Wednesday, October 21, 2026
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कुंभकरण, मेघनाथ वध और सुलोचना सती की लीला ने दर्शकों को किया भावविभोर

फिरोजाबाद। सनातन धर्म रामलीला महोत्सव समिति, लेबर कॉलोनी के तत्वावधान में आयोजित रामलीला में कुंभकरण वध, मेघनाथ वध और सुलोचना सती की लीलाओं का भावपूर्ण मंचन किया गया। कलाकारों के सजीव अभिनय ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अजीत पाल सिंह ने भगवान श्रीराम की आरती उतारकर किया। रामलीला मंचन के दौरान लक्ष्मण के स्वस्थ होकर पुनः युद्ध के लिए तैयार होने की सूचना मिलने पर रावण चिंतित हो जाता है। इसके बाद वह अपने भाई कुंभकरण को जगाने पहुंचता है। कुंभकरण को छह महीने सोने और एक दिन जागने का वरदान प्राप्त था। जागने पर रावण उसे भगवान श्रीराम के साथ चल रहे युद्ध और माता सीता को लंका लाने की घटना के बारे में बताता है। कुंभकरण रावण को उसके कृत्य के लिए समझाता है, लेकिन रावण उसकी बात अनसुनी कर उसे युद्ध के लिए भेज देता है।

युद्धभूमि में भगवान श्रीराम और कुंभकरण के बीच भीषण संग्राम होता है। अंततः भगवान श्रीराम कुंभकरण का वध कर देते हैं। कुंभकरण की मृत्यु से रावण शोकाकुल हो जाता है और अपने पुत्र मेघनाथ को युद्ध के लिए भेजता है। दूसरी ओर, रामदल की ओर से लक्ष्मण युद्धभूमि में पहुंचते हैं। दोनों के बीच घमासान युद्ध होता है, जिसमें लक्ष्मण मेघनाथ का वध कर देते हैं। मेघनाथ की मृत्यु का समाचार मिलने पर उसकी पत्नी सुलोचना शोक में डूब जाती है। वह रामदल में पहुंचकर भगवान श्रीराम से अपने पति का सिर देने की प्रार्थना करती है। सुलोचना की विनती सुनकर भगवान श्रीराम करुणा दिखाते हुए उसे मेघनाथ का सिर सौंप देते हैं। इसके बाद सुलोचना अपने पति के सिर के साथ सती हो जाती है। इस मार्मिक प्रसंग के मंचन ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया और रामलीला स्थल जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा।