कविता पंत: नई दिल्ली। विपक्ष मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नया महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है, जबकि कॉकरोच जनता पार्टी ने ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे के भीतर इस्तीफा देने का अल्टीमेटम दिया है। महाभियोग प्रस्ताव के लिए कांग्रेस पहल कर रही है और इंडिया गठबंधन की बाकी पार्टियां इस कदम पर सहमत हो गई हैं। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, प्रस्ताव के लिए एक नोटिस का मसौदा तैयार किया जा रहा है और इसे अगले सप्ताह की शुरुआत में संसद में पेश किया जा सकता है। विपक्ष का यह प्रस्तावित कदम द इंडियन एक्सप्रेस की एक खबरिया जांच रिपोर्ट के एक दिन बाद आया है, जिसमें बताया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर चुनाव आयोग के फैसलों और आदेशों पर औपचारिक रूप से आपत्ति जताई थी, जिसमें मतदाता सूची में बदलाव से जुड़े मामले भी शामिल थे। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर जमकर हमले किए। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त को देशद्रोही तक करार दिया और इस्तीफे की मांग की।
इस बीच कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “अगर 48 घंटे के अंदर ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं, तो हम पूरे देश में विरोध प्रदर्शन करेंगे।”
इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के एक वकील ने आज चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू करने के लिए भारत के अटॉर्नी जनरल से मंजूरी मांगी है। कुमार पर आरोप है कि उन्होंने आयोग के कामकाज को नियंत्रित करने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को जानबूझकर नहीं माना है। विपक्ष ने रिपोर्ट की गई आपत्तियों को ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई के लिए नया आधार बताया है। हालांकि निर्वाचन आयोग ने इस बात से इनकार किया है कि उसके फैसले बंटे हुए थे या दोनों चुनाव आयुक्तों ने पूरे आयोग के फैसलों से औपचारिक रूप से असहमति जताई थी। निर्वाचन आयोग ने कहा है कि पिछले साल उसके सभी फैसले एकमत से लिए गए थे, जिसमें एसआईआर से जुड़े फैसले भी शामिल हैं। निर्वाचन आयोग ने बुधवार को रिपोर्ट पर आठ बिंदुओं वाले बयान के साथ जवाब दिया, जिसमें कहा गया कि निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक संस्था है, जो संविधान के अनुच्छेद 324 और कानूनी नियमों के तहत काम करती है।
इसमें कहा गया, “निर्वाचन आयोग के सभी काम आयोग के कानूनों और निर्देशों के अनुसार किए गए हैं। उसके सभी सरकारी आदेश, फैसले और निर्देश कानूनी मंजूरी वाले हैं।”
उल्लेखनीय है कि तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी पार्टियों ने 12 मार्च को संसद के दोनों सदनों में कुमार को हटाने के लिए नोटिस दिए थे। लोकसभा के नोटिस पर 130 सांसदों और राज्यसभा के नोटिस पर 63 सांसदों के हस्ताक्षर थे। महाभियोग प्रस्ताव के लिए लोकसभा में कम से कम 100 सांसदों और राज्यसभा में 50 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी हैं। 6 अप्रैल के आदेश में, राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने इस नोटिस को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि आरोपों से संविधान के अनुच्छेद 324 (5) और 124 (4) के तहत हटाने के लिए आवश्यक “दुर्व्यवहार” का प्रथम दृष्टया मामला स्थापित नहीं होता है। राधाकृष्णन ने कहा कि कुछ आरोप ऐसे मामलों से जुड़े थे, जिन पर “पहले ही फैसला हो चुका था या जो न्यायिक समीक्षा के तहत थे।” उन्होंने यह भी कहा कि “प्रशासनिक असहमति या राजनीतिक धारणाओं” के आधार पर हटाने के प्रस्तावों को स्वीकार करने से चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर असर पड़ सकता है।
Jansaamna