Wednesday, September 30, 2026
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विश्वस्तरीय कनेक्टिविटी नेटवर्क के विस्तार से मिलेगा आर्थिक विकास को बल

लखनऊ। मुख्य सचिव एसपी गोयल ने कहा कि उत्तर प्रदेश को ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य की दिशा में विश्वस्तरीय कनेक्टिविटी नेटवर्क का विस्तार बेहद महत्वपूर्ण है। सड़क, रेलवे, एक्सप्रेसवे, औद्योगिक कॉरिडोर, लॉजिस्टिक्स हब, एयरपोर्ट और शहरी अवसंरचना प्रदेश के आर्थिक विकास की रीढ़ हैं। वर्ष 2047 की विकास परिकल्पना के अनुरूप प्रदेश में अवसंरचना विकास को और गति देने की जरूरत है। मुख्य सचिव मंगलवार को अहिमामऊ स्थित राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी (रूपाम) में ‘Accelerating Linear Infrastructure Projects: Good Practices and New Ideas’ विषय पर आयोजित एक दिवसीय स्टेट लेवल वर्कशॉप का शुभारंभ करने के बाद संबोधित कर रहे थे। कार्यशाला में लीनियर इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली चुनौतियों और उनके समयबद्ध समाधान पर चर्चा की गई।

 

एसपी गोयल ने कहा कि लीनियर इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को समय से पूरा करने के लिए निर्माण शुरू होने से पहले भूमि की उपलब्धता, डिजाइन, यूटिलिटी शिफ्टिंग और आवश्यक वैधानिक स्वीकृतियों की पर्याप्त तैयारी जरूरी है। परियोजना की निगरानी केवल कुल भौतिक प्रगति या पूर्णता प्रतिशत के आधार पर न हो, बल्कि निर्माण कार्य को प्रभावित करने वाली बाधाओं की पहचान और उनके समाधान पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने बड़े कॉरिडोर और परियोजनाओं को व्यवस्थित एवं प्रबंधनीय निर्माण खंडों में विभाजित कर प्रत्येक स्तर पर प्रभावी निगरानी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मॉनिटरिंग निर्माण गतिविधियों के स्तर तक की जानी चाहिए, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि किस स्थान पर भूमि, यूटिलिटी, पुल, कल्वर्ट, अतिक्रमण या पर्यावरणीय स्वीकृति से संबंधित समस्या है। इससे अधिकारियों को संबंधित स्थान की स्थिति का तत्काल आकलन कर कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।

 

मुख्य सचिव ने भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया निर्धारित समयसीमा में पूरी करने के निर्देश दिए। उन्होंने भूमि अधिग्रहण, यूटिलिटी शिफ्टिंग और ट्री कटिंग से जुड़े कार्यों की नियमित समीक्षा कर लंबित प्रकरणों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय से यूटिलिटी शिफ्टिंग और वृक्ष कटान से जुड़ी औपचारिकताएं प्राथमिकता के आधार पर पूरी करने के निर्देश दिए, ताकि निर्माण कार्य में अनावश्यक देरी न हो। उन्होंने कहा कि लीनियर इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में पीडब्ल्यूडी, एनएचएआई, रेलवे, विद्युत विभाग, जल निगम, दूरसंचार, राजस्व, वन, पुलिस और शहरी स्थानीय निकायों सहित कई एजेंसियां शामिल होती हैं। इनके बीच प्रभावी समन्वय के अभाव में परियोजनाओं में देरी होती है। इसके लिए प्रभावी इंटरफेस मैनेजमेंट सिस्टम विकसित किया जाना चाहिए, जिसमें प्रत्येक समस्या के लिए संबंधित एजेंसी, जिम्मेदार अधिकारी, स्थान, निर्धारित समयसीमा और वर्तमान स्थिति स्पष्ट रूप से दर्ज हो।

मुख्य सचिव ने कहा कि परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए निर्माण मोर्चे की तैयारी, विभागीय समन्वय एवं स्वीकृतियां, हितधारक और इंटरफेस प्रबंधन तथा तकनीक एवं पारदर्शिता को प्रमुख आधार बनाया जाना चाहिए। इसके साथ ही जोखिम प्रबंधन, गुणवत्ता, सुरक्षा और अनुबंध प्रबंधन को भी मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के एक्सप्रेसवे, हाईवे और रेलवे नेटवर्क औद्योगिक विकास, लॉजिस्टिक्स, शहरीकरण और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी की आधारशिला बन रहे हैं। उद्देश्य केवल सड़क या रेल नेटवर्क की लंबाई बढ़ाना नहीं, बल्कि औद्योगिक क्लस्टरों, शहरों, बाजारों, लॉजिस्टिक्स हब, बंदरगाहों, एयरपोर्ट और रेलवे नेटवर्क के बीच निर्बाध कनेक्टिविटी स्थापित करना होना चाहिए। इससे निवेश, रोजगार और क्षेत्रीय विकास को भी गति मिलेगी।

उन्होंने अधिकारियों और प्रतिभागियों से तेज योजना, बेहतर पूर्व तैयारी, समयबद्ध समन्वय और संभावित बाधाओं के पहले से समाधान की व्यवस्था करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समस्याएं उत्पन्न होने की प्रतीक्षा करने के बजाय संभावित बाधाओं की पहले से पहचान कर उनके समाधान की तैयारी की जानी चाहिए। मुख्य सचिव ने उम्मीद जताई कि कार्यशाला में उद्योग जगत और विभिन्न संस्थाओं की बेहतर कार्यप्रणालियों, अनुभवों और नए विचारों का आदान-प्रदान होगा। इससे प्रदेश में अधिक दक्ष, तकनीक आधारित, पारदर्शी और परिणामोन्मुखी इंफ्रास्ट्रक्चर विकास व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी। कार्यक्रम में प्रमुख सचिव लोक निर्माण अजय चौहान, रूपाम के निदेशक संजय कुमार, सचिव दिव्य प्रकाश गिरी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।