Thursday, September 24, 2026
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आत्मा की शुद्धि और कर्मों की निर्जरा के लिए तपस्या ही सर्वोत्तम मार्ग : निर्भय सागर

फिरोजाबाद। सुहागनगरी के विभिन्न जैन जिनालयों में दशलक्षण महापर्व के पावन अवसर पर उत्तम तप धर्म की पूजा-अर्चना एवं भक्ति भाव के साथ विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए। धर्मसभा को संबोधित करते हुए संतों ने कहा कि आत्मा की शुद्धि और कर्मों की निर्जरा के लिए तपस्या सर्वोत्तम मार्ग है। तप केवल शरीर को कष्ट देना या सुखाना नहीं, बल्कि मन, वचन और काय की प्रवृत्तियों को आत्मकल्याण की दिशा में लगाना है। छदामीलाल जैन मंदिर में विराजमान संत आचार्य निर्भय सागर महाराज के सानिध्य में प्रातः जिनेंद्र देव का अभिषेक, शांतिधारा एवं दशलक्षण मंडल विधान का पूजन संपन्न हुआ। इस अवसर पर आचार्य ने अपने उद्बोधन में कहा कि तप वह अग्नि है, जिसमें तपकर आत्मा कुंदन बन जाती है। जब तक इच्छाओं का निरोध नहीं होगा, तब तक सच्चे तप का प्राकट्य संभव नहीं है। सांसारिक सुख क्षणिक हैं, जबकि तपस्या से प्राप्त आत्मिक सुख शाश्वत है। उन्होंने श्रावकों से अपनी दिनचर्या में संयम और स्वाध्याय को शामिल करने तथा जीवन को संस्कारवान बनाने का आह्वान किया। नई बस्ती स्थित जिनालय में आर्यिका विजयमती माताजी के सानिध्य में तथा बाहुबली दिगंबर जैन जिनालय में गुरु मां आर्यिका विजयमती माताजी के सानिध्य में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। गुरु मां ने श्रावकों को संबोधित करते हुए कहा कि बच्चों को बचपन से ही जैन धर्म के मूल सिद्धांतों और संस्कारों से जोड़ना माता-पिता का प्रमुख कर्तव्य है। धर्म ही जीवन का सच्चा आधार है, जो विपरीत परिस्थितियों में ढाल का काम करता है।

बच्चों की भावपूर्ण नृत्य नाटिकाओं ने मोहा मन

धार्मिक अनुष्ठानों के बाद आयोजित सांस्कृतिक संध्या में नन्हे-मुन्ने बच्चों ने रंगारंग एवं शिक्षाप्रद प्रस्तुतियां देकर सभी का मन मोह लिया। बच्चों की नृत्य नाटिकाओं में भगवान महावीर के जीवन आदर्शों, उत्तम तप धर्म के महत्व और नैतिक मूल्यों का जीवंत चित्रण किया गया। बच्चों के अभिनय और भक्ति भाव से उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो गए। प्रस्तुतियों के दौरान पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। कार्यक्रम के अंत में सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं एवं नृत्य नाटिकाओं में प्रतिभाग करने वाले बच्चों को आचार्य श्री एवं गुरु मां के आशीर्वाद से पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।