Thursday, May 14, 2026
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हवन-यज्ञ से वायुमंडल शुद्ध होने के साथ-साथ व्यक्ति को मिलता है आत्मिक बल

सिकंदराराऊ । गांव खिजरपुर में सात दिन से चल रही भागवत कथा के समापन के मोके पर प्रातः हवन यज्ञ का आयोजन हुआ ततपश्चात विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। भारी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। भागवत कथा का आयोजन मनोज उपाध्याय परिवार के संयोजन में हुआ। कथा व्यास शुभम उपाध्याय जी महाराज ने 7 दिन तक चली कथा में भक्तों को श्रीमद भागवत कथा की महिमा बताई। उन्होंने लोगों से भक्ति मार्ग से जुड़ने और सत्कर्म करने को कहा। कथा व्यास ने कहा कि हवन-यज्ञ से वातावरण एवं वायुमंडल शुद्ध होने के साथ-साथ व्यक्ति को आत्मिक बल मिलता है। व्यक्ति में धार्मिक आस्था जागृत होती है। दुर्गुणों की बजाय सद्गुणों के द्वार खुलते हैं। यज्ञ से देवता प्रसन्न होकर मनवांछित फल प्रदान करते हैं। उन्होंने बताया कि भागवत कथा के श्रवण से व्यक्ति भव सागर से पार हो जाता है। श्रीमद भागवत से जीव में भक्ति, ज्ञान एवं वैराग्य के भाव उत्पन्न होते हैं। इसके श्रवण मात्र से व्यक्ति के पाप पुण्य में बदल जाते हैं। विचारों में बदलाव होने पर व्यक्ति के आचरण में भी स्वयं बदलाव हो जाता है। कथावाचक उपाध्याय जी महाराज ने भंडारे के प्रसाद का भी वर्णन किया। उन्होंने कहा कि प्रसाद तीन अक्षर से मिलकर बना है। पहला प्र का अर्थ प्रभु, दूसरा सा का अर्थ साक्षात व तीसरा द का अर्थ होता है दर्शन। जिसे हम सब प्रसाद कहते हैं।