– देश में हर साल लगभग 58,000 मौतें, मरने वालों में 25 फीसदी से अधिक बच्चे
कानपुर: हरी शंकर शर्मा। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से संबद्ध लाला लाजपत राय (एलएलआर) अस्पताल के बाल रोग विभाग के चिकित्सकों ने अपनी कुशल चिकित्सा प्रणाली से एक बड़ा कीर्तिमान स्थापित किया है। हाल ही में सांप के काटने (स्नेक बाइट) के अत्यंत गंभीर स्थिति (क्रिटिकल कंडीशन) में अस्पताल लाए गए 53 बच्चों में से 52 बच्चों को सुरक्षित बचा लिया गया है। डॉक्टरों की टीम के अथक प्रयासों और दिन-रात की गई निगरानी के कारण इन मासूमों को नई जिंदगी मिली है। दुर्भाग्यवश, हमीरपुर से बेहद नाजुक हालत में लाया गया एक बच्चा तमाम प्रयासों के बावजूद नही बच सका। ।
बाल रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. शैलेंद्र ने इंडियन डेटा रिसर्च और वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि भारत में सर्पदंश एक बहुत बड़ी स्वास्थ्य समस्या है। इंडियन मिलियन डेथ्स स्टडी के अनुसार, भारत में हर साल 30 से 40 लाख सर्पदंश के मामले सामने आते हैं, जिनमें से लगभग 58,000 लोगों की मौत हो जाती है। इनमें से करीब 97 फीसदी मौतें ग्रामीण इलाकों में होती हैं और मरने वालों में 25 फीसदी से अधिक बच्चे होते हैं। उन्होंने बताया कि देश में सांपों की 300 से अधिक प्रजातियां हैं, लेकिन मुख्य रूप से चार जहरीली प्रजातियां ही 90 फीसदी से अधिक मौतों के लिए जिम्मेदार हैं। इनमें भारतीय कोबरा (नाग), कॉमन क्रैट (करैत), रसेल वाइपर (दुबोइया) और सॉ-स्केल्ड वाइपर (फुरसा) शामिल हैं। इनका जहर न्यूरोटॉक्सिक (नसों को ब्लॉक करने वाला) और हीमोटॉक्सिक (खून को जमाने या तेजी से बहाने वाला) होता है, जो बच्चों के छोटे शरीर में बहुत तेजी से फैलता है।
सांप काटने पर “गोल्डन ऑवर” का महत्व
बाल रोग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अमितेश यादव ने स्नेक बाइट मैनेजमेंट से जुड़े हालिया मेडिकल अपडेट्स साझा करते हुए बताया कि सांप काटने के बाद के शुरुआती 60 मिनट (गोल्डन ऑवर) मरीज की जान बचाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं।
एलएलआर अस्पताल में एंटी-स्नेक वेनम बिल्कुल मुफ्त- डॉ. अरुण आर्या
वरिष्ठ चिकित्सक एव पूर्व विभागध्यक्ष डॉ. अरुण आर्या ने बताया कि सांप काटने का एकमात्र वैज्ञानिक और प्रामाणिक इलाज एंटी-स्नेक वेनम इंजेक्शन है। एलएलआर अस्पताल के बाल रोग विभाग में यह जीवनरक्षक दवा पूरी तरह से मुफ्त उपलब्ध है। सांप के काटते ही शरीर में जहर फैलने लगता है, जिससे सांस लेने में तकलीफ, अंगों का सुन्न होना या खून बहने जैसी समस्याएं होने लगती हैं। ऐसे में मरीज को बिना वक्त गंवाए अस्पताल लाना चाहिए, जहां डॉक्टर मरीज के लक्षणों के आधार पर तत्काल एएसवी थेरेपी शुरू कर देते हैं।
अभिभावक क्या करें और क्या न करें
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. वाई. के. राव ने अखबारों के माध्यम से आम जनता और माता-पिता के लिए बेहद महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में बच्चे की जान बचाई जा सके।
क्या करें – शांत रहें और ढांढस बंधाएं, बच्चा डर के मारे न भागे। घबराहट से दिल की धड़कन बढ़ती है और जहर शरीर में तेजी से फैलता है। जिस हाथ या पैर में सांप ने काटा है, उसे हिलाए-डुलाए बिना दिल के स्तर से नीचे या बराबर रखें और तुरंत लकड़ी की पट्टी (स्प्लिंट) का सहारा देकर कपड़े से हल्का बांध दें, गहने व तंग कपड़े उतारें, सूजन आने से पहले पैर या हाथ से अंगूठी, चूड़ी, घड़ी या तंग कपड़े तुरंत हटा दें, बिना एक मिनट गंवाए सीधे सरकारी अस्पताल या एलएलआर अस्पताल लेकर आएं।
क्या कभी न करें – ओझा, तांत्रिक या घरेलू नुस्खों के चक्कर में समय बर्बाद करना ही मौत का सबसे बड़ा कारण बनता है, घाव पर ब्लेड से कट न लगाएं और न ही मुंह से जहर चूसने की कोशिश करें, रस्सी या कपड़े से खून का दौरा पूरी तरह बंद करने जैसी गलती न करें, इससे वह अंग हमेशा के लिए सड़ (गैंग्रीन) सकता है, घाव पर बर्फ, पोटेशियम परमैंगनेट या कोई जड़ी-बूटी न रगड़ें।
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