♦हॉटस्पॉट क्षेत्रों में तैनात होंगे नोडल अधिकारी, होगी कड़ी निगरानी
♦डीएम ने स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा कर दिए निर्देश, रेफर मरीजों की बनेगी रेफरल हिस्ट्री
♦सरकारी चिकित्सकों की निजी प्रैक्टिस पर होगी कार्रवाई
कानपुर। विशेष संचारी रोग नियंत्रण एवं दस्तक अभियान की तैयारियों और जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा को लेकर जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर की अध्यक्षता में सरसैया घाट स्थित नवीन सभागार में जिला स्तरीय टास्क फोर्स तथा जिला स्वास्थ्य समिति के शासी निकाय की बैठक हुई। बैठक में 1 से 31 अक्टूबर तक चलने वाले विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान की तैयारियों के साथ स्वास्थ्य कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा की गई।
जिलाधिकारी ने संचारी रोगों के चिन्हित हॉटस्पॉट क्षेत्रों में नोडल अधिकारियों की तैनाती के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में रोग नियंत्रण से जुड़ी गतिविधियों की नियमित निगरानी की जाए और किसी भी स्तर पर लापरवाही मिलने पर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित हो। अभियान की प्रत्येक गतिविधि का निर्धारित मानकों के अनुसार मूल्यांकन करने के साथ फोटोग्राफ सहित दस्तावेजीकरण कराने के भी निर्देश दिए गए।
उन्होंने स्वास्थ्य विभाग समेत सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय से अभियान चलाने तथा संचारी रोगों से बचाव और रोकथाम के उपायों को लेकर व्यापक जन-जागरूकता अभियान संचालित करने को कहा।
अस्पतालवार कमियों और जरूरतों का होगा आकलन
जिला स्वास्थ्य समिति की समीक्षा के दौरान डीएम ने सभी एमओआईसी और चिकित्सालयों के अधीक्षकों को अपने-अपने अस्पतालों में उपलब्ध सुविधाओं, संसाधनों और कमियों का आकलन करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अस्पतालवार जरूरतों और कमियों की सूची समिति की बैठक में प्रस्तुत की जाए, ताकि आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की दिशा में कार्रवाई की जा सके।
उन्होंने अस्पतालों में उपलब्ध लेकिन उपयोग में नहीं आ रही मशीनों और उपकरणों की सूची कारण सहित तैयार करने तथा इंफ्रास्ट्रक्चर गैप की समीक्षा के निर्देश दिए। स्वास्थ्य संसाधनों की उपलब्धता और उनके उपयोग की नियमित समीक्षा पर भी जोर दिया।
हर रेफर मरीज की बनेगी रेफरल हिस्ट्री
डीएम ने अस्पतालों से मरीजों को दूसरे चिकित्सा संस्थानों में रेफर किए जाने की व्यवस्था का नियमित ऑडिट कराने को कहा। उन्होंने निर्देश दिया कि हर रेफर मरीज की रेफरल हिस्ट्री तैयार की जाए और उसमें रेफर किए जाने का स्पष्ट कारण दर्ज हो।
रेफरल के कारणों का विश्लेषण कर यह पता लगाया जाएगा कि मरीज को किस सुविधा, विशेषज्ञ चिकित्सक या संसाधन के अभाव में दूसरे अस्पताल भेजना पड़ा। इसकी रिपोर्ट जिला स्वास्थ्य समिति के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी, जिससे संबंधित कमियों को दूर किया जा सके।
ओपीडी और दवाओं का बनेगा व्यवस्थित डेटा
जिलाधिकारी ने अस्पतालों में ओपीडी मैनेजमेंट और ड्रग मैनेजमेंट सिस्टम विकसित करने के निर्देश दिए। ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या, स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और अलग-अलग अवधि में मरीजों की संख्या के ट्रेंड का व्यवस्थित डेटा तैयार किया जाएगा।
इसी प्रकार सर्वाधिक उपयोग होने वाली दवाओं और उनकी खपत का रिकॉर्ड रखने को कहा गया, ताकि मांग का सही आकलन कर दवाओं की समय से उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।
आशा-एएनएम के कार्यों की होगी समीक्षा
डीएम ने एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं के स्तर पर उपलब्ध कराई जा रही स्वास्थ्य सेवाओं की नियमित समीक्षा तथा उनके रजिस्टर एवं अभिलेखों के सत्यापन के निर्देश दिए। प्रसव के लिए गर्भवती महिलाओं को अस्पताल लेकर आने वाली आशा कार्यकर्ताओं के रात्रि विश्राम की आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने को भी कहा।
लंबित भुगतानों का समय से हो निस्तारण
बैठक में एलआईसीएस, एनएचएम और विभिन्न बजट मदों के तहत उपलब्ध धनराशि एवं व्यय की समीक्षा के निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने जननी सुरक्षा योजना, संस्थागत प्रसव और लंबित भुगतानों की समीक्षा कर पात्र लाभार्थियों को समय से भुगतान सुनिश्चित करने को कहा। निजी स्वास्थ्य संस्थानों और अस्पतालों की गतिविधियों की भी प्रभावी निगरानी के निर्देश दिए गए।
निजी प्रैक्टिस पर सरकारी चिकित्सकों को चेतावनी
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि कोई भी सरकारी चिकित्सक निजी प्रैक्टिस न करे। यदि किसी सरकारी चिकित्सक द्वारा निजी प्रैक्टिस किए जाने की पुष्टि होती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि जनपदवासियों को गुणवत्तापूर्ण और सुगम स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। सभी अधिकारी और चिकित्सक अपने दायित्वों का जिम्मेदारी से निर्वहन करें तथा सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करें।
Jansaamna