आइए जानते हैं एक पुत्र अपनी मां के विषय में उम्र के अलग-अलग पड़ाव पर क्या-क्या विचार रखते हैं।
(1) 0-3 वर्ष = संसार की सबसे ख़ास व अनमोल है उसकी मां। वह सदैव अपनी मां की छत्रछाया में अपने को सुरक्षित महसूस करता है।
(2) 04-05 वर्ष = मेरी मां बहुत महान है और दुनिया में सबसे अच्छी है।
(3) 06-09 वर्ष = मेरी मां सब कुछ जानती है, वह सबसे होशियार है, मेरी मां से होशियार कोई नहीं है।
(4) 12-15 वर्ष = मैं जब छोटा था, मां ज़्यादा प्यार करती थी, अच्छा व्यवहार रखती थी, पर अब नहीं।
(5) 16-17 वर्ष = वर्तमान के साथ मेरी मां नहीं चलती, सच पूछो तो उनको कुछ पता ही नहीं है, कोई ज्ञान ही नहीं है।
(6) 18-19 वर्ष = मेरी मां बहुत चिड़चिड़ी हो गई हैं, अव्यावहारिक भी होती जा रही हैं।
(7) 20-29 वर्ष = मेरी मां बात-बात पर टोका-टोकी करती हैं, जाने कब हम लोगों को समझेंगी।
(8) 30-39 वर्ष = मुझे अपना परिवार चलाना कितना मुश्किल काम लगता है, मां कैसे चलाती थी।
(9) 40-49 वर्ष = मेरी मां ने कितने अनुशासन से मुझे पाला था, आजकल के बच्चों में कोई अनुशासन, शिष्टाचार ही नहीं रहा।
(10) 50-54 वर्ष = मुझे बड़ा आश्चर्य होता है कि मेरी मां ने हम भाई-बहनों को कितनी सहजता से पाला था, परिवार और समाज के साथ-साथ अपने पिता का भी ध्यान रखा था।
(11) 55-… वर्ष = मेरी मां कितनी दूरदर्शी थीं, परंतु हम सब बच्चे उन्हें समझ न सके, अपने ही जंजाल में फंसे रहे। पर आज वृद्धावस्था में होते हुए भी वह संयम व संघर्षपूर्ण जीवन जी रही हैं, और हम… कब तक अपनी मां को……..।
एक पुत्र को अपनी मां को समझने में कितने वर्ष लग गए, फिर भी वह समझ न सका। साथियों, स्वर्ग कैसा और कहां है यह हम नहीं जानते, परंतु इस पृथ्वी पर अपने माता-पिता की छत्रछाया में रहना स्वर्ग से कहीं ज्यादा…। कृपया आप अपनी मां को समझने में इतने वर्ष मत लगाना, समय से पहले समझ जाना क्योंकि हमारी मां हमारे बारे में कभी भी गलत विचार नहीं रखतीं, सिर्फ हमारे ही विचार उनके प्रति गलत हो जाते हैं, जो हमें समय बीत जाने पर एहसास होता है। और बस, आप मां का सम्मान करें और उनके विचारों का भी सम्मान करें। आपका जीवन सफल हो जाएगा।
-डॉ० साधना शर्मा (राज्य अध्यापक पुरस्कृत) इ० प्र० अ० पूर्व मा०वि० कन्या सलोन, रायबरेली
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