-ढोल, ताशों और चादरों के साथ निकला जुलूस
फिरोजाबाद। दरगाह-ए-अबरारिया के सालाना उर्स के अवसर पर सोमवार को शहर में अकीदत और रूहानी माहौल देखने को मिला। इमामबाड़ा चौक स्थित दादा मियां हज़रत ख़्वाजा मौलवी मोहम्मद हुसैन शाह रहमतुल्लाह अलैह के आस्ताने से संदल का जुलूस पूरी शानो-शौकत और अकीदत के साथ निकाला गया। जुलूस में बड़ी संख्या में जायरीन और अकीदतमंद शामिल हुए।
संदल जुलूस सज्जादानशीन दरगाह-ए-अबरारिया सूफी जमील नासिर अबरारी के नेतृत्व में रवाना हुआ। जुलूस की शुरुआत से पूर्व दादा मियां के मजार-ए-मुबारक पर चादरपोशी और गुलपोशी की गई। इस मौके पर हादी जावेद, पूर्व सांसद प्रतिनिधि, जुनैद हुसैन अलबाब, हादी हुसैन सहित बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे। हादी जावेद और जुनैद हुसैन की ओर से जायरीन के लिए लंगर का भी इंतजाम किया गया। इसके बाद संदल जुलूस शीशग्रान, नालबंद चौराहा, नाले की पुलिया, फारूकी गेट, इमामबाड़ा चौराहा, छोटा चौराहा, घंटाघर और सदर बाजार से होता हुआ सेंट्रल टॉकीज पहुंचा। यहां से जुलूस कटरा सुनारान और कटरा पठानान होते हुए दरगाह-ए-अबरारिया पहुंचा। दरगाह-ए-अबरारिया पहुंचने पर हज़रत शाह सूफी अबरार हसन शाह रहमतुल्लाह अलैह के मजार-ए-मुबारक पर संदल पेश किया गया और संदल से गुस्ल कराया गया। इस दौरान दरगाह परिसर में बड़ी संख्या में जायरीन मौजूद रहे और मजार-ए-मुबारक पर अपनी अकीदत पेश की।
Jansaamna