कविता पंत: नई दिल्ली। विपक्षी दलों के सांसद 6 अक्टूबर को दिल्ली में निर्वाचन आयोग के मुख्यालय तक मार्च करेंगे। यह घोषणा इंडिया ब्लॉक की एक बैठक के बाद की गई, जिसमें चुनावी गड़बड़ियों और भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में चुनाव आयोग के भेदभाव के आरोपों पर चर्चा हुई। करीब तीन घंटे चली बैठक में तीन मुद्दों पर सहमति बनी, जिसके अनुसार मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए संसद में प्रस्ताव लाने; दूसरा, मतदाता सूची से हटाए गए नामों को सार्वजनिक करने, नाम हटाने से पहले मतदाता को नोटिस और अपील का मौका देने तथा तीसरा, ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की गई।
इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) में कथित गड़बड़ियों पर संयुक्त रूप से आंदोलन के लिए एक्शन प्लान तय करने और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर दबाव बनाने के लिए राजधानी में बैठक की। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बैठक के बाद देश भर में ‘वोट चोरी’ मुद्दे को उजागर करने के लिए अक्टूबर और नवंबर में पांच बड़ी रैलियों की भी घोषणा की। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ज्ञानेश कुमार को “गायब कुमार” कहा और आरोप लगाया कि वोट चोरी एक खराब एसआईआर एक्सरसाइज के जरिए की गई। उन्होंने भाजपा पर तानाशाही का आरोप लगाया।
इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस (इंडिया) ने बुधवार को एसआईआर विवाद पर एक संयुक्त कार्य योजना को अंतिम रूप दिया, जिसमें रैलियां और ‘डेमोक्रेसी बचाओ मार्च’ शामिल हैं। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि सभी पार्टियां इस बात पर सहमत हैं कि चुनाव इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के बजाय बैलेट पेपर से होने चाहिए।
विपक्षी गठबंधन ने यह बात अपने नेताओं की साढ़े तीन घंटे की बैठक के बाद कही, जिसमें खड़गे, कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, राष्ट्रीय जनता दल के तेजस्वी यादव और नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी-शरदचंद्र पवार की सांसद सुप्रिया सुले शामिल थीं। बैठक के बाद खड़गे ने कहा कि नेताओं ने एक संयुक्त कार्य योजना पर फैसला किया है। पार्टियों ने तय किया है कि युवाओं और स्वयंसेवी संस्थाओं (एनजीओ) को शामिल करते हुए 2 से 8 अक्टूबर तक ‘लोकतंत्र बचाओ’ मार्च निकाले जाएंगे और डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के ऑफिस के सामने प्रदर्शन किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि 6 अक्टूबर को सभी विपक्षी सांसद निर्वाचन आयोग तक मार्च करेंगे। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता भारत के राष्ट्रपति से मिलने का समय मांगेंगे और अक्टूबर के दूसरे हफ्ते में ‘वोट चोरी सरकार’ के खिलाफ अपनी बात रखेंगे। उन्होंने कहा, “हम पांच बड़ी रैलियां करेंगे और उनकी तारीख और जगह तय की जाएगी। हम लोगों को बताएंगे कि सरकार कैसे देश चलाने के लिए लोगों से सरकार चुनने का अधिकार छीन रही है।”
खड़गे ने कहा, “अब हर कोई समझ रहा है कि राहुल जी जो कह रहे थे, वह सही है और यह ध्यान खींच रहा है। पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘नोटबंदी’ की और अब ‘वोटबंदी’ कर रहे हैं, लोगों के अधिकार छीन रहे हैं।” खड़गे ने कहा कि इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि उसे एसआईआर और चुनावी गड़बड़ियों के मामलों की सुनवाई में तेजी लानी चाहिए। ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराने के बारे में पूछे जाने पर खड़गे ने कहा कि सभी लोग इस बात पर शत प्रतिशत सहमत हैं कि सभी चुनाव बैलेट से होने चाहिए और सत्ता में मौजूद इस सरकार के बनाए कानूनों को रद्द कर देना चाहिए। राहुल गांधी ने कहा कि सभी पार्टियों का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने भारत के लोकतांत्रिक ढांचे पर हमला किया है। हम इसे चुपचाप नहीं सहेंगे, हम यह सुनिश्चित करेंगे कि जिन लोगों ने भारतीय लोकतंत्र को नष्ट किया है, उन्हें सजा मिले।”
राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष लोगों को यह बताने में काफी सफल रहा है कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने लोकतंत्र को खत्म कर दिया है और चुनाव चुराए गए हैं। लोकसभा में विपक्ष के नेता ने कहा कि उन्होंने सभी विपक्षी नेताओं से कहा कि वे सब मिलकर संविधान के रक्षक हैं और अगले कुछ महीनों में हम मिलकर देश में बड़े बदलाव करेंगे।
Jansaamna