Wednesday, August 22, 2018
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Daily Archives: 21st October 2016

दुविधा नदी को भारी है……

2016-10-14-4-sspjs-alkaदुविधा नदी को भारी है, सागर का पानी खारी है
डरती जाती, बहती जाती, क्या करे, बेचारी नारी है
बेबस मन की हलचल है, लहर नहीं ये धड़कन है
तड़प रही है मिलने को, मिलने में भी तड़पन है
मंजिल मेरी सागर है, मन में यह उच्चारी है
दुविधा नदी को भारी है………
बंधन तट के दोनों ओर, और नहीं है कोई ठौर
सागर में ही मिल जायेगी, नदी रही है ये ही सोच
मंजिल अपनी सागर करली, राहों में ही वो हारी है
दुविधा नदी को भारी है………….. § Read_More....

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छा गया जेहन पर

nutan-aछा गया जेहन पर सुन्दर सा जो ये अक्स है
सिर्फ साया है किसी का या कोई सख्श है।

बुला रहा जो दूर से ही कर इशारे मुझे
है आसमाँ का चाँद या थाली में कोई अक्स है।

दिख रही है खूबसूरत आज फिर ये जमीं
जो जमीं पर छा रहा वो आसमाँ का अक्स है।

बज रही है मन की वीणा तार भी झंकृत हुए
सोच कर बस साथ मेँ जो किसी का अक्स है।

भूलकर सब जो जमीं नभ से है जा मिली
दिख रही है कुछ अलग कुछ अलग सा अक्स है।

तन भी सुंदर मन भी सुंदर सुंदर समां ये हो गया
छा रहा उस पर जो आज सुंदर सा ये अक्स है। § Read_More....

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दीपावली पर कैसे दिखें स्मार्ट

2016-09-23-6-sspjsदीपावली के खास दिन अगर आप अपने व्यक्तित्व में खास निखार लाना चाहती हैं तो खूबसूरत और स्मार्ट दिखने के टिप्स तो आजमाने ही पड़ेंगे। चाहे मौसम कैसा भी हो, अगर आप चाहती हैं कि आज के दिन आप हुस्न की मलिका दिखें तो अपनी त्वचा का ध्यान रखें। अगर आप जन सामना की ब्यूटी एडवाइजर व सी डब्लू सी ब्यूटी एंड मेकअप स्टूडियो की सेलिब्रिटी ब्यूटी एंड मेकअप एक्सपर्ट शालिनी योगेद्र गुप्ता की ये ब्यूटी टिप्स आजमाएँगी तो आज चाहे मौसम कैसा भी रहे आप दमकी-दमकी नजर आएँगी।

कलर कोडः
अपनी स्किन से मैच करती फाउंडेशन शेड चुनिए। यदि आपकी स्किन पीलापन लिये है तो येलो कलर का फाउंडेशन लगाएं। गोरे रंग की महिलाएं पिंकिश फाउंडेशन लगा सकती हैं।
ब्रोंज इफेक्टः ऐसे रंग का इस्तेमाल करें, जो नेचुरल लगता है। डार्क रंगों के इस्तेमाल से बचें, क्योंकि इससे आपकी बड़ी कठोर सी छवि बनती है। बहुत ज्यादा सफेद और पीले रंग का इस्तेमाल भी बहुत ज्यादा बनावटी लगता है।
पाउडर का प्रयोग: अपनी स्किन के मिजाज के अनुरूप क्रीम या पाउडर में से किसी एक को चुनें। यदि आपकी स्किन बहुत ज्यादा आॅयली है तो आप पाउडर का चुनाव करें। यह आपकी स्किन के साथ ज्यादा बेहतर ढंगे से मिक्स हो जाता है। और यदि आपकी स्किन ड्राई है तो क्रीम बेस का प्रयोग करें, ताकि मेकअप कुछ घंटों बाद ही फैलने न लगे ।
ब्लश स्पाॅटः गालों के ऊपरी हिस्से पर ब्लश आॅन करें, लेकिन ध्यान रखें ज्यादा ब्लश आॅन न करें, अन्यथा आप जोकर की तरह दिखने लगेंगी। साथ ही ब्रिक टोन ब्लश आॅन का चुनाव करें-यह सभी के लिए काम करता है। § Read_More....

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विपदा पर एकता का परिचय दें

देश पर विपदा आने पर हम सभी को एक स्वर में सहमति देते हुए चर्चा करना चाहिए क्योंकि अगर हम अलग-अलग आवाजों में बात करेंगे तो इससे विरोधियों को मजबूती मिलने का अवसर मिलेगा। इससे एक सवाल उठता है कि क्या हमारे राजनीतिक लाभ, विचारधारा का महत्व, व्यक्तिगत नेतृत्व की महत्वाकांक्षाएं देश से बड़ी हो सकती हैं? पिछले उदाहरणों को मानें तो हमारे पिता, पितामह की आंखों के सामने देश विभाजित हुआ था और उस दौरान लाखों लोग मारे गए थे और एक पुरखे होने के बावजूद साम्प्रदायिक उन्माद ने देश बांटा ही नहीं बल्कि नए शत्रु पैदा कर दिए।
वर्तमान के मुद्दे की बात करें तो अगर कश्मीर जाता है तो सोचिए किसकी क्षति है? और कश्मीर में आतंकवादियों का निर्मूलन होता है तो किसकी उपलब्धि होती है? हमारे देश के बलिदानों के बारे में गहराई से सोंचिए। हम प्रायः देशभक्ति टीवी के परदे के क्षणिक अतिरेकी उत्साह में लिपटती देखते हैं। लेकिन शहीद सैनिकों के परिजनों के दर्द को न समझते हुए उनके बलिदान पर राजनीति की रोटियां सेकने का अवसर खोजते हैं यह बहुत ही शर्मनाक है। फिर भी हम शहीदों के संदर्भ में शोर मचाना, वितण्डा खड़ा करना, अखबारों में ऐसे बयान देना कि मेरा स्वदेशी नेता तो आहत हो ही, मैं शत्रु देश में भी स्वदेश के खिलाफ प्रमाण बन जाऊं, यह सब चलता रहता है। § Read_More....

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हर समय कोई न कोई संक्रामक रोग

pankaj-k-singhभारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश के लिए यह बहुत आवश्यक है कि उसके नागरिक स्वस्थ रहें। भारत में अनियमित जीवनशैली और खराब खान-पान के कारण अधिसंख्य नागरिक प्रतिदिन बीमार ही बने रहते हैं। भारत के प्रत्येक क्षेत्र में सर्वत्र अस्पताल बीमारों से पटे पड़े रहते हैं। देश में हर समय कोई न कोई संक्रामक रोग चलन में बना ही रहता है और करोड़ों नागरिक निरंतर संक्रामक बीमारियों और बुखार आदि से पीड़ित रहते हैं।
स्पष्ट है कि यदि हमें स्वस्थ रहना है तो अपनी जीवनशैली और खान-पान से समस्त प्रकार के प्रदूषणों को मुक्त करना होगा। भारत को इस संदर्भ में चीन, जापान और कोरिया जैसे देशों से सबक लेना चाहिए। इन देशों के नागरिक जीवनशैली और खान-पान के मामले में परंपरागत और प्राकृतिक तौर-तरीकों का ही प्रयोग करना पसंद करते हैं। भारत में पारंपरिक रूप से खाद्य पदार्थ उत्पन्न करने से लेकर भोजन पकाने तथा परोसने तक प्रकृति और स्वास्थ्य के अनुकूल बेहद अच्छी आदतें प्रचलन में रही हैं, परंतु समय बीतने के साथ भारतीयों ने इन अच्छी आदतों को त्याग दिया।
आज भारत में लगभग सभी खाद्य पदार्थ मिलावटखोरी से ग्रस्त हैं। कृषि में रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग तथा अन्य प्रदूषणों के कारण भोजन अशुद्ध एवं अस्वास्थ्यप्रद होता जा रहा है। प्रायः भोजन बनाने और खाने के बर्तन इत्यादि भी स्वास्थ्य की दृष्टि से उचित नहीं रह गए हैं। योग और व्यायाम की मात्रा भी दैनिक जीवन में प्रायः समाप्त सी ही हो गई है। भारत को पुनरू योग और पारंपरिक तौर-तरीकों को अपनाने की आवश्यकता है। इस संदर्भ में भारत में बाबा रामदेव सरीखे कतिपय योग गुरुओं ने उल्लेखनीय प्रयास किए हैं। योग उत्पादों की बिक्री के मामले में ‘पतंजलि संस्थान’ के उत्पादों ने लोकप्रियता के मामले में कई दिग्गज बहुराष्ट्रीय दवा निर्माता कंपनियों को पीछे छोड़ दिया है। स्पष्ट है कि यदि भारतीय अपनी मौलिक प्रतिभा और ज्ञान का प्रदर्शन करें, तो देश को स्वास्थ्य क्षेत्र में बहुत आगे बढ़ाया जा सकता है। § Read_More....

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