♦ फैजुल्लागंज से नैमिष तक तटबंध बनाने के निर्देश, प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत देने पर जोर
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को फैजुल्लागंज से नैमिष तक गोमती नदी में आई बाढ़ का हवाई सर्वेक्षण किया। उन्होंने बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री वितरित करने के साथ स्थानीय नागरिकों और एसडीआरएफ जवानों से संवाद कर राहत-बचाव कार्यों की जानकारी ली।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा की इस घड़ी में डबल इंजन सरकार पूरी मजबूती से प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है। उन्होंने सिंचाई विभाग को फैजुल्लागंज से नैमिष तक गोमती नदी के पूरे तट का विस्तृत सर्वे कराने और तटबंध निर्माण की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।
योगी ने कहा कि गोमती पर तटबंध बनने से बाढ़ की विभीषिका को काफी हद तक रोका जा सकता है। तटबंध को दोहरे उपयोग के दृष्टिकोण से विकसित करने पर भी विचार किया जाए, ताकि वह नदी के पानी से गांवों और आबादी की सुरक्षा के साथ आवागमन में भी उपयोगी हो सके। तटबंध के बाहर बसे गांवों में बारिश के पानी की निकासी के लिए पंपिंग सेट की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल मौजूदा संकट से निपटना नहीं, बल्कि ऐसा स्थायी तंत्र विकसित करना है जिससे हर वर्ष बाढ़ की समस्या से लोगों को सुरक्षा मिल सके। राहत एवं बचाव कार्यों के लिए प्रशासन को पर्याप्त धनराशि उपलब्ध कराई गई है और प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने में किसी प्रकार की कमी नहीं होने दी जाएगी।
राहत शिविरों में भोजन, दूध और पौष्टिक आहार की व्यवस्था
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि बाढ़ प्रभावित लोगों को खुले या असुरक्षित स्थानों पर रात न बितानी पड़े। स्कूलों, मैरिज हॉल और अन्य सुरक्षित भवनों को राहत शिविर के रूप में इस्तेमाल किया जाए। शिविरों में गर्म भोजन, बच्चों के लिए दूध और गर्भवती महिलाओं के लिए पौष्टिक आहार की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
प्रभावित क्षेत्रों में पर्याप्त चिकित्सा शिविर लगाने तथा स्वास्थ्य केंद्रों पर जरूरी दवाओं के साथ एंटी स्नेक वेनम और एंटी रैबीज इंजेक्शन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। पशुओं के लिए चारा और पशु चिकित्सा शिविरों की व्यवस्था करने को भी कहा गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डूबने या आकाशीय बिजली गिरने से होने वाली जनहानि को आपदा की श्रेणी में शामिल करते हुए प्रभावित परिवार को चार लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। पूरी तरह क्षतिग्रस्त मकानों के परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना या मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आवास उपलब्ध कराया जाएगा।
किसानों की फसल क्षति का समयबद्ध सर्वे
बाढ़ प्रभावित किसानों की फसलों का समयबद्ध सर्वे कराकर नियमानुसार मुआवजा देने के निर्देश मुख्यमंत्री ने दिए। उन्होंने कहा कि किसान की फसल की क्षति की भरपाई के लिए हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी फोन पर बाढ़ की स्थिति की जानकारी ली है। फैजुल्लागंज से नैमिष तक तटबंध निर्माण के लिए प्रदेश सरकार ने स्वीकृति प्रदान कर दी है और इसके लिए तत्काल धनराशि जारी कर कार्य आगे बढ़ाया जाएगा।
गांवों में रात्रि गश्त के निर्देश
मुख्यमंत्री ने कहा कि राहत शिविरों में पहुंचे लोगों के गांवों और घरों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी प्रशासन की है। चौकीदार, होमगार्ड, पीआरडी जवान और पुलिसकर्मी रात में गश्त करें, ताकि बाढ़ की स्थिति का फायदा उठाकर चोरी या असामाजिक गतिविधियां न हो सकें। राहत शिविरों में बिजली, पेट्रोमैक्स या सोलर लाइट की व्यवस्था भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
उन्होंने कहा कि राहत और बचाव कार्य में प्रशासन, पुलिस, सिंचाई, स्वास्थ्य, पशुपालन विभाग, स्थानीय निकाय, जनप्रतिनिधि और सामाजिक संगठनों को मिलकर काम करना होगा। सरकार की प्राथमिकता है कि संकट की स्थिति में कोई व्यक्ति भूखा न रहे, बच्चों को दूध, गर्भवती महिलाओं को पोषण, बीमारों को उपचार तथा पशुओं को चारा और चिकित्सा उपलब्ध हो।
इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश कुमार अवस्थी, विधान परिषद सदस्य पवन कुमार सिंह, विधायक डॉ. नीरज बोरा व योगेश शुक्ला सहित वरिष्ठ अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
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