ईश्वर भक्ति के साथ राष्ट्रभक्ति को भी माना आवश्यक

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कानपुरः जन सामना संवाददाता। कामता सेवा संस्थान द्वारा आयोजित स्वामी विवेकानन्द जयन्ती संगोष्ठी में उपभोक्ता फोरम कानपुर के अध्यक्ष न्यायविद डा0 आरएन सिंह ने कहा कि विश्व विख्यात सनातन धर्म की तथ्यपरक व तार्किक व्याख्या करके अन्य धर्मो के समानान्तर हिन्दू धर्म को मान्यता दिलाने वाले स्वामी विवेकानन्द इस धर्म के सर्वोत्कृष्ट प्रचारक थे और वह दीन दुखियों तथा दुर्बलों की सेवा को सबसे बडा धर्म मानते थे।
  कार्यक्रम संयोजक अनूप किशोर त्रिपाठी ने बताया कि पश्चिम बंगाल के एटार्नी जनरल के पुत्र नरेन्द्र नाथ ने भगवा वस्त्र धारण कर शिकागों के सर्वधर्म सम्मेलन में सनातन धर्म को विश्व पटल पर जो सम्मान दिलाया व अविस्मरणीय है। स्वामी जी ने ईश्वर की भक्ति के साथ राष्ट्रभक्ति को बराबर की मान्यता दी थी। वह जिस विषय पर उद्बोधन देते थे उसे निजी जीवन में परिलक्षित करते थे।

मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व बार एसो0 अध्यक्ष राम सेवक यादव व मुख्य वक्ता अवध बिहारी मिश्र के अलावा मंजू त्रिपाठी, कैलाश चन्द्र गुप्ता, अमरनाथ द्विवेदी, कमला दिवाकर , सोनी कश्यप, त्रिवेणी अवस्थी, किरन मिश्रा, संजय शर्मा, विवेक निगम आदि मौजूद रहे।

..प्रकाशकः श्याम सिंह पंवार
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