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2016-02-14

प्रेम का त्योहार  


चित्र छाया प्रेम का त्योहार    कि ......

Kanchan Pathak, Mumbai

यूरोपीय दन्तकथाओं के अनुसार सन्त वेलेंटाइन जिनके नाम पर पश्चिमी देशों में वेलेंटाइन दिवस मनाए जाने की शुरुआत हुई, प्राचीन रोम के एक पादरी थे। कहते हैं कि इन्होनें रोमन सम्राट क्लोडिअस के उस कानून को मानने से इंकार कर दिया था जिसमें रोमन युवकों को शादी करने की सख्त मनाही की गई थी इस कानून के पीछे की राजनीतिक मंशा बिलकुल स्पष्ट है..... कि परिवार के मोह बन्धन से मुक्त युवक देश के लिए समर्पित सिपाही साबित होंगे और युद्ध वगैरह के लिए घर से दूर लडाई के मोर्चों पर जाने के कतई नहीं कतराएँगे। पर जवान लड़कों के लिए ऐसे कानून से निर्मम सजा और क्या होगी खास कर ऐसे युवक जिनका किसी से प्रेम सम्बन्ध चल रहा हो पर कोई भी चर्च उनकी शादी कराने को तैयार न हो.... तो पादरी वेलेंटाइन चुपचाप अपने गिरजाघर में ऐसे जवान सिपाहियों की शादियाँ करवा दिया करते थे। आज नहीं तो कल राजा को इस बात का पता तो चलना हीं था तो जब सम्राट क्लोडिअस को इस बारे में पता चला तो उसने वेलेंटाइन को गिरफ्तार करवाकर जेलखाने में डलवा दिया और उसे राजा के आदेश का उल्लंघन करने के जुर्म में फाँसी की सजा सुनाई गई। इसके बाद की घटना बेहद हीं दिलचस्प है ..... हुआ यूँ कि जेलर की पुत्री को वैलेंटाइन से प्यार हो गया दन्तकथाओं के अनुसार जेलर की यह पुत्री अन्धी थी और पादरी वेलेंटाइन ने उसकी आँखों को ठीक कर दिया था। सजा-ए-मौत पाए हुए पादरी ने मरने से एक शाम पहले अपनी प्रेमिका के नाम पहला ‘’वेलेंटाइन-सन्देश’’ लिखा था। इसके बाद से हीं इस दिवस को प्रेम और प्रेमियों के त्यौहार के रूप में मनाया जाने लगा।

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