Saturday, September 19, 2026
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लेख/विचार

राह दिखाएं भी क्यों

गम ए फुर्क़त उन्हें हम सुनाएं भी क्यों
दीदा -ए-तर सबको अपने दिखाएं भी क्यों
दिल जिनका बेखुशबू सा है गुलज़मी
रायगां ऐसी जगहों पर जाएं भी क्यों
तमाम खुशियां हैं जो करती हैं रौशन ये दिल
तेरे बेरूख़ी के अज़ाबों से दिल डराएं भी क्यों
जमाना निहायत नेक दिल को भी बख्सता नहीं
खुद को जमाने की बातों में हम उलझाएं भी क्यों
है काफ़ी मेरी मासुमियत तुझे जलाने के लिए
बेवजह मेरे अदू तुझसे टकराएं भी क्यों
जिन्हें नफरत के जंगल में है भटकना मंजूर
प्यार के चराग़ से उनको हम राह दिखाएं भी क्यों
फुर्कत-जुदाई, दूरी
दिदाए तर -आसुओं से भीगी आंखें रायगां- फ़िज़ूल में अदू- दुश्मन
बीना राय, गाजीपुर, उत्तर प्रदेश

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क्या किसान आंदोलन अपनी प्रासंगिकता खो रहा है

आज सोशल मीडिया हर आमोखास के लिए केवल अपनी बात मजबूती के साथ रखने का एक शक्तिशाली माध्यम मात्र नहीं रह गया है बल्कि यह एक शक्तिशाली हथियार का रूप भी ले चुका है। देश में चलने वाला किसान आंदोलन इस बात का सशक्त प्रमाण है। दरअसल सिंघु बॉर्डर और गाजीपुर बॉर्डर पर पिछले दो माह से भी अधिक समय से चल रहा किसान आंदोलन भले ही 26 जनवरी के बाद से दिल्ली की सीमाओं में प्रवेश नहीं कर पा रहा हो लेकिन ट्विटर पर अपने प्रवेश के साथ ही उसने अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को पार कर लिया। वैसे होना तो यह चाहिए था कि बीतते समय और इस आंदोलन को लगातार बढ़ते हुए अंतरराष्ट्रीय मंचो की उपलब्धता के साथ आंदोलनरत किसानों के प्रति देश भर में सहानुभूति की लहर उठती और देश का आम जन सरकार के खिलाफ खड़ा हो जाता।

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भारत में समान नागरिक संहिता लागू करना अब समय व परिस्थितियों अनुसार अनिवार्य हो गया

कार्यपालिका व न्यायपालिका द्वारा कानूनों का सम्मान व क्रियान्वयन जरूरी – संविधान के अनुच्छेद 44 में यूसीसी लागू करने का उल्लेख – एड किशन भावनानी
अभी हाल ही में जिस प्रकार से आए कार्यपालिका व न्यायपालिका क्षेत्र के निर्देश व आदेशों का अगर हम अध्ययन करें, तो हम यह महसूस करेंगे कि अब वह उचित समय आ गया है कि, भारत में समान नागरिक संहिता लागू करना जरूरी हो गया है, जिसका उल्लेख भारत संविधान में पहले से ही है। भारतीय संविधान अनुच्छेद 44 राज्य नीति के निर्देशकों तथा सिद्धांतों को परिभाषित करता है इसमें समान नागरिक संहिता (UCC) शामिल है। अनुच्छेद 44 में यह उल्लेख किया गया है कि नागरिकों के लिए देश के पूरे क्षेत्र में एक समान अधिकार हो तथा समान नागरिक संहिता की रक्षा करना राज्य का प्रमुख कर्तव्य है। अभी हाल ही में न्यायपालिकाओं के जिस प्रकार जजमेंट आए हैं उसमें तो यह प्रतीत होता ही है।

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चीन का नकली चंद्रमा मुश्किलें खड़ी करेगा

चीन को कभी भी हल्के मेें लेने की जरूरत नहीं है। चीन दीवार के उस पार क्या करता है, इसका दुनिया को तब पता चलता है, जब विश्व सुखद अथवा दुःखद आश्चर्य को पाता है। चीन वायरस पैदा कर सकता है। मौसम का रुख बदल सकता है। पड़ोसी देशों में पानी की प्रचंड बाढ़ ला सकता है और अकाल भी डाल सकता है। चीन अपने दुश्मन देशों के साथ मौसम का युद्ध लड़ने के लिए अपनी वैज्ञानिक सुदृढ़ता हासिल कर रहा है।
बाकी एक जमाना था, जब रूस ने स्पुतनिक नाम का उपग्रह बना कर अमेरिका सहित पूरी दुनिया को स्तब्ध कर दिया था। उसके बाद तो अमेरिका मैदान में आ गया था। अमेरिका ने अपोलो अंतरिक्ष यान छोंड़ कर मानव को चंद्रमा पर पहुंचा कर दुनिया को दंग कर दिया। उसके बाद मंगल पर चढ़ाई की प्रतियोगिता शुरू हुई। चीन ने ओलम्पिक खेल के समय शहर में बरसात न हो, इसके लिए बादलोें को दूसरे स्थान पर खींच ले जाने की टेक्नोलाॅजी ला कर विश्व को स्तब्ध कर दिया था।

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पहला वैलेंटाइन डे

कमल से मेरी मुलाकात मेरी सहेली निशी के घर पर हुई थी। कमल निशी का कजिन था और वह उसके घर कुछ दिन घूमने के लिए आया हुआ था। आज हमे मिले हुए एक साल होने को आया लेकिन लगता है कि जैसे कल की ही बात है। मैं हमेशा की तरह निशी निशी चिल्लाते हुए उसके कमरे में घुसी ही थी कि निशी के कमरे में एक अनजान व्यक्ति को देखकर मैं एकदम चुप हो गई। अब वो व्यक्ति और मैं एक दूसरे को देख रहे थे कि तभी निशी आ गई। “अरे नंदिता तुम कब आई?” मैं कुछ बोली नहीं बस आंखों से उस अनजान व्यक्ति की ओर इशारा कर दिया। निशी बोली, “अरे, इनसे मिलो यह मेरे कजिन कमल हैं।” हम दोनों का परिचय हुआ। कमल ने मुस्कुराते हुए मुझे “हेलो” कहा और कमरे के बाहर चला गया।

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किसानों का महत्व

हम सभी जानते है की हमारे जीवन में भाेजन का क्या महत्व है काेई भी व्यक्ति एैसा नहीं है जो बिना भोजन के रह सकता हाे पर क्या आप कभी ये साेचे है की ये भाेजन बनाने के लिए अनाज आता कहा से है और कैसे उगाया जाता है? ये सब हमारे किसान जवान की देन है जाे दिन रात एक कर के अनाज उगाते है। समाज तक पहुँचाते है चाहे धूप हाे या बारिश या फिर सर्दी की ठंड रात हाे पर वाे लगे रहते हैं। दिनाे रात एक कर के ताकि सभी तक अनाज पहुँचे और काेइ भूखा न साेय और सब जन अपना जीवन खुशी से व्यतित करे पर बदले में उनकाे मिलता क्या है? क्या आपने कभी जमीनी ताैर से साेचा है की किसान आत्महत्या क्याे कर रहा है मेरे ख्याल से “नहीं ” और अगर गलती से हा भी ताे सिर्फ दाे चार दिन के लिए वाे भी कुछ समाचार पत्राे के माध्यम से अन्यथा वाे भी नहीं, आज किसान की हालत इतनी दैनिय हाे गई है की जाे सबका पेट पालता है उसे खुद का वह परिवार का पेट पालने के लिए माेहताज हाेते जा रहा है।

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चमोली ग्लेशियर हादसा, वैश्विक जलवायु परिवर्तन का आकस्मिक परिणाम

चमोली जिले में विदेशिया पिघलने की घटना अचानक नहीं हुई, इसकी पृष्ठभूमि में जलवायु परिवर्तन के घटक तत्व अंतर्निहित है| इस दुर्घटना में अभी तक 26 शव बरामद हुए हैं एवं कुल 171 लोग लापता भी हैं| ऐसा क्यों होता है की उत्तरांचल में हिमस्खलन या ग्लेशियर के पिघलने की घटना पिछले कई वर्षों से होती आ रही है| हम सोचते हैं कि प्राकृतिक आपदा है| निसंदेह यह प्राकृतिक आपदा है, पर इसके पीछे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जलवायु परिवर्तन एवं इस क्षेत्र में ऊंचाई पर बनाए गए मानव निर्मित कई बड़े बांध भी इसके जिम्मेदार हैं| ग्लेशियर के फटने से ऋषि गंगा परियोजना के रूप में जाने जाने वाले तपोवन हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर डैम पूरी तरह तबाह और ध्वस्त हो गया है| सैकड़ों लोगों की गुमशुदगी के साथ वहां के निवासी मृत्यु को प्राप्त हुए हैं|

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भ्रष्टाचार मुक्त भारत के लिए कार्यपालिका, न्यायपालिका सहित हर नागरिक का योगदान जरूरी – एड किशन भावनानी

संभावित दृष्टिकोण और केवल करेंसी नोटों की बरामदगी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराध कायम करने के लिए पर्याप्त नहीं – सुप्रीम कोर्ट
भ्रष्टाचार एक वैश्विक महामारी है जिससे करीब-करीब हर देश पीड़ित है। बात कहीं छोटे तो कहीं बड़े पैमाने पर है, और इसे जड़ से मिटाने के लिए हर स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं।अगर हम भारत देश की बात करें तो यहां भी इस महामारी से पीड़ित हैं। यह तो सभी जानते होंगे और प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से भी हम देखते सुनते वह पढ़ते आ रहे हैं, कि किस तरह निचले स्तर से बड़े स्तर तक इस महामारी ने घर कर लिया है। बिना भ्रष्टाचार के करीब करीब कोई काम मुश्किल से होता है। करीब-करीब हर स्तर पर इस महामारी ने पैर फैला रखे हैं। और इसका अलग अलग तरीके, कोडवर्ड, पासवर्ड, भाषा, लेखन, कलर, इत्यादि अनेक तरीकों से लेनदेन किया जाता है।

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बजट 2021 और भारत की जीडीपी विकास दर में होने वाला परिवर्तन

पिछला पूरा वर्ष 2020 कोविड-19 की भेंट चढ़ गया और इसलिए 1 फरवरी 2021 को पेश होने वाला बजट मुख्यतः स्वास्थ्य पर केंद्रित रहा। इसे हम रिकवरी वाला बजट भी कह सकते हैं, क्योंकि जैसे लंबी बीमारी से रिकवर होने के लिए मरीज को अपनी डाइट का विशेष ध्यान रखना पड़ता है और अनुशासन में रहना पड़ता है उसे रिकवरी के लिए कुछ समय चाहिए होता है और इस दौरान उसकी जीवन शैली में भी बड़े बदलाव होते हैं, इसी प्रकार इस बजट में भी देश के नागरिकों के स्वास्थ्य, देश की अर्थव्यवस्था के स्वास्थ्य और देश के शहरों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया गया है। इस बार का टोटल हेल्थ बजट 2 लाख 23 हजार करोड़ रुपए है जो पिछली बार की तुलना में 137% ज्यादा है। आत्मनिर्भर भारत को आगे बढ़ाने के लिए इसमें पूरी तैयारी की गई है। कैपिटल एक्सपेंडिचर को बहुत ज्यादा बढ़ाने की बात की गई है यानी कि इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में बड़े निवेश करने की तैयारी है।

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बजट 2021-2022 आत्मनिर्भर भारत का बुनियादी ढांचा साबित होगा !

बजट में मिडिलक्लास के लिए कुछ नहीं – कृषि सेस आम करदाताओं पर नहीं – एड किशन भावनानी
केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा सोमवार दिनांक 1 फरवरी 2021 को संसद के पटल पर 64 पृष्ठों का 2021-2022 का बजट प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया, जो इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से करोड़ों लोगों ने देखा व सुना, बजट कॉपी के अनुसार बजट को 3 भागो पार्ट ए, बी, सी, तथा 6 स्तंभों में विभाजित किया गया था। अगर हम बजट का विश्लेषण करें, तो यह बजट आत्मनिर्भर भारत का बुनियादी ढांचा साबित होगा। क्योंकि इस बजट में इंफ्रस्ट्रक्चर पर बल दिया गया है। हमने कोविड-19 महामारी से बहुत कुछ सबक सीखा, इसी की परिणति है कि स्वास्थ्य बजट में 137 परसेंट याने 2.38 लाख करोड़, सरकारी बैंकों में 20 हज़ार करोड, बैंकों को एनपीए में से पीछा छुड़ाने एसेट स्कीम, वैक्सीन के लिए 35 हजार करोड़ एलआईसी का 2022 में आईपीओ, इत्यादि अनेक बुनियादी ढांचे में विनियोग की बात कही गई है।

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