Friday, March 6, 2026
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मौकों को मैं नहीं तलाशती, मौके मुझे तलाशते हैं : स्मृति ईरानी

राजीव रंजन नाग | नई दिल्ली

भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने अपने अभिनय और राजनीतिक करियर से जुड़े कई दिलचस्प खुलासे किए। जब स्मृति ईरानी से पूछा गया कि वह शिमला में ऋषि कपूर के साथ एक फिल्म की शूटिंग कर रही थीं और दिल्ली से फोन आने पर क्या हुआ, तो उन्होंने बताया:

“मैं शिमला में थी। ऋषि कपूर साहब के साथ एक फिल्म में काम कर रही थी, जब सुबह-सुबह फोन आया कि आपको दिल्ली आना है, दोपहर को शपथ लेनी है। तो मेरा अंतिम वह क्षण, जो मैंने कैमरे को फेस किया था, वह स्वर्गीय ऋषि कपूर जी के साथ था।”

स्मृति ईरानी यह टिप्पणी ‘आपकी अदालत’ कार्यक्रम में कर रही थीं।

जब पूछा गया कि क्या ऋषि कपूर ने उन्हें कोई सलाह दी थी, तो स्मृति ईरानी ने याद करते हुए कहा:

“उन्होंने कहा कि पलकें भी मत झपकाओ, समय भी मत गवांओ। बाकी लोग जो क्रू में थे, उन्होंने भी खुशी जाहिर की और कहा कि जल्दी से बैग बांधो और दिल्ली जाओ, क्योंकि राष्ट्र सेवा से बड़ी कोई सेवा और सौभाग्य नहीं है।”

जब सवाल किया गया कि क्या कोई ऐसा मौका फिर आ सकता है कि उन्हें फिर फोन आए और वे “क्योंकि…” के सेट से वापस दिल्ली में शपथ लेते हुए दिखें? इस पर स्मृति ईरानी ने मुस्कराते हुए जवाब दिया:

“मौकों को मैं नहीं तलाशती, मौके मुझे तलाशते हैं। कौन-सा मौका मुझे कब तलाश लेगा, यह मैं नहीं जानती। इतना जानती हूं कि जब मौका मुझे तलाशते हुए आए, तो आप न बेज़ार होंगे, न शर्मसार होंगे। मैं जो प्रतिभा लेकर राजनीति और मीडिया में आई हूं, उस बेंचमार्क से नीचे नहीं उतरूंगी। इतना मैं वादा करती हूं।”

एक सवाल के जवाब में स्मृति ईरानी को यह याद दिलाया गया कि मेगास्टार अमिताभ बच्चन ने राजनीति को ‘सेसपूल’ (नालाबद्ध गंदगी) कहकर छोड़ दिया था, और राजेश खन्ना ने भी निराश होकर राजनीति से तौबा कर ली थी

। इस पर स्मृति ईरानी ने स्पष्ट किया:

“मैं राजनीति में नहीं आई, मैं राष्ट्रनीति से जुड़ी हूं। क्योंकि राजनीति में आप आते हैं तो अपने लिए कुछ तलाशते हैं, लेकिन राष्ट्रनीति से जुड़ते हैं तो राष्ट्र के लिए नई ऊंचाइयां और उपलब्धियां तलाशते हैं। यही फर्क होता है अपने लिए करने और दूसरों के लिए करने में। अपने लिए तो बहुत लोग करते हैं, दूसरों के लिए जीना और सेवा भाव रखना बहुत कम लोगों को नसीब होता है।
मेरे जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि मैं बीजेपी में स्मृति ईरानी बनकर आई थी और अब दीदी बन गई हूं।”

विनोद खन्ना के साथ काम करने के अनुभव पर स्मृति ईरानी ने कहा:

“बहुत ही सुयोग्य अभिनेता थे, अनुभवी और पॉलिटिक्स में भी उनकी जो श्रद्धा और झुकाव था, वह काबिले-तारीफ था। बहुत अनुशासित और नो-नॉनसेंस व्यक्ति थे। ऐसे व्यक्ति के साथ काम करना और उनके नो-नॉनसेंस एटीट्यूड को सर्वाइव करना, अपने आप में तमगा माना जाता था।”

उन्होंने कहा कि हेमा मालिनी का भी राजनीति में विशेष योगदान रहा है। वहीं शत्रुघ्न सिन्हा, जो अब तृणमूल कांग्रेस में हैं, को उन्होंने याद करते हुए बताया:

“वह मेरे जीवन में पहले अवॉर्ड देने वालों में से एक थे। मुझे या

द है, अगर कोई पुरानी क्लिप निकलेगी, तो उसमें मैं जज के नाते बैठी हूं और जिन पर जजमेंट दे रही हूं, वे आज पंजाब के मुख्यमंत्री (भगवंत मान) हैं।”

जब पूछा गया कि क्या शत्रुघ्न सिन्हा, भगवंत मान का सेंस ऑफ ह्यूमर अब भी उतना ही तेज है? इस पर स्मृति ईरानी ने मुस्कराते हुए कहा:

“मैं उस पर टिप्पणी कम ही करूं, तो अच्छा है। लेकिन हां

, ये सभी दिग्गज थे। मैंने दत्त साहब के साथ भी काम किया। भले ही वह कांग्रेस में रहे, लेकिन उनका अपना योगदान रहा।”

उन्होंने अमिताभ बच्चन के बारे में भी टिप्पणी की:

“अमित जी का व्यक्तित्व कुछ ऐसा है कि अगर तलवारें खिंच जाएं, तो वे चाहते हैं कि वे शांति-दूत बनें। और हम उस पीढ़ी से हैं, कि अगर तलवार खिंच जाए, तो जब तक खून न लगे, वह म्यान में नहीं जाती। यह दृष्टिकोण और अनुभव का फर्क है।”

जब स्मृति ईरानी को उनके मॉडलिंग दिनों की कुछ पुरानी तस्वीरें दिखाई गईं और कहा गया कि ये तस्वीरें वाकई स्टनिंग हैं, तो उन्होंने हँसते हुए कहा:

“स्टनिंग तो नहीं है… लेकिन, क्योंकि स्मृति भी कभी पतली थी। ये मिस इंडिया की तस्वीरें हैं। आज मुझे देखकर लगता नहीं है, लेकिन मैं मिस इंडिया फाइनलिस्ट रह चुकी हूं।”