रायबरेली। जिले की होनहार बेटी पूजा पांडेय को दिल्ली विश्वविद्यालय के श्री अरविंदो कॉलेज में अंग्रेज़ी विषय की असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्त किए जाने पर रायबरेली में जोरदार स्वागत किया गया। रविवार सुबह जैसे ही वह पद्मावत एक्सप्रेस से रायबरेली रेलवे स्टेशन पहुंचीं, स्टेशन परिसर में शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों, समाजसेवियों और परिजनों ने पुष्पगुच्छों से उनका भव्य अभिनंदन किया। स्वागत करने वालों में सेवा निवृत्त प्रधानाचार्य शिव नारायण सोनी, मातृभूमि सेवा मिशन के जिला अध्यक्ष एवं योगाचार्य बृजमोहन, मंडल अध्यक्ष भगवत प्रताप सिंह, समाजसेवी अशोक मिश्रा, भाई प्रदीप पांडेय, भतीजे राघव पांडेय सहित कई गणमान्यजन मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में पूजा पांडेय की अकादमिक उपलब्धि, अनुशासन और समर्पण की प्रशंसा की।
रायबरेली से दिल्ली विश्वविद्यालय तक का प्रेरणादायी सफर
सलोन तहसील के सिरसिरा (पूरे ढाली) गांव में जन्मीं पूजा पांडेय ने प्रारंभिक शिक्षा गांव में प्राप्त की। फिरोज गांधी डिग्री कॉलेज से स्नातक (बीए) और परास्नातक (एमए) की डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने यूजीसी-नेट परीक्षा उत्तीर्ण की। वर्तमान में वह लखनऊ विश्वविद्यालय से अंग्रेज़ी साहित्य में शोध कर रही हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित श्री अरविंदो कॉलेज में उनकी असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में नियुक्ति पूरे जिले के लिए गौरव का विषय बनी है। पूजा ने अपने शैक्षणिक जीवन में सदैव प्रथम स्थान प्राप्त किया और इस सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों और परिजनों को दिया।
परिवार और क्षेत्र में खुशी का माहौल
पूजा की इस उपलब्धि पर उनके गांव और परिवार में उत्सव जैसा माहौल है। उनकी माता उर्मिला पांडेय, पिता अमरीश पांडेय, चाचा संस्कृत प्रवक्ता राजकुमार पांडेय, भाई प्रदीप पांडेय और भाभी अंशिका पांडेय ने इसे “रायबरेली की गौरवगाथा” बताया। उनकी दादी गायत्री देवी और मां ने कहा कि यह उपलब्धि पूरे जिले की बेटियों के लिए प्रेरणा है।
असिस्टेंट प्रोफेसर पूजा पांडेय का प्रेरणादायक संदेश
“बेटियों को खुद पर विश्वास करना चाहिए। आत्मनिर्भर बनें और जिस क्षेत्र में रुचि हो, उसमें निष्ठा और समर्पण से कार्य करें। जब संकल्प, अनुशासन और मेहनत साथ हों, तो कोई मंज़िल दूर नहीं होती। मेरी सफलता मेरे माता-पिता, गुरुओं और ईश्वर के आशीर्वाद का परिणाम है।” पूजा पांडेय की यह सफलता जिले की युवा पीढ़ी, विशेष रूप से बेटियों के लिए एक मिसाल है, जो यह दिखाती है कि संकल्प और परिश्रम से कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है।
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