माननीय प्रधानमंत्री द्वारा 8 सितंबर को पूर्ण हो चुके पश्चिमी समर्पित माल गलियारे—वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर—को राष्ट्र को समर्पित किया जाना भारतीय रेल के बदलते स्वरूप की यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने रेलवे के बुनियादी ढाँचे पर विशेष बल दिया है—विद्युतीकरण, नई रेल लाइनें, दोहरी और बहुल लाइनें, स्टेशनों का पुनर्विकास, आधुनिक ट्रेनें, बेहतर सुरक्षा एवं सिग्नल प्रणाली और देश के सर्वाधिक व्यस्त रेलमार्गों पर अतिरिक्त क्षमता का निर्माण इसी प्रयास का हिस्सा हैं।
वडोदरा में प्रधानमंत्री ने इस व्यापक सोच को कुछ शब्दों में बहुत प्रभावशाली ढंग से व्यक्त किया—“हम लोगों और सामान को अधिक तेजी से पहुँचाने, नए अवसर पैदा करने और आर्थिक विकास को गति देने के लिए भारत के बुनियादी ढाँचे को मजबूत कर रहे हैं।”
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Jansaamna
अपनी सत्ता को अक्षुण्ण बनाए रखने के प्रयास में राजनीति कब किस कुचक्र में फंस जाए तथा अपनी ही चालों में भटककर आम आदमी के लिए संकट खड़ा कर दे, कहा नहीं जा सकता। भारत की जाति आधारित राजनीति राष्ट्र की एकता व अखंडता को दांव पर लगाकर कब व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं के लिए जन भावनाओं को आहत करने लगे, इसका भी पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता।
इतिहास की एक अजीब आदत है। वह हमेशा विजेताओं के नाम याद रखता है, लेकिन विजय की नींव रखने वालों को अक्सर भूल जाता है। वह मंच पर खड़े नेताओं की तस्वीरें छापता है, नारों को याद रखता है, भाषणों को उद्धृत करता है, समझौतों की तारीखें लिखता है और इस्तीफों को लोकतंत्र की जीत घोषित कर देता है। लेकिन इतिहास की किताबों में शायद ही कभी उस आदमी का नाम मिलता है जिसने सबसे पहले अपनी जेब से कलम निकाली, मोबाइल निकाला, कैमरा चालू किया और देश को बताया—”यहाँ कुछ ऐसा हो रहा है जिसे पूरे देश को देखना चाहिए।”
2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम भारत में राजनीति के स्वरूप को बदलने का ऐतिहासिक अवसर है। हालांकि इसका क्रियान्वयन 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले संभव है, लेकिन यह तभी सफल होगा जब राजनीतिक दल अभी से महिलाओं के लिए अनुकूल वातावरण बनाएँ। केवल आरक्षित सीटें देना पर्याप्त नहीं; दलों को आंतरिक कोटा, वित्तीय सहयोग, प्रशिक्षण, मेंटरशिप और निर्णयकारी भूमिका में महिलाओं को प्राथमिकता देनी होगी। अगर यह मौका चूक गया तो आरक्षण भी दिखावा बन जाएगा। समावेशी और सशक्त लोकतंत्र के लिए अब निर्णायक और नीतिगत पहल ज़रूरी है।