मथुरा। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लागू की जा रही नई शिक्षा नीति और विशेष रूप से प्राथमिक विद्यालयों के विलय के फैसले के खिलाफ मथुरा में विरोध तेज हो गया है। अखिल भारतीय समता फाउंडेशन और महात्मा ज्योतिबा फुले विकास समिति मथुरा के संयुक्त तत्वावधान में चौधरी गुलाब सिंह के नेतृत्व में प्रदर्शन करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम एक ज्ञापन एडीएम नरेंद्र यादव (अतिरिक्त प्रभार) को सौंपा गया। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में राज्य सरकार विरोधी तख्तियां लेकर नारेबाजी की और सरकार की शिक्षा नीति को छात्र विरोधी, संविधान विरोधी और शिक्षा के निजीकरण को बढ़ावा देने वाला कदम बताया। प्रदर्शन के दौरान पाँच सूत्रीय खुला मांग पत्र सौंपा गया, जिसमें प्रमुख माँगें थीं:
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प्राथमिक विद्यालयों के विलय का निर्णय तत्काल वापस लिया जाए।
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प्राथमिक शिक्षा का निजीकरण पूरी तरह रोका जाए।
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संविधान के अनुच्छेद 21(ए) को पूर्ण रूप से लागू किया जाए।
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राइट टू एजुकेशन एक्ट (RTE) 2009 के प्रावधानों का ईमानदारी से पालन हो।
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निजी शिक्षण संस्थाओं पर भी सरकारी नियंत्रण सुनिश्चित किया जाए।
इस अवसर पर महात्मा ज्योतिबा फुले विकास समिति के अध्यक्ष रमेश सैनी और शिक्षक नेता नरेश सर ने कहा कि सरकार का यह कदम शिक्षा, रोजगार और संविधान के खिलाफ है, जिससे आम लोगों में गहरा आक्रोश है। अखिल भारतीय समता फाउंडेशन के अध्यक्ष लुकेश कुमार राही ने सरकार के रवैये की तीखी आलोचना करते हुए कहा, “भाजपा सरकार का रवैया कुछ ऐसा है जैसे रोम जल रहा था और नीरो बांसुरी बजा रहा था।” उन्होंने चेतावनी दी कि राज्य और केंद्र सरकार को शिक्षा से खिलवाड़ की कीमत चुकानी पड़ेगी। प्रदर्शन के दौरान डॉ. राजेंद्र प्रसाद लोधी, मुकेश सैनी, सिद्धांत भाटिया, कुणाल डागौर, चित्रसेन मौर्य, संतोष कुमार सिंह, हरेंद्र कुमार, जितेंद्र बजाना, डॉ. अरुण कुमार, अंकित सागर, आकाश बाबू, सुमित कुमार, सौदान सिंह, राजवीर सिंह, मोहित कुमार सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षक मौजूद रहे।
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