नयी दिल्लीः कविता पंत। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने केन्द्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और बी एल वर्मा का उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए दोबारा नामांकन नहीं किया है और इसी के साथ अपने किसी भी मौजूदा सांसद को बनाए रखे बिना आठ उम्मीदवारों के नाम घोषित किए हैं।
इस चौंकाने वाले निर्णय के तहत अरुण सिंह, सीमा द्विवेदी, नीरज शेखर, बृज लाल और गीता शाक्य को भी नयी सूची में शामिल नहीं किया गया है। दिनेश शर्मा जो पहले उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सीट पर थे, अब अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के लेफ्टिनेंट गवर्नर हैं।
भाजपा ने धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडे, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार को उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए पार्टी के आठ उम्मीदवारों के तौर पर नामांकित किया है।
भाजपा ने जातिगत समीकरणों को ध्यान में रखकर ये नाम तय किए हैं जिनमें तीन अन्य पिछडी जाति तीन अगड़ी जाति और दो अनुसूचित जाति के हैं। आठ उम्मीदवारों में श्रुति गंगवार और प्रियंका सिंह रावत पार्टी की दो महिला उम्मीदवार हैं।
रमाकांत ओझा और गोपी कृष्ण पांडे ब्राह्मण समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं। प्रकाश पाल उत्तर प्रदेश में पार्टी के अन्य पिछडा जाति (ओबीसी) मोर्चा के प्रमुख हैं। धर्मपाल सिंह लोध और श्रुति गंगवार भी ओबीसी समुदाय से हैं। विद्यासागर सोनकर और प्रियंका रावत दलित समुदाय से हैं। राम सिंह चौहान ठाकुर समुदाय से हैं। राज्यसभा चुनाव में भाजपा को 10 में से सात सीटें आसानी से जीतने की उम्मीद है।
राज्यसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में भाजपा सात सीटों और समाजवादी पार्टी दो सीटों पर आसानी से जीत सकती है। 403 सदस्यों वाली उत्तर प्रदेश विधानसभा में सपा के 101 विधायक हैं और उसके पास दो सीटें जीतने की ताकत है। अखिलेश यादव की पार्टी ने हाल ही में राम गोपाल यादव और रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के सीनियर एग्जीक्यूटिव धनराज नाथवानी को अपना उम्मीदवार बनाया है।
10 सीटों के लिए हर दो साल में होने वाले राज्य सभा चुनाव 16 अक्टूबर को होंगे। भाजपा को आराम से सात सीटें मिल सकती हैं जबकि सपा को अकेले दो सीटें मिलने की उम्मीद है। दसवीं सीट पर भी दोनों पार्टियां चुनाव लड़ेंगी जिसमें भाजपा और सपा अपनी चुनावी ताकत लगा सकती हैं, जिससे क्रॉस-वोटिंग की अटकलें लगाई जा रही हैं।
इससे पहले, भाजपा ने रविवार को पश्चिम बंगाल और उत्तराखंड में एक-एक राज्यसभा सीट के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा की। अभी राज्यसभा में भाजपा के 116 सांसद हैं जिससे वह संसद के उपरी सदन में सबसे बड़ी पार्टी बन गई है।
आने वाले दो साल में एक बार होने वाले चुनावों में भाजपा की जीत की उम्मीद के साथ 245 सदस्यों वाली राज्यसभा में भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सीटें और मज़बूत होने वाली हैं।
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