Tuesday, October 27, 2026
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खौफ का पर्याय

gireesh-ashkखौफ का पर्याय खाकी हो गई।
मुल्क की भीवत्स झाँकी हो गई।।
मखमली रिश्ते भी सारे गुम हुए,
अब यहाँ बदरंग राखी हो गई ।।
अब बला अबला बनी इस मुल्क में
बेहया दुश्मन जहाँ की हो गई ।।
अनवरत चिंघाड़ते इस शोर में,
अब मधुर लोरी भी माँ की खो गई।
धन कमाने की कबायद यूँ बढ़ी,
जिन्दगी अब जोड़-बाकी हो गई।।