Sunday, September 27, 2026
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निर्वाचन आयोग का विस्तृत स्पष्टीकरण, एसआईआर के सभी फैसले सर्वसम्मति से

कविता पंत: नई दिल्ली। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर लगे आरोपों और एसआईआर को लेकर जारी विवाद के बीच निर्वाचन आयोग ने आज स्पष्ट किया कि मतदाता सूचियों के विशेष पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े सभी निर्णय तीनों आयुक्तों की सर्वसम्मति और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए ही लिए गए हैं। निर्वाचन आयोग ने अपना आधिकारिक बयान जारी किया और चुनाव आयुक्तों की असहमति के विवाद पर विस्तार से स्पष्टीकरण जारी किया है। आयोग के महानिदेशक (मीडिया) आशीष गोयल ने बयान जारी करते हुए कहा कि आज आयोग की बैठक हुई। आयोग ने स्पष्ट किया कि एसआईआर से जुड़े सभी निर्णय तीनों आयुक्तों की सर्वसम्मति और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए ही लिए गए हैं।

प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने शनिवार दोपहर नई दिल्ली में निर्वाचन सदन में बैठक की। इसके साथ तीनों की एक टेबल पर बैठी हुई तस्वीर भी थी। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब एक मीडिया रिपोर्ट को लेकर विवाद चल रहा है, जिसमें कहा गया है कि संधू और जोशी ने कई मौकों पर एसआईआर से जुड़े फैसलों और आदेशों पर आपत्ति जताई थी। निर्वाचन आयोग ने कहा कि एसआईआर से संबंधित सभी निर्णय सर्वसम्मति से अनुमोदित किए गए हैं, जिनमें राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण शामिल है। आयोग ने उन मतदाताओं के लिए प्रक्रिया को सरल बनाने के उपायों की घोषणा की है, जिन्हें विसंगतियों को लेकर नोटिस मिल रहे हैं। यह स्पष्टीकरण उस रिपोर्ट पर उठे विवाद के बीच आया है, जिसमें दावा किया गया था कि चुनाव आयोग के भीतर मतदाता सूचियों के एसआईआर को लेकर मतभेद हैं। निर्वाचन आयोग ने कहा कि तीसरे चरण के शेष 12 राज्यों में अंतिम परिणाम प्रकाशित होने के बाद ही मतदाताओं की अंतिम संख्या ज्ञात होगी।

आयोग ने फैसला किया कि एसआईआर के दौरान जिन मतदाताओं को मानचित्रण न होने या तार्किक विसंगतियों के कारण नोटिस प्राप्त होते हैं, उन्हें आमतौर पर चुनावी पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) के समक्ष उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं होगी। बूथ-स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) उनके घरों का दौरा करके दस्तावेज एकत्र करेंगे और उन्हें ईआरओ के निर्णय हेतु ईसीआईएनईटी पर अपलोड करेंगे। आयोग ने कहा कि सुनवाई केवल असाधारण मामलों में ही होगी और यह ऑनलाइन होगी। यदि अधिकृत हो, तो मतदाता की ओर से परिवार का कोई वयस्क सदस्य भी सुनवाई में उपस्थित हो सकता है। आयोग ने कहा कि ऑनलाइन सुनवाई की सुविधाओं को मजबूत किया जाएगा। आयोग ने जिला चुनाव अधिकारियों को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप रात्रि आश्रयों में रहने वाले लोगों, मजदूरों, गरीबों और बेघर व्यक्तियों के लिए सहायता डेस्क और विशेष शिविर स्थापित करने का भी निर्देश दिया।

निर्वाचन आयोग ने बताया कि बिहार और पश्चिम बंगाल समेत 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। आयोग ने कहा कि जिन मतदाताओं के नाम इस प्रक्रिया के दौरान या बाद में छूट गए हैं, साथ ही युवा और पहली बार मतदान करने वाले मतदाता, संबंधित ईआरओ को निरंतर अद्यतन के माध्यम से अपना नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (सीईओ), डीईओ (जिला निर्वाचन अधिकारी) और ईआरओ को एक विशेष नामांकन अभियान शुरू करने का निर्देश दिया गया है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि कैबिनेट सचिव को भेजा गया पत्र आयोग या उसके सूचना प्रौद्योगिकी विभाग से संबंधित किसी नीतिगत निर्णय से संबंधित नहीं था, बल्कि निर्वाचन आयोग में प्रतिनियुक्ति पर तैनात एक अधिकारी के कामकाज से संबंधित था। इसमें कहा गया है कि अधिकारी द्वारा जारी किए गए कार्य पुनर्वितरण आदेशों को दो आयुक्तों के निर्देशों के बाद भी लागू नहीं किया गया और उप चुनाव आयुक्त द्वारा आईटी विभाग की निगरानी कभी वापस नहीं ली गई। चुनाव आयोग ने कहा कि फील्ड अधिकारियों को उनकी वैधानिक शक्तियों के आधार पर ईसीआईएनईटी प्रणाली तक पहुंच प्राप्त है। एक वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त की अध्यक्षता में और एक स्वतंत्र आईआईटी/आईआईटी विशेषज्ञ सहित एक समिति प्रासंगिक कानूनों और नियमों के अनुपालन के लिए प्रणाली की समीक्षा करेगी। आयोग ने यह भी कहा कि दिल्ली में नोटिस एवं आपत्तियों के निपटारे की समय सीमा 30 नवंबर तक बढ़ा दी गई है।