हाथरस। जनपद के इगलास, मथुरा, आगरा, अलीगढ़ समेत विभिन्न क्षेत्रों में स्थित फैक्ट्रियों की चिमनियों से लगातार काला और जहरीला धुआं निकल रहा है, जो न केवल शहर बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों की हवा को भी दूषित कर रहा है। यह स्थिति विशेष रूप से हाथरस को टीटी जेड क्षेत्र में रखे जाने के बावजूद बनी हुई है, जिससे ताज की सुरक्षा के साथ-साथ लोगों की सेहत पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है। इसने स्थानीय प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाथरस जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में फैक्ट्रियों से निकलने वाला काला धुआं हवा में फैलता जा रहा है। केमिकल फैक्ट्री, टायर जलाने वाली फैक्ट्री, लोहे को गलाने वाली फैक्ट्री और सैकड़ों भट्टों की चिमनियों से निकलने वाला यह धुआं, न केवल पर्यावरण के लिए हानिकारक है, बल्कि आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह कोई नई समस्या नहीं है, बल्कि इन फैक्ट्रियों से लंबे समय से जहरीला धुआं निकल रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इस मामले में पूरी तरह चुप्पी साधे हुए है। इसके अलावा, सड़क किनारे लगे कचरे में आग जलने से निकलने वाला जहरीला धुआं, जिसमें प्लास्टिक और अन्य हानिकारक चीजें जल रही हैं, आमजन की सेहत के लिए और भी बड़ा खतरा बन चुका है। हाथरस के एसीएमओ डॉ. एमआई आलम ने बताया कि कचरा जलाने और सड़कों के किनारे नाले में सड़ रहे कचरे से हानिकारक गैसें जैसे मिथेन, सल्फर, कार्बन डाइऑक्साइड, और कार्बन मोनोऑक्साइड निकलती हैं, जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाती हैं और ओजोन परत को भी क्षति पहुंचाती हैं। यह गैसें मानव शरीर के लिए अत्यधिक हानिकारक हैं, जिससे कैंसर, जेनेटिक डिजीज, चर्म रोग, सांस की बीमारी, एनीमिया, दांतों की समस्या, अस्थमा और टीबी जैसी बीमारियां हो सकती हैं। इस सब के बावजूद प्रदूषण लगातार फैल रहा है, जबकि जिम्मेदार अधिकारी इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या जिम्मेदार अधिकारियों ने इस गंभीर समस्या को लेकर अपनी आंखें मूंद ली हैं?
Jansaamna