मथुरा। मथुरा जंक्शन रेलवे स्टेशन को भारत के सबसे बड़े रेलवे जंक्शनों में गिना जाता है। धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से यह स्टेशन अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह भगवान श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा का मुख्य द्वार है। यहां साल भर लाखों श्रद्धालु दर्शन और परिक्रमा के लिए आते हैं। इसके बावजूद, यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब मथुरा देश का इतना बड़ा और प्रमुख रेलवे जंक्शन है, तो फिर सभी ट्रेनें यहां रुकती क्यों नहीं?मथुरा जंक्शन से कुल 6 रेलमार्ग निकलते हैं, और यहां 13 प्लेटफॉर्म हैं। यह आगरा मंडल के अंतर्गत आता है और देश के लगभग हर कोने के लिए ट्रेनें यहां से उपलब्ध होती हैं। इसके बावजूद कई सुपरफास्ट और प्रीमियम ट्रेनें, विशेषकर राजधानी, दूरंतो, वंदे भारत जैसी तेज गति की गाड़ियाँ मथुरा में रुकती नहीं हैं।
कारण क्या हैं?
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, हर स्टेशन पर ट्रेन को रुकवाने के लिए कुछ मानदंड होते हैं, जैसे यात्रीभार, तकनीकी कारण, संचालन में देरी से बचाव आदि। कई तेज गति की ट्रेनें कम से कम स्टॉप के साथ चलती हैं, ताकि उनकी गति और समयसारिणी बरकरार रहे। मथुरा जंक्शन पर पहले से ही भारी भीड़ और ट्रेन यातायात रहता है, जिससे कुछ ट्रेनें रूटिन ऑपरेशन में बाधा न पहुंचे, इसके लिए उनका ठहराव टाला जाता है।
मथुरा के अन्य स्टेशन भी निभा रहे भूमिका
मथुरा जिले में तीन प्रमुख रेलवे स्टेशन हैं – मथुरा जंक्शन, मथुरा कैंट और भूतेश्वर।
- मथुरा कैंट स्टेशन, जो मुख्य जंक्शन से लगभग 2 किलोमीटर दूर है, से हाथरस, कासगंज, एटा जैसे शहरों के लिए ट्रेनें चलती हैं।
- भूतेश्वर स्टेशन भी मथुरा शहर की यात्री जरूरतों को पूरा करता है और नजदीकी कस्बों के लिए एक कनेक्टिविटी बिंदु बन चुका है।
क्या हो सकता है समाधान?
स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का मानना है कि मथुरा जैसे ऐतिहासिक, धार्मिक और पर्यटन नगरी में अधिक से अधिक ट्रेनों का ठहराव होना चाहिए। इससे न सिर्फ यात्रियों को सुविधा मिलेगी, बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। इसके लिए मांग की जा रही है कि रेलवे मंत्रालय मथुरा को ‘स्पेशल स्टॉपेज स्टेशन’ के रूप में विकसित करे। फिलहाल, सवाल अपनी जगह कायम है — भारत के सबसे बड़े और व्यस्ततम जंक्शनों में से एक मथुरा में आखिर क्यों नहीं रुकतीं सभी ट्रेनें? रेलवे प्रशासन को इस विषय पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है।
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