• भाजपा प्रत्याशी सतीश महाना का करेंगे विरोधः डाॅ0 दीप कुमार शुक्ल

    मुख्य समाचार

    कानपुर, जन सामना ब्यूरो। महाराजपुर विधान सभा क्षेत्र में आने वाले योगेन्द्र विहार मुहल्ले के रहने वाले लोग इस बार भाजपा प्रत्याशी सतीश महाना का पुरजोर विरोध करेंगे, यह जानकारी देते हुए स्वतंत्र पत्रकार डाॅ0 दीप कुमार शुक्ल, धर्मेन्द्र सिंह भदौरिया, मुकेश शुक्ल, भोला शर्मा, सीएल वर्मा, राजीव कुमार, सोनू सैनी, अनुरुद्ध सिंह, सुरेन्द्र सिंह, राजेन्द्र सिंह, कल्लू भदौरिया, राधे शर्मा, भक्तिन पासवान, रूचि श्रीवास्तव, धर्मेन्द्र चैहान, विश्वजीत भदौरिया, हरिनारायण साहू, जय नारायण, पुत्तन, रमेश दुबे, ऋषि तिवारी, आशाराम, राजू सैनी, लक्ष्मण कुशवाहा, पं0 शिव नाराण शुक्ल सहित अन्य लोगों ने बताया कि योगेन्द्र विहार के ज्यादातर मतदाता इस बार विधान सभा चुनाव में वर्तमान विधायक व भाजपा प्रत्याशी सतीश महाना का खुलकर विरोध करेंगे। क्योंकि बीते पांच वर्षो में उन्होंने अपनी निधि से इस क्षेत्र में कोई भी विकास कार्य नहीं कराया। मुख्यमन्त्री कोष से हुए विकास कार्यों के पत्थरों पर उन्होंने अपना नाम जरूर लिखवा लिया है। गौर तलब हो कि पिछले चुनाव में इस क्षेत्र के निवासियों ने सतीश महाना का खुलकर समर्थन किया था। डाॅ. दीप कुमार शुक्ल ने बताया कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से लोगों से मिलकर सतीश महाना को वोट देने की अपील की थी। लेकिन वक्त गुजरा और मुहल्ले में हुई रासलीला के उद्घाटन हेतु सतीश महाना से समय लिया गया क्योंकि श्री महाना का सम्मान भी होना था। § Read_More....

  • मन उलसित भयो आज

    लेख/विचार

    kanchan pathakमंद मंद पवन बहे पुष्पन सुगंध लेत
    मन उलसित भयो आज आओ री, आओ री
    बसंत चपल है, वसंत चंचल है, बसंत सुन्दर है, बसंत मादक है, बसंत कामनाओं की लड़ी है, बसंत तपस्वियों के संयम की घड़ी है, बसंत )तुओं में न्यारा है, बसंत अग-जग का प्यारा है।
    इस ऋतु में सरसों फूलकर पूरी धरती को पीले रंग से रंग देती है। हमारे यहाँ वसंत का विशिष्ट रंग पीला होता है। पीला रंग आध्यात्म का भी प्रतीक है। कई पश्चिमी देशों में बसंत का विशिष्ट रंग हरा होता है। हरा का मतलब सर्वत्र हरियाली, प्रकृति का रंग, पर हमारे यहाँ इस मनोहारी ऋतु को आध्यात्म के उत्सव के रूप में मनाया जाता है। हम भारतीय इसे सरस्वती की अभ्यर्थना से प्रारंभ करके होली के महा-उत्सव पर समाप्त करते हैं।
    शीत या शिशिर की ठिठुरन भले ही हाड़ कंपाती हो किन्तु इन बर्फीली ऋतुओं के बिना भी तो प्रकृति का आँगन सूना-सूना होता है और फिर इसके बाद गाते गुनगुनाते रस के पुखराजी छींटे उड़ाते बसंत के आगमन से मौसम के आँगन का सुख दूना-दूना होता है। वसंत की रंगत ही ऐसी मनोहारी है कि कठोर से कठोर तपस्वी का ह्रदय भी पुरवैया की झकोर से बेबस हो आत्मनियंत्रण खो कर बेकाबू हो जाए। ऋषि विश्वामित्र के तपोभंग का वृतांत इसका सबसे प्रबल प्रमाण है। § Read_More....

..प्रकाशकः श्याम सिंह पंवार
कार्यालयः 804, वरुण विहार थाना-बर्रा जिला-कानपुर-27 (उ0 प्र0) भारत
सम्पर्क सूत्रः 09455970804
jansaamna@gmail.com ..

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