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Daily Archives: 4th October 2016

मुख्यमंत्री ने कानपुर मेट्रो रेल परियोजना का किया शुभारम्भ

2016-10-04-2-ssp-jsकानपुर, ब्यूरो। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने कहा है कि मेट्रो रेल परियोजनाएं    समाजवादियों के चुनाव घोषणा पत्र का हिस्सा नहीं थीं। फिर भी जनहित को ध्यान में रखकर ऐसे विकास कार्यों के लिए समाजवादी सरकार ने तत्परता से काम किया, जिनके दूरगामी लाभ मिलेंगे। उन्होंने भरोसा जताया कि कानपुर में मेट्रो रेल के निर्माण में केन्द्र सरकार का पूरा सहयोग मिलेगा तथा यहां पर भी मेट्रो रेल परियोजना उसी रफ्तार से आगे बढ़ेगी, जिस रफ्तार से लखनऊ, नोएडा और गाजियाबाद में प्रदेश सरकार द्वारा मेट्रो रेल परियोजनाओं का निर्माण कार्य कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री शहर में कानपुर मेट्रो रेल परियोजना के शुभारम्भ के अवसर पर अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने 352 करोड़ रुपए की लागत से अधिक की 44 परियोजनाओं का लोकार्पण तथा 14,920 करोड़ रुपए से अधिक की लागत की 62 परियोजनाओं का शिलान्यास भी किया। शिलान्यास की गई परियोजनाओं में कानपुर मेट्रो रेल परियोजना के अतिरिक्त विकास नगर स्थित सिग्नेचर सिटी के अन्तर्गत बहुमंजिले आवासीय व व्यावसायिक भवन तथा बस स्टैण्ड का निर्माण कार्य, फूलबाग से अण्डर ग्राउण्ड पार्किंग का कार्य, नवीन मार्केट सौन्दर्यीकरण का कार्य, तात्याटोपे नगर पार्क का विकास कार्य, चकेरी में पार्क एवं कम्युनिटी सेण्टर का निर्माण कार्य, माती मुख्यालय में इको पार्क का निर्माण एवं विकास कार्य, पनकी भाऊ सिंह के निकट कालपी नगर योजना में बाह्य विद्युतीकरण का कार्य तथा ग्राम बारासिरोही में सामुदायिक केन्द्र का निर्माण कार्य शामिल है।
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आजाद पीजियन फ्लाइंग कलब की ओर से कबूतरबाजों को मिले पुरस्कार

2016-10-04-1-ravi-aldआज भी जीवित है, नवाबी शौक….
इलाहाबाद, रवि कुमार राठौर। पहले कबूतरबाजी या कबूतर उड़ान मनोरंजन का मुख्य माध्यम हुआ करता था। परंतु जबसे मनोरंजन के आधुनिक साधन आए हैं तब से कबूतरबाजी की परंपरा खत्म होने की कगार पर पहुंच गई है। ऐसे दौर में यह प्राचीन परंपरा शहर में आज भी जीवित है। कबूतरबाजी इलाहाबाद का कदीमी शौक है। हालांकि इसकी शुरूआत के बारे में ठीक तौर पर कुछ कहना मुश्किल है लेकिन बुजुर्ग कबूतरों की मानें तो शाहजहां के जमाने में हिन्दुस्तान में कबूतरबाजी का शौक पला, बढ़ा। उन्होंने ईरान से बैलगाड़ी से कबूतर मंगवाए थे। प्रतियोगिता में शामिल ऊंची उड़ान वाले बुलंद परवाज के कबूतरों में गिरहबाज यानी कलाबाजी वाले कबूतर ही खास रहते है। रंगों के आधार पर ही इनके नाम रखे जाते हैं। इसमें सिर पर फूल वाले को फुलसिरा, काले रंग वाले को कलसिरा, लाल रंग वाले को ललसिरा, काली दुम वाले को कलदुमा, हरे को सब्ज और सफेद को नेखा कहते हैं। § Read_More....

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