“जिन हाथों ने इस देश की इमारतें खड़ी कीं, उन्हीं हाथों को आज रोटी, छत और पहचान के लिए जूझना पड़ रहा है। दिहाड़ीदार मजदूर केवल श्रम नहीं देते, वे इस देश की नींव हैं — लेकिन सबसे उपेक्षित भी। विकास की रफ्तार में उनका पसीना झलकता है, पर उनकी आवाज़ नहीं सुनाई देती। क्या यही है ‘नए भारत’ का सपना — जहाँ श्रमिक अनदेखे, अनसुने और असुरक्षित रहें?”
-डॉ. सत्यवान सौरभ
बदलते दौर में जब तकनीक, पूंजी और ग्लैमर की दुनिया भारत को चमकाता दिखता है, तब देश का एक बड़ा तबका ऐसा है जो उस चमक की नींव बनाता है लेकिन खुद अंधेरे में घुटता रहता है। यही तबका है — दिहाड़ीदार मजदूर। जिनकी बदौलत गगनचुंबी इमारतें खड़ी होती हैं, सड़कों पर रफ्तार दौड़ती है, और शहर सांस लेता है। परन्तु विडंबना यह है कि इन मजदूरों के जीवन में न तो स्थिरता है, न सुरक्षा, न पहचान और न ही संवेदनशीलता।
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Jansaamna
“जिन हाथों ने इस देश की इमारतें खड़ी कीं, उन्हीं हाथों को आज रोटी, छत और पहचान के लिए जूझना पड़ रहा है। दिहाड़ीदार मजदूर केवल श्रम नहीं देते, वे इस देश की नींव हैं — लेकिन सबसे उपेक्षित भी। विकास की रफ्तार में उनका पसीना झलकता है, पर उनकी आवाज़ नहीं सुनाई देती। क्या यही है ‘नए भारत’ का सपना — जहाँ श्रमिक अनदेखे, अनसुने और असुरक्षित रहें?”
आज के समय में शिक्षा को ज्ञान का माध्यम कम और व्यवसाय का जरिया अधिक समझा जाने लगा है। निजी स्कूल, जो कभी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का प्रतीक माने जाते थे, अब अभिभावकों की जेब पर बोझ बनते जा रहे हैं। कापी-किताबों की आड़ में इन स्कूलों द्वारा की जा रही लूट किसी डकैती से कम नहीं है। यह एक ऐसा मुद्दा है जो न केवल शिक्षा व्यवस्था की साख पर सवाल उठाता है, बल्कि समाज के मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए गम्भीर संकट पैदा कर रहा है।
प्रभु श्री राम का चरित्र हमारा वो सनातन इतिहास है जो इतने वर्षों बाद भी सम्पूर्ण विश्व की मानवता को वर्तमान तथा भविष्य की राह दिखा रहा है।
मध्य प्रदेश सरकार ने धार्मिक महत्व के 19 नगरों और ग्राम पंचायतों में एक अप्रैल से शराब बिक्री पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के अनुसार उज्जैन, ओंकारेश्वर, महेश्वर, मण्डलेश्वर, ओरछा, मैहर, चित्रकूट, दतिया, पन्ना, मण्डला, मुलताई, मंदसौर और अमर कण्टक की नगरीय सीमा में शराब नहीं बिकेगी। इसके अलावा सलकनपुर, कुण्डलपुर, बांदकपुर, बरमानकलां, बरमानखुर्द और लिंग ग्राम पंचायत सीमा में भी शराब की सभी दुकानें और बार बंद करवाने का आदेश दिया गया है। प्रदेश सरकार का यह कदम स्वागत योग्य और अनुकरणीय है। अच्छा होता यदि यह प्रतिबंध पूरे प्रदेश में लागू होता।
अगर हम हकीकत की दुनिया में देखें, तो रोज़गार ज़रूरी है। बिना नौकरी या व्यवसाय के, सिर्फ घिब्ली की खूबसूरत दुनिया में खोकर पेट नहीं भरा जा सकता। लेकिन मानसिक शांति और प्रेरणा के लिए कला भी आवश्यक है। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर घिब्ली स्टाइल की इमेज और वीडियो एक ट्रेंड बन चुके हैं। लोग पिनटेरेस्ट, इंस्टाग्राम और टिकटोक पर इसे देखकर टाइम पास कर रहे हैं, कुछ इसे खुद ट्राई कर रहे हैं, और एआई टूल्स की मदद से घिब्ली-स्टाइल की इमेज बना रहे हैं।
सरकार ने जहां सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) में मात्र 2% की वृद्धि की, वहीं सांसदों के भत्तों और वेतन में 24% की बढ़ोतरी कर दी। यह विरोधाभास कर्मचारियों और जनता में नाराजगी पैदा कर रहा है। कर्मचारियों के लिए 2% DA वृद्धि ऊंट के मुंह में जीरा समान। सांसदों को पहले से ही कई सुविधाएँ मिलती हैं, फिर भी वेतन में बड़ी बढ़ोतरी। सरकार जब आम जनता की राहत की बात आती है, तो “बजट की कमी” बताती है, लेकिन सांसदों के लिए खजाना खुला रहता है।