जन सामना संवाददाता: कानपुर। आरटीओ कार्यालय में मंगलवार को अधिकारियों की त्वरित कार्रवाई और संवेदनशीलता की एक मिसाल देखने को मिली। वाहन ट्रांसफर कराने आई एक महिला और उनके भाई के साथ बिचौलिए द्वारा अभद्रता और विवाद करने की सूचना मिलते ही वरिष्ठ अधिकारियों ने तुरंत मोर्चा संभाला। अधिकारियों ने न केवल स्थिति को संभाला, बल्कि पीड़िता की समस्या का समाधान कराया।
कानपुर देहात के बनी गाँव की रहने वाली अंकिता तिवारी ने अपने भाई अमित तिवारी के साथ आरटीओ कार्यालय पहुँचकर बताया कि दो महीने पहले उन्होंने एक बिचौलिए को कागजात सौंपे थे, जिसने काम अटका रखा था। जब उन्होंने अपने दस्तावेज वापस मांगे, तो बिचौलिए ने बहस व धक्का-मुक्की शुरू कर दी। इस दौरान कार्यालय की एक सतर्क महिला कर्मचारी (बाबू) ने बिना अपनी परवाह किए आगे आकर तुरंत बचाव किया और अधिकारियों को सूचित किया।
हंगामे की जानकारी मिलते ही आरटीओ प्रशासन राकेन्द्र कुमार सिंह और एआरटीओ प्रशासन कहकशां खातून तुरंत मौके पर पहुँचीं। उन्होंने पीड़िता और उनके भाई को ढांढस बँधाया और प्राथमिकता के आधार पर उनकी फाइल मंगवाई। फाइल की तुरंत जाँच कराने पर पता चला कि गाड़ी पर पुराना चालान बकाया था और प्रदूषण प्रमाणपत्र लंबित था, जिसकी सही जानकारी बिचौलिए ने आवेदिका से छिपाई थी। अधिकारियों ने पारदर्शी प्रक्रिया समझाते हुए पीड़िता को चालान जमा करने व बीमा एवं प्रदूषण प्रमाणपत्र बनवाने का सही मार्गदर्शन दिया और संबंधित बाबू को निर्देश दिए कि औपचारिकताएं पूरी होते ही काम प्राथमिकता पर पूरा किया जाए।
विभाग की सख्ती से सुधर रही व्यवस्था
आरटीओ प्रशासन द्वारा 24 अगस्त को चलाए गए विशेष अभियान के बाद से परिसर में बिचौलियों पर नकेल कसी गई है। सीसीटीवी कैमरों से निगरानी और अधिकारियों के लगातार सरप्राइज चेकिंग अभियानों के चलते आम जनता अब बिना किसी डर के अपने काम सीधे खिड़की पर जाकर करा रही है। अधिकारियों ने दोहराया है कि जनता की सुविधा और सुरक्षा विभाग की पहली प्राथमिकता है और किसी भी तरह की धोखाधड़ी करने वालों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
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