसलिए जीते, क्योंकि अल्पसंख्यक मतों को अपने पक्ष में करने के साथ वह सिंहली बौद्ध वोटों में विभाजन करने में सफल रहे। श्रीलंका में चीन की बढ़ती सक्रियता को देखते हुए भारत को विशेष रूप से सतर्क रहने की आवश्यकता है। फिलहाल श्रीलंका में सर्वाधिक निवेश करने वाला राष्ट्र चीन ही है। भारत ने भी यद्यपि उत्तरी और पूर्वी श्रीलंका में आधारभूत संरचना के विकास में व्यापक निवेश किया है। यह वह क्षेत्र है, जहां तमिलों की आबादी बहुत अधिक है। उत्तरी और पूर्वी श्रीलंका में भारत ने श्रीलंका को व्यापक सहयोग प्रदान किया है। इस क्षेत्र में भारत ने न केवल रेलवे लाइन बिछाई हैं, वरना सड़क मार्गों का निर्माण करने में भी बहुत बड़ा योगदान दिया है। भारत ने इस क्षेत्र में नागरिकों के रहने योग्य आवासों के निर्माण के लिए भी बहुत अधिक निवेश किया है। यद्यपि महिंद्रा राजपक्षे के नेतृत्व में पिछली श्रीलंका सरकार ने भारत के साथ वैसी गर्मजोशी भरा व्यवहार नहीं दिखाया, जैसा अपेक्षित था।

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पत्रकार अफसर खां सागर को सैयद मसऊद गाजी सम्मान

2016-11-28-02-ravijansaamnaगाजीपुर, जन सामना संवाददाता। हजरत सैय्यद मसऊद गाजी वेलफेयर सोसायटी के तत्वावधान में रविवार को सैय्यदवाड़ा स्थित शाह लगन पैलेस में ’हिन्दी साहित्य में गाजीपुर का योगदान’ विषयक गोष्ठी एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आगाज किसान लेखक डा0 विवेकी राय को श्रद्धांजलि दे कर किया गया। हिन्दी साहित्य एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए सोसायटी द्वारा पांच लोगों को ’सैय्यद मसऊद गाजी सम्मान 2016’ से सम्मानित किया गया। हिन्दी साहित्य के लिए भोपाल के लेखक मकबूल वाजिद, गाजीपुर के साहित्यकार राम अवतार एवं कोलकाता के उपंयासकार सेराज खां ’बातिश’ को हजरत सैय्यद मसऊद गाजी अवार्ड से नवाजा गया। वहीं पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए चन्दौली के एम0 अफसर खां सागर को तथा सामाजिक चेतना जागृत करने के लिए अमरनाथ तिवारी अमर को हजरत सैय्यद मसऊद गाजी सम्मान से सम्मानित किया गया। हजरत सैय्यद मसऊद गाजी अवार्ड से सम्मानित साहित्यकार राम अवतार की लेखनी पर प्रकाश डालते हुए डॉ0 रिचा राय ने कहा कि उनकी रचनाएं जमीन से जुड़ी होती हैं, आम आदमी की पीड़ा को वह बखूबी व्यक्त कर लेते हैं, वह खूब लिखते है और दिलों में हलचल पैदा करते है। मकबूल वाजिद के कलम पर बोलते हुए डॉ0 मसऊद ने कहा कि उनका कलम बड़ा बेबाक है, सच को सच कहने से घबराता नहीं है। वह जो भी लिखते हैं दिल से लिखते हैं और उनके पास जो दिल है वह आम आदमी के लिए धड़कता है। सेराज खां ’बातिश’ की लेखनी पर प्रकाश डालते हुए नर्वदेश्वर राय ने कहा कि इनकी लेखनी दिलों को जोड़ती है। सामाजिक सौहार्द का मूल मंत्र बताती है। वह दिलों में उमड़ने वाले विचारों को बखूबी व्यक्त कर लेते हैं।

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दीपावली में आग से बचाव का दिया प्रशिक्षण

2016-10-23-1-sspjs-ravi-rathoreकानपुर देहात। रविवार को सोसाइटी फाॅर ग्रीन इण्डिया हाईटेक सिटी अकबरपुर कानपुर देहात में दीपावली में आग से बचाव का निःशुल्क प्रशिक्षण सैकड़ों युवाओं को दिया गया। दीपावली में आग से बचाव की निःशुल्क ट्रेनिंग एवं 20 लोगों को बेहतरीन कार्य करने के लिये सम्मानित भी किया गया।
कार्यक्रम के शामिल होने आये मुख्य अतिथि एवं प्रशिक्षक दो बार राष्ट्रपति सम्मान, एक बार गवर्नर सम्मान एवं मुख्यमंत्री शौर्य सम्मान धारक शिवदास प्रसाद का स्वागत राष्ट्रीय युवा पुरस्कार एवं विश्व रिकार्ड विजेता रजत गुप्ता एवं संस्था के सदस्यों ने तिलक कर किया। इसके बाद शिवदास प्रसाद ने कई घण्टे लगातार अग्नि सुरक्षा के गुण सैकड़ों युवाओं को दिये साथ ही ये भी बताया कि इस दीपावली को अपने आपको एवं दूसरे को किस प्रकार सुरक्षित कर सकते हैं। § Read_More....

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