Wednesday, September 30, 2026
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महाकुंभ में यूपी की छवि गढ़ी, अब एमएसएमई में उत्पादों को दुनिया तक पहुंचाने की जिम्मेदारी

➤ सूचना निदेशक रहे शिशिर को मिली यूपी के उत्पादों को वैश्विक बाजार दिलाने की कमान

➤ यूपीआईटीएस-2026 के जरिये एमएसएमई एवं निर्यात प्रोत्साहन विभाग में नई भूमिका, अब ऑर्डर और निर्यात की परीक्षा

लखनऊ। प्रदेश में महाकुंभ-2025 के दौरान सूचना निदेशक की जिम्मेदारी संभालने वाले शिशिर (IAS) अब बिल्कुल अलग मोर्चे पर हैं। एमएसएमई एवं निर्यात प्रोत्साहन विभाग के विशेष सचिव के रूप में उन पर उत्तर प्रदेश के उत्पादों और उद्यमियों को दुनिया के बाजार से जोड़ने का दारोमदार है। पहले प्रदेश की तस्वीर दुनिया के सामने रखने का काम था, अब प्रदेश का सामान दुनिया तक पहुंचाने का। प्रशासनिक हलकों में सरकार की सफलता को अक्सर फैसलों के साथ-साथ उन्हें लागू करने वाली टीम से जोड़कर देखा जाता है। मुख्यमंत्री की “किचेन कैबिनेट” जैसे अनौपचारिक शब्द उन्हीं अधिकारियों के लिए इस्तेमाल होते हैं, जिन पर अहम कामों के लिए भरोसा किया जाता है। मौजूदा टीम में शिशिर को इसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है।

प्रयागराज में मौके पर सक्रिय रहे

महाकुंभ के दौरान शिशिर का काम लखनऊ में बैठकर फाइलें निपटाने तक सीमित नहीं रहा। प्रमुख स्नान पर्वों पर जब मेला क्षेत्र में भीड़ बढ़ी, तो वह प्रयागराज पहुंचकर व्यवस्थाएं देखते नजर आए। एक रिपोर्ट के अनुसार, भीड़ बढ़ने पर वह मोटरसाइकिल से मेला क्षेत्र गए और अफसरों को जरूरी निर्देश दिए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से महाकुंभ की व्यवस्थाओं और सूचना तंत्र को लेकर उनका निरंतर तालमेल भी बना रहा। अमृत स्नान के समय मुख्यमंत्री लखनऊ के वार रूम से हालात पर नजर रख रहे थे, यह जानकारी भी शिशिर ने ही मीडिया के सामने रखी थी।

जब सूचना बन गई संसाधन

करोड़ों श्रद्धालुओं की आवाजाही, हर पल बदलते हालात, बड़ी संख्या में मीडियाकर्मी और सोशल मीडिया पर तेजी से फैलती खबरें, इन सबके बीच सही जानकारी को सही समय पर आम लोगों तक पहुंचाना आसान नहीं था। महाकुंभ का बड़ा सबक यही रहा कि ऐसे आयोजनों में सूचना भी प्रशासन का एक अहम संसाधन बन जाती है। सूचना विभाग सरकार और जनता के बीच पुल का काम करता है।

अब ट्रेड शो से जुड़ी जिम्मेदारी

यह अनुभव देखने में भले ही अलग हो, पर नई भूमिका से जुड़ा है। यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो जैसे आयोजनों में उनकी भागीदारी सीधे प्रदेश के कारोबार, ब्रांडिंग और वैश्विक बाजार से संबंधित है। यूपीआईटीएस-2026 के दिल्ली रोड शो में भी विशेष सचिव, एमएसएमई एवं निर्यात प्रोत्साहन के तौर पर वह प्रमुख अधिकारियों में शामिल रहे। महाकुंभ के समय सवाल था कि दुनिया उत्तर प्रदेश को कैसे देखेगी। अब सवाल है कि दुनिया उत्तर प्रदेश से खरीदेगी क्या। यूपीआईटीएस-2026 को प्रदेश की औद्योगिक ताकत, निर्यात क्षमता और एक जिला-एक उत्पाद (ओडीओसी) की वस्तुओं को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने वाले बड़े मंच के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इस बार छह साझेदार देश शामिल हुए और बड़ी तादाद में विदेशी खरीदार भी पहुंचे, जिससे आयोजन का दायरा बढ़ा।

स्टॉल से आगे बढ़ना होगा

प्रदेश की अर्थव्यवस्था में छोटे उद्यमों और स्थानीय उत्पादों का योगदान बड़ा है। मगर किसी जिले की पहचान बना उत्पाद तभी आर्थिक ताकत बनता है, जब वह स्थानीय दायरे से बाहर निकलकर देश और विदेश की आपूर्ति श्रृंखला में जगह बना ले। इसके लिए ओडीओसी मॉडल को प्रदर्शनी के स्टॉल तक सीमित रखने के बजाय खरीदारों, ऑर्डरों और निर्यात से जोड़ना जरूरी होगा। महाकुंभ में जो तंत्र प्रदेश की छवि दुनिया तक ले गया, उसकी जगह अब उस तंत्र को गति देने की चुनौती है जो उद्यमियों और उनके उत्पादों को विदेशी खरीदारों तक पहुंचाए। जानकारों के मुताबिक, महाकुंभ ने प्रदेश की “ब्रांड स्टोरी” गढ़ी थी, जिसे यूपीआईटीएस “बिजनेस स्टोरी” में बदलने का प्रयास है।

असली पैमाना: ऑर्डर, निवेश और रोजगार

यूपीआईटीएस के आंकड़े दर्शाते हैं कि यह मंच लगातार बड़ा हो रहा है। फिर भी असली कसौटी हुए एमओयू या बैठकों की गिनती नहीं, बल्कि उनसे निकलने वाले ठोस ऑर्डर, निवेश, निर्यात और रोजगार होंगे। इसी मोड़ पर शिशिर जैसे अधिकारियों से अपेक्षा आयोजन कराने भर की नहीं, बल्कि सरकारी नीतियों और कारोबारी नतीजों के बीच कड़ी बनने की होगी।