कविता पंत: नई दिल्ली। जीएसटी परिषद ने जीएसटी के तहत गिरफ्तारी के अधिकार को खत्म कर दिया है और मुकदमा चलाने की सीमा एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये कर दी है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में आज हुई जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में इस आशय का निर्णय लिया गया। न्यूनतम सजा भी हटा दी गई है और जुर्माने की राशि 25,000 रुपये से घटाकर 10,000 रुपये कर दी गई है। जीएसटी परिषद ने जीएसटी 2.0 सुधारों के एक बड़े पैकेज को मंजूरी दी है। इसका मकसद जीएसटी भुगतान को आसान बनाना, रिफंड में तेजी लाना और बिजनेस तथा करदाताओं के लिए कर प्रणाली को ज्यादा आसान बनाना है। परिषद ने जीएसटी रिफंड में तेजी लाने के लिए एक प्रणाली को भी मंजूरी दी है। रिफंड का दावा स्वीकार करने की समय-सीमा 15 दिन से घटाकर 10 दिन कर दी गई है, जबकि सिस्टम रिस्क असेसमेंट के आधार पर 90 प्रतिशत एलिजिबल रिफंड क्लेम को मंजूरी देगा और आदेश स्वीकार होने के तीन कार्य दिवस के अंदर जारी कर दिया जाएगा।
जीएसटी परिषद की बैठक के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि जीएसटी परिषद साल में सिर्फ एक बार रेट में बदलाव पर फैसला करेगी। उन्होंने कहा, “कोऑपरेटिव फेडरलिज्म की भावना से, आईटीसी मामलों की जांच के लिए अधिकारियों की एक कमेटी बनाने का फैसला किया गया। अगर कोई व्यक्ति या बिजनेस संस्था इनपुट टैक्स देती है, तो एक ईमानदार टैक्सपेयर को आईटीसी दावा करने में दिक्कतें क्यों आनी चाहिए?”
सीतारमण ने कहा कि लगभग 69.5 लाख करदाता सीजीएसटी के दायरे में आते हैं। आगे चलकर हम कई सीजीएसटी के दायरे में आने वाले करदाताओं के लिए एक जैसा टैक्स फ्रेमवर्क लाने का इरादा रखते हैं। उन्होंने कहा, “हमारा सीजीएसटी के तहत फेसलेस टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन शुरू करने का भी इरादा है। जल्द ही एक फ्रेमवर्क को अंतिम रूप दिया जाएगा और इसे अगले साल बजट से पहले जन सुनवाई के लिए रखा जाएगा, और इसे अगले वित्त वर्ष 2028 के दौरान लागू किया जाएगा।”
अब ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए काम करने वाले छोटे सेलर्स को जीएसटी रजिस्ट्रेशन का आसान रास्ता मिलेगा। मंजूर फ्रेमवर्क के तहत कोई भी सेलर प्लेटफॉर्म की मंजूरी से दूसरे राज्य में ई-कॉमर्स ऑपरेटर के वेयरहाउस को अपने बिजनेस की मुख्य जगह बता सकेगा। सेलर को अभी भी कम से कम एक राज्य में अपनी मौजूदगी दिखाने की जरूरत होगी, जो उसका गृह राज्य रहेगा। रजिस्ट्रेशन प्लेटफॉर्म के जरिए की गई सप्लाई तक ही सीमित होगा। परिषद ने सर्विसेज के एक्सपोर्ट को नियंत्रित करने वाले जीएसटी नियमों में बदलाव को मंजूरी दे दी है। अगर कोई भारतीय कंपनी अपनी ओवरसीज ब्रांच के जरिए किसी विदेशी क्लाइंट को सर्विस देती है, तो उसे एक्सपोर्ट बेनिफिट्स मिलेंगे, लेकिन वह जरूरी शर्त हटा दी गई है, जिसकी वजह से ऐसा नहीं हो पाया था। किसी विदेशी ग्राहक के माल पर भारत में किया गया कार्य भी सेवाओं के निर्यात के रूप में योग्य होगा, भले ही माल भारत से बाहर न जाए। इसमें परीक्षण, मरम्मत, प्रमाणन, अनुसंधान या प्रसंस्करण शामिल होगा।
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