Wednesday, October 17, 2018
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Daily Archives: 24th November 2016

ब्यूटीशियन का व्यवसायिक प्रशिक्षण समारोह संपन्न

फिरोजाबाद, जन सामना संवाददाता। विकास खंड हाथवंत पर नेहरू युवा केंद्र के जिला युवा समन्वयक हरिहर नाथ वर्मा के निर्देशन में राष्ट्रीय चेतना नेहरू युवा विकास समिति भकार द्वारा महिलाओं को आत्मनिर्भर सशक्तीकरण के लिये 23 सितम्बर 2016 से दो माह का रोजगारपरक ब्यूटीशियन का व्यवसायिक प्रशिक्षण चल रहा था, जिसमें 25 महिला प्रतिभागियों ने सफलतापूर्वक प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण का समापन क्षेत्र पंचायत सदस्य राहुल जैन ने किया। समिति अध्यक्ष रामसेवक ने कहा कि नेहरू युवा केंद्र एवं युवा विकास कार्यक्रम भारत सरकार द्वारा समय समय पर युवा को रोजगारपरक प्रशिक्षण खेलकूद जागरूकता आदि सम्मान दिलाने के लिये गोष्ठी, सेनिमार आदि का आयोजन किया जाता है। § Read_More....

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आगे-आगे देखिए होता है क्या

kanchan-pathak1000 और 500 की नोटबंदी के बाद दो तरह के लोग देखने को मिले, एक वे जो यह सोचकर खुश थे कि अब गरीब और अमीर एक जैसे हो जाएँगे और दूसरे वे लोग जिनके लिए यह घोषणा किसी सदमे से कम नहीं थी। नोटबन्दी का यह फैसला जाली नोटों के कारोबार और कालेधन पर नकेल कसने के लिए लिया गया। भारतीय अर्थव्यवस्था में जाली नोटों की समस्या एक बहुत पुरानी बीमारी है, सरकारें इससे पार पाने के लिए हमेशा से प्रयत्न करती रहीं हैं और जाली नोटों के कारोबारी तू डाल-डाल मैं पात-पात की तर्ज पर सरकार को चकमा देकर अपने तोड़ निकालते रहे हैं। यह सच है कि इन जालियों की कमर तोड़ने के लिए काफी समय से एक बेहद कठोर और निष्ठुर कदम उठाने की दरकार भी थी पर ये भी सच है कि इस सब में गेंहूँ के साथ साथ घुन भी पिस गया।
जीवनभर कपड़े सिलकर, दूध बेचकर या अपनी जिम्मेदारियाँ निभाने के लिए पूरी ईमानदारी से एक-एक पैसे बचाकर जिन्होंने दस-बीस लाख रूपये जोड़े थे उनके सर पर मानों आसमान टूट पड़ा। सबसे पहली बात तो यह कि हमारे समाज का नियम हीं ऐसा है कि जिनके पास पैसे नहीं हैं, उन्हें नीची निगाहों से देखा जाता है। इस कारण से सबलोग कुछ न कुछ बचाकर रखते हीं हैं। उनकी आँखों के आगे अँधेरा छा गया जिन्हें बेटियों की शादी करनी है क्योंकि आज भी एक आम हिन्दुस्तानी पति ससुराल से मिलने वाले पैसों के लालच से बाहर नहीं निकल पाया है। सिर्फ कानून बनाने से क्या होता है, दहेज-निरोध के कानून को ऐसे लोग अपने पैरों के नीचे रख कर चलते हैं स उन गृहणियों का कलेजा टूक-टूक हो गया जिन्होंने अपने पतियों से छुपाकर अपनी संतानों के भविष्य के लिए कुछ जोड़कर रखे थे, बहुत जागरूकता के बाद भी आज भी सारे पति एक से नहीं होते। अतिसम्पन्न ऊँचे तबके के लोगों का यह कर्तव्य होना चाहिए कि वह समाज में अच्छे सकारात्मक आदर्श प्रस्तुत करें पर जिस समाज में नोटों की इस भयानक अफरा तफरी के बीच, जहाँ अधिकतर लोगों के पास सब्जी खरीदने को भी पैसे की किल्लत हो गई, उच्चवर्ग की ओर से पाँच सौ करोड़ की शादी के आयोजन का आदर्श प्रस्तुत किया गया तो वैसे उच्चवर्गीय समाज से मध्यम या निम्नवर्ग किस आदर्श की अपेक्षा रख सकता है ….। § Read_More....

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