Wednesday, October 17, 2018
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इटावा जनपद 70 साल आजादी के बाद भी कई गाँव आज भी बेखबर नहीं मिली जीने की आजादी

इटावा, राहुल तिवारी। इटावा जनपद में आज भी कई ऐसे गाँव है जहाँ आजादी के 70 साल बाद भी अपने मौलिक अधिकारों से वंचित है। देश की राजधानी दिल्ली से लगभग 320 किमी की दूरी पर और प्रदेश की राजधानी लखनऊ से लगभग 230 किमी की दूरी पर इटावा जनपद में बीहड़ी क्षेत्र में बसे कई गाँव वाशिंदे आज भी नर्क की जिंदगी जी कर अपने परिवार के साथ जीवन का संघर्ष करते दिखाई दे रहे हैं। इस जनपद के गरीबों की जमीनी हकीकत को देखा जाये तो शायद देखने वालों के पैरों तले जमीन खिसक जायेगी क्या आजादी के बाद बीहड़ में बसे गाँव वालों को जीने का अधिकार आखिर क्यों नही मिला, आजादी के बाद कई सरकारें आयीं गईं लेकिन आज भी इन गरीबों का दर्द जानने कोई भी क्यों नही पहुंचा। जब गाँव मे मीडिया टीम पहुंची तो गरीबों को जीने की उम्मीद दिखाई दी।
’गाँव वालों का क्या है जीवन’

इटावा जनपद के गाँव घुरा दूसरा पूँछरी ग्राम पंचायत नगला तौर जहां पर ग्राम प्रधान संध्या तोमर हैं। गाँव वालों का कहना है। हमारे गाँव मे कई दशकों से पीने के लिये पानी का कोई श्रोत नहीं है। हम लोग गाँव से काफी दूर यमुना नदी से पानी भरकर अपने परिवारों को पिलाते है और उसी पानी से खाना भी बनाते है। ये वही यमुना नदी है जो हर शहर से होकर गुजरती है जहाँ शहर के हर गन्दे नाले यमुना नदी में डाले जाते है। इसी पानी को ये गरीब अमृत समझकर पीने को मजबूर है। जो आये दिन बड़ी से बड़ी बीमारियों को न्योता देते हैं।
’योगी सरकार क्या कहती है’

इटावा ’’भाजपा सरकार सबका साथ सबका विकास’’ खुले में शौंच न जाने की बात करती है। आखिर वो विकास की डोर कहाँ है जो आज इटावा जनपद में कई गाँव अपने झोपड़ी में रहकर एक नर्क की जिन्दगी जीने को मजबूर हैं। सरकार गरीबों को आवास और शौचालय, उज्जला योजना के साथ-साथ कई योजनाओं की बात करती है। फिर भी आखिर इन गरीबों तक क्यो नहीं पहुँचे इन लाभकारी योजनाओं के फायदे?
’इटावा हाल ही में योगी जी का एक दिवसीय दौरा हुआ क्या कहा गरीबों के लिये’

इटावा मुख्यमंत्री आदित्य नाथ योगी जो पहली बार समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव के ग्रह जनपद में अपनी विकास की गंगा बहाने की बात करते दिखाई दिये कई उपलब्धियां गिनाई लेकिन इटावा जनपद में प्रशासनिक अधिकारी अपनी ड्यूटी पर सिर्फ कुर्सियां ही तोड़कर आवास में ऐशो आराम करते है जनपद में देखा जाए आज भी कई गाँव विकास से कोसों दूर है। जहां अधिकारियों के कानों पर जूं तक नही रेंगी।
’इटावा गाँव वालों ने की प्रधान की हकीकत बयां’
यमुना नदी के किनारे बसे कई गांव आज भी पानी के संकट से जूझ रहे है। गाँव वालों का कहना है हमारी पंचायत में कई ऐसे गाँव है। जहां ग्राम प्रधान अपनी दबंगई से गरीबों से सरकारी हैडपम्प लगाने के लिए 10 हजार की राशि लेता है। आखिर झोपड़ी में रहने वाले अपने परिवार को दो वक्त की रोटी खाने को मोहताज है। आखिर सरकारी हैडपम्प के लिये इतनी बड़ी राशि कहाँ से दे पायेंगे सरकार ऐसे ग्राम प्रधानों पर कार्यबाही क्यो नहीं करती है?
’इटावा ग्राम प्रधान की क्या है हकीकत’
इटावा बलरई ग्राम पंचायत नगला तौर ग्राम प्रधान संध्या तोमर चुनाव जीतने के बाद दिल्ली में चली गयीं जो अभी तक वापस नहीं लौटीं आखिर सवाल इस बात का है। ग्राम पंचायत में प्रधान न होने पर विकास कैसे किया जा रहा है। बड़े पैमाने पर ग्राम पंचायत में फर्जी बाड़ा कई सालों से चल रहा है। ब्लाक स्तर से लेकर बड़े प्रशासनिक अधिकारी आंख बंद कर मिली भगत से बंदरबांट करने में लगे हैं। ये है योगी जी की सरकार पैसा फेंको कुछ भी करो सरकार की जिस तरीके से योजनाओं की धज्जियां उड़ाई जा रही है शायद आगे इसका परिणाम जरूर मिलेगा।
सवाल इस बात का है आखिर वर्तमान प्रधान सन्ध्या तोमर की किसी प्रशासनिक अधिकारी ने खबर क्यों नहीं ली फर्जी हस्ताक्षर कर शासकीय राशि निकालकर गरीबों के हक पर पर्दा डालकर गरीबों के हकों को लूटा जा रहा है। अब देखना ये होगा ऐसे प्रधान पर जांचकर कर कायवबाही होगी या गरीबों के मंसूबो पर पानी फेर दिया जायेगा? गांव वालों का कहना है। अपने हक की लड़ाई लड़ते-लड़ते कई पुरखे अपनी अपनी उम्मीदों को लेकर अपने साथ अलविदा हो गये लेकिन आज भी इन गरीबों की हालत वैसी ही देखी जा सकती है।
’इटावा अधिकारियों की क्या है मंशा’
इटावा मीडिया टीम जब एसडीएम जसवंतनगर के पास पहुँची तो जनपद में बसे कई गाँव जो उपजिलाधिकारी जसवंतनगर के क्षेत्र में आते है। तो हाकिम परगना का जबाब मिलता है इसमें हम कुछ भी नहीं कह सकते है। तो क्या अधिकारियों को सिर्फ अपनी कुर्सी तक ही जानकारी होनी चाहिये? गाँवों के विकास का हाल देखा जाये तो प्रशासन की लापरवाही से कई किसानों की भूंख से मौते हो चुकीं हैं। आखिर इसका जिम्मेदार कौन है?
’इटावा – गुजिश्ता 70 साल आजादी के बाद भी गाँव के लिये नही बनाई गयी कोई सड़क’
इटावा – आजादी के बाद भी गाँव में नहीं बनाई गई कोई सड़क सन 2006 में भीषण आग लगने के कारण पूरा गांव हो गया था जलकर राख। आज भी फायर बिग्रेड की गाड़ियां नहीं पहुच पाती हैं। गांव में 2 दिन पहले भी लग चुकी है एक गरीब परिवार की झोपङी में आग किसी तरह ग्रामीणों ने धूल फेंक कर बुझाई।