Tuesday, June 16, 2026
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JAN SAAMNA DESK

लाॅकडाउन अवधि में फीस एडवांस ना मांगने का निर्देश था फीस माफी का नहींः जिलाधिकारी

कानपुरः जन सामना ब्यूरो। जिला अधिकारी डाॅ0 ब्रह्मदेव राम तिवारी, डी आई ओ एस, बी एस ए, आई सी एस सी बोर्ड, सीबीएससी बोर्ड एवं कुछ अन्य विद्यालय के प्रतिनिधि तथा अभिभावकों के साथ अपने कैंप कार्यालय में बैठक आयोजित की गई। बैठक में आईसीएससी, सी बी एस सी तथा अन्य विद्यालयों के प्रतिनिधियों द्वारा यह बताया गया कि सोशल साइट्स में लगातार चल रहे भ्रामक संदेश चल रहा कि ‘सरकार द्वारा लाॅकडाउन अवधि में फीस माफ कर दी गई है।’ जिसके कारण अभिभावक अब फीस नहीं दे रहे हैं। उनके फीस न देने के कारण शिक्षक संस्थानों द्वारा अपने कर्मचारियों तथा बिजली आदि के बिल नहीं दिए जा सकते हैं जिस पर जिलाधिकारी डाॅ0 ब्रह्मदेव राम तिवारी ने स्पष्ट किया कि शासन से प्राप्त निर्देशों के क्रम में लाॅकडाउन अवधि में विद्यालय की फीस एडवान्स न लेने के संदर्भ में निर्देशित किया गया था, कोई भी फीस माफ नहीं की गई थी।

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शिवाजी इंटर काॅलेज के मैदान में किया पौधारोपण

कानपुर। कांग्रेस सेवादल यंग ब्रिगेड कानपुर नगर ग्रामीण द्वारा महाराजपुर विधानसभा के अंतर्गत वार्ड 82 जरौली फेस दो शिवाजी इंटर काॅलेज के मैदान में पौधारोपण किया गया। प्रदेश अध्यक्ष संगीत तिवारी ने गुड़हल, सागौन, अशोक, अर्जुन, कनेर, अमरूद, केला आदि के पौधे रोपित किये और बताया कि विश्व पर्यावरण की सुरक्षा और संरक्षण हेतु पूरे विश्व में मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने की घोषणा संयुक्त राष्ट्र ने पर्यावरण के प्रति वैश्विक स्तर पर राजनीतिक और सामाजिक जागृति लाने हेतु वर्ष 1972 में की थी 5 जून 1974 को पहला विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया। जिला अध्यक्ष सुशील सोनी ने बताया पर्यावरण को सुधारने हेतु यह दिवस महत्वपूर्ण है जिसमें पूरा विश्व रास्ते में खड़ी चुनौतियों को हल करने का रास्ता निकालता हैं। लोगों में पर्यावरण जागरूकता को जगाने के लिए संयुक्त राष्ट्र द्वारा संचालित विश्व पर्यावरण दिवस दुनिया का सबसे बड़ा वार्षिक आयोजन है इसका मुख्य उद्देश्य हमारी प्रकृति की रक्षा के लिए जागरूकता बढ़ाना है।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से जिला अध्यक्ष सुशील सोनी, जिला उपाध्यक्ष बिहारीलाल निषाद, प्रबंधक ननकऊ सिंह चंदेल, विष्णु कुशवाहा, रामू सोनी आदि लोग उपस्थित रहे।

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पर्यावरण दिवस पर प्राणि उद्यान में किया पौधारोपण

कानपुरः जन सामना संवाददाता। पर्यावरण दिवस के अवसर पर कानपुर प्राणि उद्यान में पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर अशोक के 11 पौधे रोपित किये गये। वरिष्ठ वन्य जीव सेवक वी के शर्मा ने कहा कि वृक्ष ही देवता हैं। ऐसा वेदों में कहा गया है। एक पुत्र दस पुत्रों के समान कहा जाता है। पौधारोपण कार्यक्रम में आजादनगर रामलीला कमेटी के अध्यक्ष शरद सेठ, प्राणि उद्यान के सहायक निदेशक अरविन्द्र कुमार सिंह, सहायक वन संरक्षक विनीता सिंह, क्षेत्रीय वन अधिकारी दिलीप कुमार गुप्ता, समाजसेवी विनोद अग्रवाल व मुकेश कुमार मौजूद रहे।

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पर्यावरण दिवस पर स्वयंसेवकों ने किया पौधारोपण

कानपुरः स्वप्निल तिवारी। पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कानपुर दक्षिण की हरदेव शाखा में स्वयंसेवकों ने एक अभियान के तहत घर घर जाकर 101 घरों में तुलसी का पौधा लगाया और घर की ग्रहणी से संकल्प लिया की वे इस पौधे को हमेंशा सुरक्षित रखने का प्रयास करेंगी डॉ दुर्गेश चौहान ने बताया की विज्ञान आज इतनी अधिक उन्नत अवस्था में है कि उसने अनेकों असंभव कार्य को संभव कर दिखाया है वर्तमान समय में किसी का कान खराब हो जाये,आंख खराब हो जाए,शरीर के अधिकतम भाग यहां तक ह्रदय को भी प्रत्यारोपित किया जआ सकता है लेकिन विज्ञान के द्वारा अभी सांसे कोई भी नही बढ़ा सकता और अगर कोई स्वच्छ जनजीवन दे सकता है तो वह हमारे वृक्ष है इस मौके पर डॉ दुर्गेश चौहान, शिव कुमार सिंह, विजय सिंह, मनीष ,प्रखर, धीरेंद्र ब्रह्मपाल, सुनील, कन्हैया एवं छोटू आदि स्वयंसेवक उपस्थित रहे।

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विश्व पर्यावरण दिवस पर श्री कृष्णा फाउंडेशन परिवार ने लगाये पौधे

लखनऊ। श्री कृष्णा फाउंडेशन (समाज सेवी संस्था) के बैनर तले विश्व पर्यावरण दिवस पर अलग अलग जगहों पर पौधारोपण कार्यक्रम किया गया है। संस्था के अध्यक्ष पवन कुमार सोनी ने कहा कि महामारी के इस दौर में संस्था के पदाधिकारीयों ने खाद डाल कर अलग अलग प्रजातियों के पौधे लगाये। श्री सोनी ने बताया कि देश मे खेतों को खत्म करके लोग प्राॅपर्टी का काम कर रहे है यदि ऐसा चलता रहा तो देश मे कहीं भी हरयाली नही मिलेगी। पेड़ों की कटान पर रोक लगाने से देश को हरियाली एवं शुद्ध आक्सीजन मिल सकेगी। कहा कि हर नागरिक यदि एक पेड़ लगाता है तो हमे हरियाली एवं शुद्ध वातावरण मिलेगा जिससे जीवन और सुगंधित हो जाएगा। संस्था द्वारा ‘सांसे हो रही है कम, आओ पेड़ लगाए हम’ के आधार पर एक विशाल अभियान चलाया जाएगा जिसमे देश मे 50 हजार पेड़ लगाने की लोगों को शपथ दिलाएगी। पर्यावरण को बचाने के लिए सभी को पौधारोपण अवश्य लगाना चाहिए। इस मौके पर संस्था के सचिव शिवम सोनी, उपाध्यक्ष शशांक सोनी, शिव सिंह, भानुप्रसाद प्रभात रंजन गुप्ता, विकास दीप सिंह एवं शिवम गुप्ता, दीपक जैसवाल, आयूष यादव शामिल रहे।

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जैव विविधता संरक्षण समय की सबसे बड़ी जरुरत है-ज्योति बाबा

कानपुर। जैव विविधता से हमारे रोजमर्रा की जरूरतों रोटी, कपड़ा, मकान, ईंधन, औषधियों आदि आवश्यकताओ की पूर्ति होती है, यह पारिस्थितकी संतुलन को बनाये रखने के साथ खाद्दान्न उत्पादक को बढ़ाने में भी सहायक होती है, उपरोक्त बात सोसायटी योग ज्योति इण्डिया व फैमिली हाॅस्पिटल, विमला नर्सिंग फार्मेसी काॅलेज के संयुक्त तत्वावधान में विश्व पर्यावरण दिवस पर फैमिली हाॅस्पिटल में आयोजित सोशल डिस्टेनसिंग के तहत राष्ट्रीय पर्यावरण गोष्ठी व कोरोना यो(ा पत्रकार-समाजसेवी के सम्मान समारोह के अवसर पर अन्तर्राष्ट्रीय नशा मुक्ति अभियान के प्रमुख योग गुरु ज्योति बाबा ने कही, ज्योति बाबा ने आगे कहा कि कोरोना व नशा के प्रसार को रोकने हेतु पेडों को बचाना मानव जीवन के लिए जरूरी है, मुख्य कार्यक्रम संयोजक डाॅ अजीत सिंह ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में वातावरण में भीषण बदलाव हुए है, जिसकी वजह से जैव विविधता को बनाये रखने में गिरावट आई है, इस तरह के बिगडते हालात मनुष्य जीवन के लिए किसी भयंकर खतरे से कम नहीं है कानपुर उद्योग व्यापार मण्डल के अध्यक्ष टीकम चंद सेठिया ने कहा कि बाढ़, सुखा, भू-श्खलन आदि से मुक्ति के लिए सम्पूर्ण जैव विविधता का संरक्षण आज समय कि सबसे बड़ी जरूरत है इससे पूर्व डाॅ अजीत सिंह, वरिष्ठ पत्रकार दुष्यंत सिंह, टीकम चंद सेठिया, जय नारायण कटियार (अपना दल प्रदेश महासचिव) व ज्योति बाबा ने दीप प्रज्जवलन कर विधिवत शुभारंभ किया।

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कैसे संकट के समय में पीआर आपके व्यवसाय का समर्थन करता है?

व्यापार की दुनिया में लाभ और हानि दोनों ही सामान्य शब्द है। किसी भी तरह का व्यवसाय शुरू करने से पहले आपको भविष्य में होने वाले विभिन्न प्रकार के नुकसान का पूर्वानुमान लगाना होगा या दूरदर्शी बनना होगा। यह प्रत्येक व्यवसाय के मालिक का सबसे दुखद पल है कि वह अपने व्यवसाय के नुकसान की कल्पना करे। हालांकि भविष्य कोई भी नहीं देख सकता है, लेकिन आप अपने आप को अपने व्यवसाय में आने वाली हानि से बचने के लिए तैयार कर सकते हैं। चाहे वह लोगों के बीच अपने व्यवसाय की छवि को बदलना हो या अपने व्यवसाय को हानि से बचाने के लिए तैयार करना हो, जनसंपर्क हमेशा आपका अपराजय योद्धा होगा।
पीआर के बारे में बात करते हुए, एक प्रमुख जनसंपर्क कंपनी के संस्थापक अतुल मलिकराम कहते हैं कि, “पीआर क्षेत्र बहुत विशाल है। कोई भी कंपनी जब एक निश्चित संकट से गुजर रही होती है, तो उसके लिए विशेष रूप से पीआर का समर्थन बहुत आवश्यक हो जाता है। किसी भी कंपनी को सफलता हासिल करने में कई साल लग जाते हैं, लेकिन एक पल ही इन सालों की मेहनत और नाम को बर्बाद कर देता है। ऐसे समय में पीआर ही है जो किसी कंपनी को उसके नुकसान से बाहर निकालने में मदद करता है।”

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विश्व पर्यावरण दिवस पर ग्राम्या संस्थान ने किया पौधारोपण

चन्दौलीः दीप नारायण यादव। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर शुक्रवार को ग्राम्या संस्थान द्वारा नौगढ़ विकास खण्ड के लालतापुर गाँव स्थित चिराग केन्द्र पर पर्यावरण के प्रति जागरूकता हेतु कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम के शुरुआत से पहले शरीरिक दूरी का ध्यान रखते हुए सबकी थर्मल स्क्रीनिंग की गई और लोगों को करोना से सुरक्षित रहने हेतु जागरूक किया गया। इसके बाद पर्यावरण की सुरक्षा एवं संरक्षण पर लोगों को जागरूक किया गया। जागरुकता पर बात रखते हुए संस्थान की निदेशक बिन्दु सिंह ने कहा कि हर वर्ष 5 जून को पूरी दुनिया में लोग इकट्ठा होकर पर्यावरण दिवस मनाते हैं। इंसान और पर्यावरण के बीच बहुत गहरा सम्बन्ध है इसलिए व्यक्ति को पर्यावरण के प्रति सचेत एवं जागरूक करने के लिए यह दिवस मनाया जाता है। विश्व में लगातार वातावरण दूषित होता जा रहा है इसलिए हमें प्रकृति के साथ हर हाल में तालमेल बिठाना ही होगा, यहाँ उपस्थित हर लोग यह संकल्प लें कि हम पेड़ लगाएंगे और पर्यावरण को शुद्ध रखने में अपना सहयोग देंगे। वहीं संस्थान के सुरेन्द्र ने बताया कि पर्यावरण को संतुलित करने के लिए एवं इसके प्रति समाज में जागरूकता फैलाने हेतु पूरी दुनिया में यह दिवस मनाया जाता है, इस दिवस को मनाने की घोषणा संयुक्त राष्ट्र संघ ने पर्यावरण के प्रति वैश्विक स्तर पर राजनीतिक और सामाजिक जागृति लाने हेतु वर्ष 1972 में की थी, तब से हम लोग हर साल यह दिवस मनाते हैं लेकिन अभी भी इसके प्रति और जागरूक होना होगा क्योंकि गाँव में अक्सर देखा जाता है की दिन में भी लाइट जलती रहती है जिसका कोई उपयोग नहीं है फिर लोग अपनी बत्ती जलाकर बिजली का दुरूपयोग करते हैं। एक यूनिट बिजली बनाने में कितना कोयला या पानी खर्च होता है यह हम सभी को समझना होगा और इसके प्रति प्रत्येक व्यक्ति को जागरूक होना होगा तभी पर्यावरण संतुलित हो पाएगा।
इस अवसर पर बिन्दु सिंह, सुरेन्द्र, नीतू सिंह, त्रिभुवन, मदन मोहन, रामविलास, रामबली, श्रीराम आदि लोगों ने पौधरोपण कर लोगों को एक संदेश भी दिया। उक्त कार्यक्रम में शिवानंद, गणेश, जयप्रकाश, रामा, उमेश कुमार, मंजू, शशिकला कुसुम, संगीता, हीरावती, रामरति, सहित दर्जनों लोग शारीरिक दूरी बनाकर शामिल रहे।

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मास्क बांट कर कोरोना के प्रति किया जागरूक

बाराबंकी़ः सी.बी. शुक्ला। कोरोना (कोविड-19) का संक्रमण दिनोंदिन फैल रहा है। सरकार इस ओर अपने स्तर से कदम उठा रही है तो जगह जगह पर लोग अपने अपने स्तर से कदम उठा रहे हैं और कोरोना से बचाव हेतु सेनेटाइजर, मास्क आदि का उपयोग कर रहे हैं। वहीं मास्क आदि का निःशुल्क वितरण भी लोग कर रहे हैं। इसी क्रम में हैदरगढ़ क्षेत्र के पैकौली ग्राम सभा के पुरवा क्षेत्र में मास्क वितरण का कार्यक्रम बिगत दिनों आयोजित किया गया। सैकड़ों लोगों को मास्क निःशुल्क दिये गये और कोरोना से बचाव हेतु जागरूक किया गया। उक्त अवसर पर गांव के जागरूक एवं समाज के प्रति जिम्मेदार अनिल शुक्ला, विरेंद्र कुमार वर्मा, राहुल शुक्ला, जगन्नाथ वर्मा, हरि नाम वर्मा, अश्वनी शुक्ला, ललित शुक्ला, पुष्पेंद्र शुक्ला, अर्जुन वर्मा, भीम वर्मा, पिंटू शुक्ला, लल्लू पांडे सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

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मजदूर के नसीब में ठोकर

उप्र, बिहार, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश सहित अन्य राज्यों में एक के बाद एक घटित भयावह सड़क हादसों में मजबूर मजदूरों की मौत ने कामगारों की दयनीय दशा को सबके सामने लाकर रख दिया है। राष्ट्रीय राजमार्गों, रेल की पटरियों के किनारों पर दिख रहे नजारों यह तो स्पष्ट कर दिया कि कामगारों की घर वापसी के लिए सरकारों ने अगर उचित प्रबंध किए होते तो शायद इन भीषण हादसों से कामगारों व मजबूरों की जान जाने से बच सकती थी। लेकिन सरकारी तन्त्र की लापरवाही, सरकारों की अनदेखी व संवेदनहीनता के चलते कामगारों की जान चली गई।
सोंचनीय और विचारणीय तथ्य यह है कि केंद्र और राज्य सरकारों को तभी जागरूक हो जाना चाहिए था जब पहला हादसा घटित हुआ था लेकिन, लेकिन ऐसा नहीं हुआ था और सरकारों द्वारा घड़ियाली आंसू बहाकर व महज औपचारिकता भरी संवेदना जताकर अपने अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली गई थी। नतीजा यह हुआ कि कामगारों के पैदल या साइकिल से घर जाने का सिलसिला थमने के वजाय और तेज हो गया। इसके बाद एक के बाद एक कई हादसे हो गये।

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