Friday, March 22, 2019
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शिक्षा

तनाव रहित जीवन जीने का नुस्खा- एम. अफसर खान ‘सागर’

पुस्तक – जीवन के अनसुलझे रहस्य की खोज
लेखक – मनीष
प्रकाशक – नोशन प्रेस, चेन्नई
कीमत – 199 रुपए
जिन्दगी की भाग दौड़ में इंसान भौतिक संसाधन जरूर हासिल कर रहा है मगर उसके जीवन से सकून गायब सा होने लगा है। तनाव रहित जीवन जीने के लिए लोग न जाने कितने तदबीर कर रहे हैं। ‘जीवन के अनसुलझे रहस्य की खोज’ पुस्तक के माध्यम से मनीष ने मेडिटेशन और योग को अपना कर तनाव रहित जीवन जीने की कला को बहुत फलसफाने अंदाज में बयान किया है। लेखक ने बतलाया है कि योग सही तरह से जीवन जीने का विज्ञान है। यह व्यक्ति के सभी पहलुओं पर काम करता है – भौतिक, मानसिक, भावनात्मक, आत्मिक और आध्यात्मिक। पुस्तक के माध्यम से लेखक ने लोगों को योग के गूढ़ रहस्यांे से परिचय कराया है। भारतीय रेल सेवा के अधिकारी मनीष ने अति दुरूह ध्यान प्रयोगों के माध्यम से उस रहस्य को जानने का कामयाब कोशिश किया है। लेखक ने तकरीबन पन्द्रह सालों तक विश्व के तमाम धर्मों के विभिन्न शाखओं का अध्ययन एवं समकालीन विचारकों के ग्रंथों का गहन अध्ययन एवं विशलेषण करने के पश्चात यह पुस्तक लिखा है। लेखक ने बतलाया है कि भारतीय दर्शन की नींव सत्य, प्रेम, अहिंसा एंव सर्व कल्याण को ध्यान में रखते हुए रखी गयी है। इस संस्कृति में सत्य को प्रतिपादित करते हुए मानव कल्याण की खातिर मनसा, वाचा, कर्मणा की अवधारणा को महत्व दिया गया है। लेखक बतलाता है कि हमारा सबका सुख सामूहिक सुख है, और दुःख है। भारतीय दर्शन में अध्यात्म मनुष्य के वास्तविक स्वरूप को जानने के साथ-साथ भौतिक जगत के सम्बंध को भी पहचाना है।

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विद्यालय में अभिव्यक्ति के मायने

जनवरी 2015 की एक सुबह, सूरज अपनी आग को शनैः-शनैः धधकाने कोशिश में था। सूरज का ताप ओढ़े हुए मैं अपनी बीआरसी नरैनी अन्तर्गत पू0मा0वि0 बरेहण्डा गया। प्रार्थना सत्र पूरा हो चुका था और बच्चे कमरों में बैठें या बाहर, शिक्षक और बच्चे यह तय कर रहे थे। यहां पहले भी जाना होता रहा है तो बच्चे खूब परिचित थे। पहुँचते ही बच्चों ने घेर लिया। सबकी चाह थी कि पहले मैं उनकी कक्षा में चलूँ। कोई हाथ पकडे था तो कोई बैग। मैंने सभी कक्षाओं में आने की बात कही लेकिन असल लड़ाई तो बस यही थी कि मैं पहले किनकी कक्षा में चलूँगा। खैर, मेरी काफी मान-मनौव्वल के बाद कक्षा 8 से मेरी यात्रा प्रारम्भ हुई। बाहर धूप में ही बच्चे बैठे थे। बातचीत शुरु ही हुई थी कि कक्षा 7 के बच्चे भी वहीं आ डटे। त्योहार और शीत लहर के कारण लगभग एक पखवारे की लम्बी छुट्टियों के बाद हम लोग मिल रहे थे। पिछले एक-डेढ़ महीने के अपने अनुभव बच्चों ने साझा किए। परस्पर खेले गये विभिन्न प्रकार के खेलों की चर्चा, घर में बने पकवानों की चर्चा, खेत-खलिहान की बातें, मकर संक्रान्ति पर पड़ोस के गाँव ‘बल्लान’ में लगने वाले ‘चम्भू बाबा का मेला‘ की खटमिट्ठी बातें। गुड़ की जलेबी, नमकीन और मीठे सेव, गन्ना (ऊख), झूला मे झूलने की साहस और डर भरी बातों के साथ साथ नाते-रिश्तेदारों की बातें, दादी और नानी की किस्सा-कहानी की बातें, गोरसी में कण्डे की आग में मीठी शकरकन्द भूनकर खाने की स्वाद भरी बातें और न जाने क्या क्या, हां, थोडा बहुत पढ़ने की बातें भी। बातें पूरी हो चुकने के बाद (हालांकि बच्चों की बातें कभी पूरी होती नहीं) ‘‘चकमक‘‘ के दिसम्बर अंक में विद्यालय के कक्षा 8 के बच्चों के छपे गुब्बारे वाले प्रयोग पर विचार-विमर्श हुआ। आगामी मार्च अंक के ज्यामितीय प्रयोग पर अभ्यास हुआ। ‘‘खोजें और जानें‘‘ के पिछले अंक में कवर पर छपे यहाँ की ‘बाल संसद‘ के चित्र पर भी बच्चों ने अपने और अपने माता पिता के अनुभव बताये। स्कूल की दीवार पत्रिका के आगामी अंक के कलेवर पर संपादक मण्डल के साथ बातें करके मुद्दे तय हुए। यह भी निर्णय हुआ कि अब हर अंक पर एक साक्षात्कार अवश्य छापा जायेगा। मनोज और केशकली मिलकर अपने गांव के मिट्टी के बर्तन बनाने वाले का साक्षात्कार लेंगे। साक्षात्कार क्या है और क्यों? साक्षात्कार कैसे लें, क्या और कैसे बातें करें किन मुद्दों पर किस-किस तरह से प्रश्न किया जा सकता है। मिल रहे उत्तर से प्रश्न कैसे पकड़ें आदि बिन्दुओं पर थोड़ी बातें हुईं। थोड़ी ही देर में वे दोनों बच्चे 10-12 प्रश्नों की एक प्रश्नावली तैयार कर लाये। वास्तव में प्रश्न चुटीले थे और उनसे कुम्हारगीरी का पूरा चित्र उभरने वाला था। मुझे बेहद खुशी हुई। कौन कहता कि सरकारी विद्यालयों में प्रतिभाएं नहीं है, कोई सोच नही है। उन्हें ऐसे बच्चों से मिलना चाहिए। अभ्यास के तौर पर कक्षा में ही दोनों बच्चों ने मेरा साक्षात्कार लिया।

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स्कूल जाने की खुशी में रात भर जागता रहा-प्रमोद दीक्षित ‘मलय‘

बात 1988 की है। मेरी इंटरमीडिएट की परीक्षाएं समाप्त हो चुकी थीं और मैं बेसब्री से रिजल्ट की प्रतीक्षा कर रहा था। जून के मध्य में परिणाम आ गया। उस जमाने में आज के जैसी नेट की कोई सुविधा नहीं हुआ करती थी। परीक्षा परिणाम अखबारों के विशेष संस्करण में छपा करते थे। और दूसरे दिन देखने को मिला करते थे। रिजल्ट देखा, द्वितीय श्रेणी में उत्तीर्ण हुआ था, मुहल्ले के कुछ सहपाठी फेल हो गये थे और कालेज का रिजल्ट भी द्वितीय श्रेणी का था।। मुझे याद है, मेरी इस उपलब्धि पर भी घर और पास-पडोस में लड्डू बांटे गये थे। जुलाई आया और बी.ए. में स्थानीय महाविद्यालय में प्रवेश ले लिया था। एक दिन बस ऐसे पिता जी ने पूछ लिया था कि मुझे आगे क्या करना है। मेरा उत्तर उन्हें खुश कर गया था क्योंकि मैंने परिवार की शिक्षकीय परम्परा को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया था। मैंने कहा था,‘‘ मुझे सरकारी प्राईमरी स्कूल में शिक्षक बनना है। और अभी जल्दी बीटीसी प्रशिक्षण के लिए आवेदन हेतु विज्ञापन आने वाला है, मैं फाॅर्म डाल दूंगा।‘‘ ध्यान देना होगा कि उस समय प्राइमरी शिक्षक को बहुत कम वेतन मिलता था और बहुत कम बच्चे प्राथमिक शिक्षा में एक शिक्षक के रूप में जाना चाहते थे।

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‘शैक्षिक संवाद मंच’ की मासिक बैठक सम्पन्न

शिक्षक नियमित डायरी लिख कर अनुभवों को दर्ज करें: प्रमोद दीक्षित ‘मलय’
शैक्षिक साहित्य पढ़ने हेतु लघु पुस्तकालय बनाने का लिया गया निर्णय
बांदा, जन सामना ब्यूरो।‘‘शैक्षिक संवाद मंच’’ बांदा की मासिक बैठक सह कार्यशाला गत दिवस प्रा.वि. अतर्रा प्राचीन, अतर्रा में सम्पन्न हुई। बैठक का प्रारम्भ प्रमोद दीक्षित द्वारा प्रस्तुत चेतना गीत ‘जीवन में कुछ करना है तो मन को मारे मत बैठो’ के सामूहिक गायन से हुआ। परस्पर परिचय के बाद मंच के संस्थापक प्रमोद दीक्षित ‘मलय’ ने कहा कि शिक्षकों के लिए डायरी लेखन बहुत जरूरी है। हमारे विद्यालयों में कक्षा एवं कक्षा के बाहर तमाम रचनात्मक गतिविधियां आयोजित होती हैं। कुछ अनायास घटित हो जाता है जो महत्वपूर्ण होता है। ऐसे सभी अनुभवों को लिखना चाहिए ताकि भविष्य में काम आ सकें। मंच की ओर से शिक्षकों के अनुभवों को शामिल करके एक डायरी प्रकाशित की जायेगी। इस अवसर पर शिक्षकों द्वारा अपने डायरी-अंश पढे गये। शैक्षिक नेतृत्व एवं विद्यालय प्रबंधन अन्तर्गत पिछली बैठक में हुई चर्चा पर आधारित तीन समूहों द्वारा पोस्टर तैयार कर प्रस्तुतीकरण किया गया जिसमें एक अच्छे नेतृत्वकर्ता के गुणों को अंकित किया गया।

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शिक्षा का अधिकार,मौलिक अधिकार है-शिवकुमारी

हाथरस, नीरज चक्रपाणि। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वाधान में विधिक सेवा दिवस के अवसर पर एम.एल.डी.वी. इण्टर कालेज में विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव श्रीमती शिव कुमारी की अध्यक्षता में किया गया।शिविर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव ने छात्र,  छात्राओं तथा जनता को शिक्षा का अधिकार, मौलिक अधिकारों तथा प्राधिकरण के उद्देश्यों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शिक्षा के  अधिकार को मौलिक अधिकार बनाया गया। किसी भी कार्य को करने के लिये जानकारी होना आवश्यक है तभी हम योजनाओं का लाभ उठा सकते है। सरकार द्वारा 6 वर्ष से 14 वर्ष तक के बच्चों को निःशुल्क शिक्षा का अधिकार दिया गया है। सचिव ने कहा कि पढ़ने के लिये कोई उम्र निर्धारित नहीं होती है। उन्होंने कहा कि 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों द्वारा यदि कोई अपराध किया जाता है किशोर न्याय  अधिनियम में उसे बाल अपचारी माना जाता है।

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चित्रा स्पोर्ट अकादमी में तीरंदाजी अकादमी का शुभारंभ

कानपुरः नीरज राजपूत। नौबस्ता स्थित चित्रा स्पोर्ट्स एकेडमी में तीरंदाजी का शुभारंभ चित्रा डिग्री कॉलेज के चेयरमैन सुरेश कुमार सचान द्वारा किया गया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के द्वारा विजेता बच्चों को पुरस्कार प्रदान किया गया। लगभग 300 बच्चों ने कैंप में भाग लिया। बताया गया कि प्रमुख कोच संदीप कुमार यूथ आर्चरी अकादमी एवं सहयोगियों के साथ बच्चों को नवीन अकादमी में प्रशिक्षण देंगे। इस अवसर पर प्रमुख रूप से कमलेश कटियार, जितेन्द्र कुमार, संदीप गुप्ता, वीर यादव, ब्रजवीर सिंह, जितेंद्र कटियार, अजीम अहमद, राजा भरत अवस्थी, कुलजीत कौर, अनिल पटेल उपस्थित रहे।

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आई. आई. टी. खड़गपुर का वार्षिक प्रौद्योगिक-प्रबंधन संगोष्ठी 18 जनवरी से

खडगपुरः जन सामना ब्यूरो। क्षितिज, आई. आई. टी. खड़गपुर का वार्षिक प्रौद्योगिक-प्रबंधन संगोष्ठी, अपनी अद्वितीय महिमा, बेजोड़ प्रतिभा एवं सवीश्रेष्ठन ज्ञान से परिपूर्ण प्रतियोगिताओं के लिए लोकप्रिय है। अगले वर्ष यह 18 जनवरी से 20 जनवरी तक आयोजित होगी। 2004 में स्थापित होने के बाद से क्षितिज निरंतर ऊचाइयों को छूता जा रहा है और अभी यह एशिया की सबसे बड़ी प्रौद्योगिक-प्रबंधन संगोष्ठी है। क्षितिज का प्रभुत्व इसके UNESCO, SAYEN, CEE से प्राप्त संरक्षण से साबित होता है, इस संगोष्ठी के बारे में संक्षेप में कहें तो प्रतियोगिताएं, अतिथि व्याख्यान, कार्यशालाएं और प्रदर्शनियां होती हैंद्य क्षितिज के पिछले संस्करणों पर नजर डालें तो इसकी प्रतियोगिताएं प्रतिष्ठित संस्थानों द्वारा प्रमाणित होती हैं जैसे ASME, IMechE, IEEE, ACM इत्यादि। साथ ही ऑनलाइन प्रतियोगिताएं भी होती हैं जो क्षितिज से काफी पहले शुरू हो जाती हैं। इनके साथ ही क्षितिज हर साल कई नामी हस्तियों को आमंत्रित करता है जो की छात्रों के साथ अपनी उपलब्धियों और अनुभवों के बारे में बात करते हैं।

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पुस्तक ‘मंत्राज फॉर लाइफ’ का विमोचन नेशनल बुक फेयर के साँस्कृतिक पाण्डाल में सम्पन्न

प्रख्यात साहित्यकार प. हरि ओम शर्मा ‘हरि’ की 16वीं पुस्तक ‘मंत्राज फाॅर लाईफ’ का भव्य विमोचन
जीवन जीने का नया अंदाज सिखाती है पुस्तक ‘मंत्राज फॉर लाइफ’
लखनऊ, जन सामना ब्यूरो। हिन्दी साहित्य जगत के सशक्त हस्ताक्षर पं. हरि ओम शर्मा ‘हरि’ की 16वीं पुस्तक ‘मंत्राज फाॅर लाईफ’ का विमोचन आज मोती महल वाटिका में चल रहे नेशनल बुक फेयर के साँस्कृतिक पाण्डाल में सम्पन्न हुआ। मुख्य अतिथि डा. जगदीश गाँधी, प्रख्यात शिक्षाविद् एवं समाजसेवी, एवं मंचासीन विशिष्ट हस्तियों ने पुस्तक ‘मंत्राज फाॅर लाईफ’ का विमोचन किया जबकि समारोह की अध्यक्षता प्रख्यात कवियत्री श्रीमती रमा आर्य ‘रमा’ ने की। इस अवसर पर लेखकों, कवियों, प्रशासनिक अधिकारियों, पत्रकारों, शिक्षाविदों आदि की जोरदार उपस्थिति ने समारोह को यादगार बना दिया।

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कम्युनिकेशन कैसे करें…?

क्रेडिट रोल-सरश्री तेजपारखी ‘तेजज्ञान फाउंडेशन’
व्यक्तिगत जीवन हो या सामाजिक, ऑफिस हो या घर, स्वयं के साथ हो या दूसरों के साथ, सभी जगहों पर दिखनेवाली एक कॉमन समस्या है, ‘मिस कम्युनिकेशन’ यानी गलत तरीके से संवाद करना।
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि कम्युनिकेशन का क्या मतलब है? बातचीत के दौरान एक इंसान सामनेवाले को जो संदेश देना चाहता है, वह उसे मिल जाए और उससे अपेक्षित परिणाम प्राप्त हो तो वह सही कम्युनिकेशन है। जीवन के सभी क्षेत्रों में आज सही संप्रेषण (संवाद) न करने की समस्या दिखाई देती है। साधारणतः बातचीत के दौरान लोग बताना कुछ और चाहते हैं और सुननेवाला कुछ अलग ही समझता है। इसलिए कम्युनिकेशन का पहला एवं महत्वपूर्ण पहलू है- ‘पूरा और सही सुनना, न समझ में आए तो फिर से पूछना।’
पहला पायदान- कम्युनिकेशन का पहला पायदान है, ‘सुनना’। विचारों की भीड़ में खोया हुआ इंसान सही तरह से सुन नहीं पाता। साथ ही किसी से कम्युनिकेशन करते वक्त इंसान उसकी छवि अपने मन में बनाता है और उसके अनुसार सुनता है। इसलिए वह पूरा नहीं बल्कि अपने विचारों के अनुसार जितना उसे आवश्यक लगता है, उतना ही सुनता है। सही कम्युनिकेशन न होने का यह पहला कारण है।
अपना कम्युनिकेशन सुधारने के लिए सामनेवाले की बातें वर्तमान में रहते हुए पूरी सुनें और उसमें अपने विचारों की मिलावट न करें। सही और उत्तम कम्युनिकेशन के लिए केवल बोलने की नहीं बल्कि दिल से सुनने की कला विकसित करें। वरना आधा सुनकर लोग अकसर कह देते हैं, ‘मैं समझ गया’ मगर वे नहीं समझे होते हैं। ऐसे वक्त हमें सामनेवाले से पूछ लेना चाहिए कि उसने क्या समझा। इसे कहा गया है सही और पूर्ण कम्युनिकेशन।

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विज्ञान मॉडल प्रदर्शनी का किया आयोजन

कानपुर,प्रियंका तिवारी: एसएन सेन बालिका विद्यालय इंटर कॉलेज के तत्वावधान में प्रधानाचार्य पुष्पा त्रिपाठी की अध्यक्षता में विज्ञान मॉडल प्रदर्शनी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जानकारी देते हुए पुष्पा त्रिपाठी ने बताया कि विज्ञान एवं कला प्रदर्शनी का आयोजन कॉलेज परिसर में किया गया जिसमें कक्षा 6 से 12 की छात्राओं द्वारा बनवाए गए मॉडलों की तीन समूह कक्षा 6 से 8 कक्षा 9 व 10 तथा कक्षा 11 व 12 में दिशावर प्रदर्शित किया गया। तीनों वर्गो व समूह हो समूहो की छात्राओं द्वारा उत्कृष्ट 200 मॉडलों व चाटू का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनी का उद्घाटन जिला विद्यालय निरीक्षक सतीश तिवारी के कर कमलों द्वारा किया गया। मुख्य अतिथि व अन्य अतिथियों का स्वागत छात्रों द्वारा स्वागत गीत द्वारा किया गया।

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