Wednesday, October 14, 2026
Breaking News
Home » मुख्य समाचार » गंदगी को झेलती नहर को अब सफाई का इंतजार !

गंदगी को झेलती नहर को अब सफाई का इंतजार !

♦ स्मार्ट सिटी के दावों पर गंदगी का तमाचा !
♦ छठ पूजा पर्व पर ही जागेगा कानपुर नगर निगम?
♦ कानपुर दक्षिण की नहर बनी कचराघर

कानपुर। स्मार्ट सिटी के बड़े-बड़े दावे, विकास के चमकदार नारे और स्वच्छता अभियान की घोषणाएं कानपुर दक्षिण की एक नहर की बदहाल तस्वीर के सामने खोखली नजर आती हैं। कई प्रमुख विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजरने वाली यह नहर, भीषण गंदगी और कचरे के अम्बार से घिरी है। हालात ऐसे हैं कि इसे नहर कम और कचराघर अधिक कहना गलत नहीं होगा।
रतनलाल नगर, गोविन्द नगर, बर्रा सहित कई मोहल्लों की सीमओं से गुजरती इस नहर में जगह-जगह जमा कचरा और गंदगी प्रशासनिक उदासीनता की कहानी बयां कर रही है। स्थानीय स्तर पर समय-समय पर सफाई और निरीक्षण के नाम पर गतिविधियां दिखाई देती हैं, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कार्रवाई होती नजर नहीं आती।
यह एक कड़ुवा सच है कि नेताओं के लिए यह इलाका कभी-कभार फोटो खिंचवाने और अपनी सक्रियता दिखाने का जरिया जरूर बन जाता है, मगर तस्वीरें खिंचने के बाद नहरिया की बदहाली जस की तस रह जाती है। यदि नियमित सफाई और निगरानी की व्यवस्था होती, तो क्या हालात इतने बदतर होते?
छठ पूजा नजदीक, अब याद आएगा स्वच्छता अभियान!
छठ पूजा का पर्व नजदीक आते ही नहर की सफाई को लेकर सवाल और तीखे हो गए हैं। स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा है कि यदि पर्व का अवसर न होता और नेताओं को वोटों का लालच न होता, तो शायद इस नहरिया की सुध लेने वाला भी कोई नहीं होता! आखिर क्या इस नहर की सफाई व्यवस्था केवल त्योहारों और राजनीतिक जरूरतों के सहारे चलेगी? क्या आम नागरिकों को सालभर गंदगी झेलने के बाद पर्व के समय होने वाली औपचारिक सफाई से ही संतोष करना पड़ेगा?
विडंबना यह है कि, ‘स्वच्छता और विकास के नाम पर योजनाएं तो खूब गिनाई जाती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर नियमित सफाई, कचरे के निस्तारण और जलनिकासी जैसी बुनियादी जरूरतें ही उपेक्षित दिखाई देती हैं।’ छठ पूजा जैसे महत्वपूर्ण पर्व पर स्वच्छ वातावरण और साफ घाटों की व्यवस्था आवश्यक है, लेकिन इससे भी बड़ा सवाल यह है कि पर्व बीतने के बाद नहर की सफाई और रखरखाव की जिम्मेदारी कौन निभाएगा?
फोटो खिंचवाने से नहीं बदलेगी तस्वीर
स्मार्ट सिटी का अर्थ केवल चमकती सड़कों, आकर्षक इमारतों और विज्ञापनों तक सीमित नहीं हो सकता। शहर की पहचान वहां रहने वाले नागरिकों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं, स्वच्छ वातावरण और प्रभावी नगर प्रबंधन से होती है। यदि किसी इलाके के लोग लंबे समय तक गंदगी के बीच रहने को मजबूर हैं, तो विकास के दावों की समीक्षा होना लाजिमी है।
कानपुर नगर निगम और संबंधित विभागों को चाहिए कि छठ पूजा के मद्देनजर तत्काल नहरिया की सफाई कराई जाए तथा कचरे के नियमित उठान और जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि इस क्षेत्र की सफाई और रखरखाव के लिए कौन-सा विभाग जिम्मेदार है और अब तक नियमित कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
अब जनता को आश्वासनों, निरीक्षणों और फोटो खिंचवाने वाले अभियानों से आगे ठोस कार्रवाई चाहिए।
सवाल सीधा हैकृक्या कानपुर दक्षिण की इस नहरिया को पूरे साल साफ रखने की जिम्मेदारी कोई निभाएगा, या छठ पूजा के नाम पर कुछ दिन सफाई कराकर फिर इसे गंदगी के हवाले छोड़ दिया जाएगा? स्मार्ट सिटी की असली परीक्षा नारों में नहीं, बल्कि ऐसी बदहाल जगहों की तस्वीर बदलने में है।