Friday, October 19, 2018
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स्वदेशी चिकित्सा शिविर एवं व्याख्यान माला में उमड़ी भीड़

फिरोजाबादः जन सामना संवाददाता। औषधि को भोजन नहीं, भोजन को बनाएं औषधि। सरकार की खुले में शौच मुक्ति मुहिम पर कड़े प्रहार किए। छात्र-छात्राओं से कहा कि अंग्रेजी पढ़ें, लेकिन अंग्रेजियत को त्याग दें। पाश्चात्य सभ्यता संस्कृति हमारे देश के युवक-युवतियों को बर्बाद करने में लगी है। जिंक फूड के बारे में बताते हुए उन्होंने बच्चों से जिंक फूड न खाने का आह्वान किया।
सोमवार सुबह 11 बजे से स्टेशन रोड स्थित लक्ष्मी वाटिका में विवेकानंद विद्यापीठ एवं ब्रहमादेवी शिक्षण संस्थान के सहयोग से आयोजित स्वदेशी चिकित्सा शिविर एवं व्याख्यान सेमीनार में मुख्य वक्ता के रूप में आए वीरेंद्र सिंह ने कहा अंग्रेज देश को छोड़ कर चले गए, लेकिन अंग्रेजियत अभी भी जिंदा है। उन्होंने छात्र-छात्राओं से कहा कि अंग्रेजी पढ़े, बिना अंग्रेजी भाषा का ज्ञान करें हम भारत के खिलाफ हो रहे षणयंत्रों को नहीं पता कर पाएंगे। इस लिए अंग्रेजी का ज्ञान जरूरी है। लेकिन अंग्रेजियत का त्याग करें। पाश्चात्य सभ्यता और संस्कृति पर प्रहार करते हुए कहा कि आज कल फटे कपड़े पहनने की फैशन चल रही है। लड़कियां फटी जींस पहन कर घूमती हैं, लेकिन अगर हम फटा पायजामा पहन कर चलें तो लोग हमें गरीब बताते हैं। छात्र-छात्राओं से फूहड़ पहनावे से दूर रहने का आह्वान किया। इसके साथ ही तेजी से बढ़ रही फास्ट फूड (जिंक फूड) और कोल्ड्रिंक न खाने-पीने का संकल्प दिलाया। उन्होंने कहा कि औषधि को भोजन नहीं, भोजन को बनाएं औषधि। इस अवसर पर बिजेंद्र सिंह यादव, डॉ. हर्षवर्धन, दिनेश यादव, डॉ. ब्रजेश आचार्य, ग्रीश चंद्र, हाकिम सिंह, विकास यादव, राहुल यादव आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में विवेकानंद विद्यापीठ के निदेशक ने सभी का आभार व्यक्त किया।