➤ सॉफ्टवेयर इंजीनियर से सफल मत्स्य उद्यमी बनने तक का सफर, 50 से अधिक किसानों के साथ 350 एकड़ में कर रहे मत्स्य उत्पादन
रायबरेली। सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की पढ़ाई और अमेरिका में नौकरी के बाद गांव लौटकर कृषि एवं मत्स्य पालन को व्यवसाय बनाने वाले सुजीत कुमार चौधरी आज क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए हैं। तकनीकी ज्ञान, आधुनिक प्रबंधन और उद्यमिता को मत्स्य पालन से जोड़कर उन्होंने न केवल अपना व्यवसाय खड़ा किया, बल्कि रायबरेली, उन्नाव और प्रतापगढ़ के 50 से अधिक किसानों को भी इससे जोड़ा है। वर्तमान में इन किसानों के साथ करीब 350 एकड़ क्षेत्रफल में मत्स्य पालन किया जा रहा है। बस्ती जनपद के वाल्टरगंज निवासी सुजीत कुमार चौधरी ने वर्ष 2005 में नोएडा से सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उनका करियर अमेरिका तक पहुंचा। वर्ष 2010 में उन्होंने अमेरिका की एक कंपनी में काम शुरू किया और तकनीकी क्षेत्र में अनुभव हासिल किया। हालांकि, देश और अपनी मिट्टी से जुड़ाव के चलते वर्ष 2016 में वह भारत लौट आए।
भारत लौटने के बाद उन्होंने नोएडा में अपनी सॉफ्टवेयर कंपनी शुरू की। इसी दौरान कृषि व्यवसाय से जुड़े पारिवारिक परिवेश ने उन्हें ग्रामीण अर्थव्यवस्था और खेती की ओर सोचने के लिए प्रेरित किया। सुजीत का मानना था कि तकनीक का लाभ केवल सॉफ्टवेयर क्षेत्र तक सीमित रखने के बजाय कृषि जैसे व्यापक क्षेत्र में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे बड़ी संख्या में किसानों की आय और रोजगार के अवसर बढ़ाए जा सकते हैं। इसी सोच के साथ उन्होंने पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर कृषि क्षेत्र में उद्यम करने का निर्णय लिया। उन्होंने मत्स्य पालन को व्यवसाय के रूप में चुना और मत्स्य विभाग से संपर्क कर योजनाओं की जानकारी ली। इसके बाद प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का लाभ लेकर रायबरेली की महाराजगंज तहसील क्षेत्र के बावन बुजुर्ग बल्ला गांव में करीब 15 एकड़ भूमि पर तालाब विकसित कर मत्स्य पालन शुरू किया।
शुरुआत में मत्स्य पालन उनके लिए नया क्षेत्र था, लेकिन तकनीकी पृष्ठभूमि, प्रबंधन क्षमता और लगातार सीखने की प्रवृत्ति के चलते उन्होंने इसे व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया। धीरे-धीरे आसपास के किसानों ने भी मत्स्य पालन की संभावनाओं को समझा और उनके साथ जुड़ना शुरू किया। आज सुजीत कुमार चौधरी के साथ रायबरेली, उन्नाव और प्रतापगढ़ के 50 से अधिक किसान जुड़े हैं। करीब 350 एकड़ क्षेत्र में मत्स्य पालन किया जा रहा है। किसानों को आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रबंधन, उत्पादन और बाजार की जरूरतों के अनुरूप काम करने के लिए भी मार्गदर्शन दिया जा रहा है। इससे किसानों को पारंपरिक खेती के साथ आय के वैकल्पिक स्रोत के रूप में मत्स्य पालन अपनाने का अवसर मिल रहा है।
सुजीत कुमार चौधरी का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल स्वयं सफल होना नहीं, बल्कि अधिक से अधिक किसानों को आधुनिक कृषि एवं मत्स्य पालन से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। उनका मानना है कि कृषि में तकनीक और उद्यमिता का समावेश ग्रामीण क्षेत्रों में आय और रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकता है। सुजीत की कहानी उन युवाओं के लिए भी उदाहरण है, जो उच्च शिक्षा के बाद नौकरी को ही करियर का एकमात्र विकल्प मानते हैं। उन्होंने अपने तकनीकी ज्ञान और अनुभव का उपयोग कृषि क्षेत्र में करते हुए यह दिखाया है कि आधुनिक तकनीक, बाजार की समझ और उद्यमिता के जरिए खेती एवं मत्स्य पालन को भी व्यवसाय के रूप में विकसित किया जा सकता है।
Jansaamna