कानपुर। हीमोफीलिया-ए से पीड़ित बच्चों के उपचार में एमिसिजुमैब (हेमलिब्रा) थेरेपी एक महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में उभर रही है। यह आधुनिक उपचार रक्तस्राव की घटनाओं को कम करने में मदद करता है। इसके इस्तेमाल से बच्चों को बार-बार नसों के माध्यम से फैक्टर-8 के इंजेक्शन लगवाने की परेशानी से राहत मिल सकती है। इससे बच्चों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने के साथ उनके परिवारों की उपचार संबंधी कठिनाइयों को कम करने में भी मदद मिलती है। हीमोफीलिया सोसायटी कानपुर के नोडल डॉ. यशवंत राव ने बताया कि कानपुर में अब तक सात बच्चों को हेमलिब्रा थेरेपी दी जा चुकी है। इन बच्चों को पहले नियमित रूप से फैक्टर-8 की आवश्यकता पड़ती थी। उन्होंने बताया कि उपचार के उत्साहजनक परिणाम देखने को मिले हैं। यह थेरेपी रक्तस्राव की घटनाओं को कम करने और बच्चों को बेहतर जीवन जीने में मदद कर सकती है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज, कानपुर के प्रधानाचार्य डॉ. संजय काला ने कहा कि हीमोफीलिया से पीड़ित बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए समय पर बीमारी की पहचान, नियमित चिकित्सकीय देखभाल और उचित उपचार बेहद जरूरी हैं। उन्होंने अभिभावकों से बीमारी के लक्षणों और उपलब्ध उपचार विकल्पों के प्रति जागरूक रहने की अपील की।
क्या है हेमलिब्रा थेरेपी?
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अमितेश यादव ने बताया कि एमिसिजुमैब एक आधुनिक जैविक दवा है, जिसे त्वचा के नीचे इंजेक्शन के रूप में दिया जाता है। यह रक्त का थक्का बनाने की प्रक्रिया में फैक्टर-8 की भूमिका की नकल करके काम करती है। इसके कारण पारंपरिक फैक्टर-8 की तरह बार-बार नसों में इंजेक्शन लगाने की जरूरत कम हो सकती है। उन्होंने बताया कि शुरुआती खुराक के बाद चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार यह दवा सप्ताह में एक बार, हर दो सप्ताह या हर चार सप्ताह में एक बार दी जा सकती है। यह उपचार उन बच्चों के लिए भी उपयोगी हो सकता है, जिनके शरीर में फैक्टर-8 के विरुद्ध अवरोधक प्रतिरक्षी तत्व (इनहिबिटर) विकसित हो जाते हैं। हालांकि, दवा की खुराक और उपचार की अवधि का निर्धारण विशेषज्ञ चिकित्सक मरीज की स्थिति के अनुसार करते हैं।
हीमोफीलिया में जागरूकता और समय पर उपचार जरूरी
डॉ. अमितेश यादव ने बताया कि हीमोफीलिया एक आनुवंशिक रक्तस्राव संबंधी विकार है, जिसमें रक्त का थक्का बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है। हीमोफीलिया-ए में फैक्टर-8 की कमी के कारण जोड़ों, मांसपेशियों और शरीर के अन्य हिस्सों में रक्तस्राव हो सकता है। गंभीर मामलों में आंतरिक रक्तस्राव जानलेवा भी साबित हो सकता है।
ये हैं हीमोफीलिया के प्रमुख लक्षण
डॉ. यशवंत राव ने बताया कि बच्चों में बिना स्पष्ट कारण बार-बार नील पड़ना, असामान्य सूजन, लंबे समय तक रक्तस्राव होना या जोड़ों में दर्द जैसे लक्षण दिखाई देने पर विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। सिर में चोट लगने या गंभीर रक्तस्राव की स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता लेना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जागरूकता, समय पर पहचान और उचित उपचार से बीमारी की जटिलताओं को कम करने तथा बच्चों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने में मदद मिल सकती है। प्रकाशन से पहले चिकित्सकीय तथ्य की पुष्टि करें: हेमलिब्रा रक्तस्राव को रोकने में मदद करने वाली निवारक (प्रोफिलैक्टिक) थेरेपी है, लेकिन यह फैक्टर-8 का सीधा विकल्प नहीं है और तीव्र रक्तस्राव के हर मामले में उसके उपचार के लिए इस्तेमाल नहीं की जाती। दवा की खुराक और उपचार संबंधी विवरण विशेषज्ञ चिकित्सक से सत्यापित कर लें।
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