Friday, April 26, 2019
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Daily Archives: 22nd March 2019

होली की मस्ती में डूबा खीरों कस्बा, चारो ओर बिखरे नजर आए रंग और गुलाल

खीरों/रायबरेली, जन सामना ब्यूरो। खीरों कस्बे में चारों ओर होली की खुमारी छाई हुई है। रंग-गुलाल के साथ मोहल्ले ओर बाजारों में होल्यारों की टोलियां नजर आई। वही लोग एक दूसरे को रंग लगाकर होली की शुभकामनाएं देते रहे। श्रद्धालुओं ने होलिका माता के चारों ओर परिक्रमा कर विधि विधान से पूजा-अर्चना की और खुशहाली की कामना की। एक दूसरे को अबीर गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दी गई। गुरुवार को खीरों कस्बे क्षेत्र में होली का त्योहार हर्षोल्लास से मनाया। आपसी भाईचारे और सामाजिक सौहार्द के प्रतीक होली में लोगों ने एक दूसरे को अबीर-गुलाल के रंगों से रंगने के बाद बधाई दी।

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विवाहिता की मौत, पिता ने दर्ज कराया मुकदमा

चन्दौली, जन सामना ब्यूरो।  बलुआ थाना क्षेत्र के पहाड़पुर गांव में बीती रात एक विवाहिता का शव फंदे से लटकता पाया गया। सूत्रो से मिली जानकारी के अनुसार  सूचना के बाद पहुंचे मायके वालों ने ससुरालियों पर दहेज के लिए हत्या करने का आरोप लगाते हुए पति समेत तीन के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की तहरीर दी है ।पुलिस शव को कब्जे में लेने के बाद आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही है।बताया गया कि धानापुर थाना क्षेत्र के ओड़वार गांव निवासी नान्हू यादव की लड़की कि शादी
पहाड़पुर गांव निवासी जनमेजय से 2014में हुई थी। मृतका के पिता का आरोप है कि शादी के बाद से ही ससुराल पक्ष के लोगो ने सुनीता को दहेज के लिए  प्रताड़ित कर रहे थे। जिसको लेकर कई बार विवाद हुआ। पिता की तहरीर पर पुलिस आरोपितों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी में जुटी है। इस संदर्भ में बलुआ थानाध्यक्ष धीरेन्द्र कुमार सिंह ने बताया कि मृतका के पिता की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर आरोपितों की तलाश की जा रही है।

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छायावाद का पुनर्पाठ जरूरी है

मुंबई, जन सामना ब्यूरो। जापान से पधारीं डॉ. तोमोको किकुचि ने कहा कि महादेवी वर्मा और जापानी कवयित्री निकोयो न केवल समकालीन थीं अपितु दोनों ही नारी जीवन का समान चित्र खींचती हैं। इस मौके पर प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए हिंदी विभाग के प्रोफेसर एवं अध्यक्ष डॉ. करुणाशंकर उपाध्याय ने कहा कि छायावादी कवियों के समक्ष हिंदी कविता को विश्वस्तर पर प्रतिष्ठित करने की चुनौती थी जिसे उन्होने बखूबी पूरा किया।यहां विज्ञान, धर्म, दर्शन और ज्ञान- विज्ञान के तमाम अनुशासन काव्य- संपत्ति बन जाते हैं। ये बड़ी चिंता के कवि है जो विश्वस्तरीयप्रश्न उठाते हैं। इस बहुस्तरीय, जटिल और बहुआयामी काव्य का सही मूल्यांकन होना अभी बाकी है। इस मौके पर अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुए डॉ. सूर्यप्रसाद दीक्षित ने कहा कि छायावादी कवियों के प्रति आलोचकों का रवैया बहुत अच्छा नहीं रहा। आचार्य शुक्ल से लेकर अब तक के आलोचक भी उसके साथ न्याय नहींकर पाये हैं। मुंबई विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग ने अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के आयोजन द्वारा एक ऐतिहासिक पहल की है।

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