jansaamna

. दिनांक की ख़बर खोजे

. लिखे ख़बर खोजे


स्वर सुनकर प्रशंसा करना अच्छा स्वर-विनम्र सागर


चित्र छाया स्वर सुनकर प्रशंसा करना अच्छा स्वर-विनम्र सागर कि ......

फिरोजाबाद, जन सामना संवाददाता। नाम के अनुसार काम नहीं, काम के अनुसार, योग्यता के अनुसार जिनका नाम रखा जाता है वह महापुरूष, भगवान कहलाते हैं, असंख्य गुणों के धारी होने आप असंख्य हैं। केवल ज्ञान रूपी वैभव से युक्त होने से आव विभु हैं, युग के आदि में हुये इसलिए आप आद्य हैं। योगियों के ईश्वर होने आप योगीश्वर हैं। ये प्रवचन नगर के छदामीलाल जैन मंदिर में आयोजित भक्तामर शिविर में जैन मुनि आचार्य विनम्र्र सागर महाराज ने दिये। कहा कि भगवान के 1008 नामों को स्मरण करने वाले व्यक्ति की वृद्धि में वृद्धि होती है। सम्पूर्ण ज्ञान व सभी विषयों का ज्ञान होता है। इसलिए सभी को सहस्त्रनाम का भावपूर्वक पढ़कर अपनी बुद्धि, मेघा व प्रज्ञा को विकसित करें। आचार्य श्री ने कहा जो दुबारा जन्म लेने जा रहा है उसका मरण होता है। जितनी उम्र थी उससे पहले दुर्घटना में मृत्यु हो जाना अकालमरण है, जो पूरी उम्र मरने वाला है वह सकाल मौत है।

आचार्य ने ज्योतिष को समझाते हुये कहा स्वर नाम कर्म के उदय से किसी का मीठा स्वर, किसी को कर्कश स्वर, किसी का भद्दा स्वर, किसी का अच्छा स्वर होता है। किसी की आवाज सुनकर ठहरने का मन हो जाना व आवाज की प्रशंसा करने से मीठा स्वर है। चेहरे को खराब करके बोलना भद्दा स्वर है, नेचुरल बोल रहे फिर भी आवाज अच्छी नहीं लगना कर्कश है। स्वर सुनकर प्रशंसा करना अच्छा स्वर है। मंगलाचरण श्रीमती पूनम ने किया। दीप प्रज्जवलन, पाद प्रक्षालन का सौभाग्य संजय जैन (बल्ले) ने किया। भक्तामर विधानकर्ता सतेंद्र जैन साहू परिवार रहा।