• नेता जी अब तुम्ही बताओ, अच्छे दिन कब आएंगे !

    विविधा

    आशीष तिवारी ‘जुगनू’ इंदौर

    नेता जी अब तुम्ही बताओ,
    अच्छे दिन कब आएंगे !

    ठेला, गुमटी रोज हटाते,
    हम सबकी फुटपाथों से !
    आप कहे तो गला घोट दूँ,
    अपने बच्चों की, हाथों से !

    बिना कमाई के बच्चे सब,
    जीते जी मर जाएंगे !
    नेता जी अब तुम्ही बताओ,
    अच्छे दिन कब आएंगे !

    कहते हो तुम बेच पकौड़ा,
    फिर करवाते निगम का दौड़ा !
    तोड़ फोड़ सामान छीनते,
    भर ले जाते मार हथौड़ा !

    हमी तलें घर बैठ पकौड़ा,
    और हमीं क्या खाएंगे ?
    नेता जी अब तुम्हीं बताओ,
    अच्छे दिन कब आएंगे !

    जब जी चाहा उड़ जाते हो,
    हम गरीब पर ध्यान नहीं !
    विजय माल्या, नीरव मोदी,
    के जैसा तो प्लान नहीं !! § Read_More....

  • “ प्रेम की चिड़िया ”

    विविधा

    बहुत छोटी सी कोई बात भी
    झकझोर देती है
    तो चिड़िया प्रेम की पल भर में
    जीना छोड़ देती है
    न जबरन बांधना इसको,
    संभलकर थामना इसको
    जरा सी चोट लग जाए
    तो ये दम तोड़ देती है l
    *** § Read_More....

  • विश्व चित्रगुप्त प्रकटोत्सव की तैयारियां आरम्भ

    मुख्य समाचार, विविधा

    औरैया, जन सामना ब्यूरो। विश्व चित्रगुप्त प्रकटोत्सव की तैयारियां आरम्भ हो गयीं हैं। भगवान चित्रगुप्त जी जो संसार के समस्त प्राणियों के चित्त में गुप्त रहकर उनका लेखा-जोखा रखते हैं। उनका अवतरण पर्व देश-विदेश में प्रतिवर्ष पूरे हर्षोल्लास के साथ चैत पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। इस वर्ष यह 31 मार्च को मनाया जायेगा। इस अवसर पर कहीं प्रभु की मनोरम झांकी निकलती है तो कहीं रथयात्रा, कहीं पूजा तो कहीं भण्डारा होता है। इस दिन लोग अपने घरों में दीप प्रज्वलित कर पूरे परिवार के साथ प्रभु चित्रगुप्त जी और कलम दवात का पूजा कर स्वागत कर खुशियां मनाते हैं। इस वर्ष इस महापर्व को भव्य बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय कायस्थ वाहिनी के प्रमुख पंकज भैया कायस्थ ने वाहिनी के समस्त पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को जुट जाने का आवाह्न किया है। § Read_More....

  • ठिठुरी धरती

    विविधा

    – कंचन पाठक कवियित्री, लेखिका

    ठिठुरी धरती ठिठुरा सा गगन
    तरु वल्लरी भी स्तब्ध गहन
    थर-थर काँपे गिरि वन नदिया
    किसी विधि नहीं हो ये ठंढ वहन
    भूली बुलबुल कुजन किल्लोल
    किसने दी ऋतू में बरफ घोल।
    कलि क्लांत सुकोमल खिल न सकी
    दुपहर तक रवि से मिल न सकी
    बिरहा की सर्द शिथिलता में
    रुक-रुक बरबस लेती सिसकी
    मौसम पर सिहरन को जड़ कर
    अदृश्य हुई रवि रश्मि लोल ।
    किसने दी ऋतू में बरफ घोल ।।
    दलकाता एक एक तन्तु को
    यह शीत लहर हर जन्तु को
    कम्बल में भी घुस घुस जाता
    भरमा कर किन्तु परन्तु को
    लम्बी पारी निशिपति खेले
    दिनमान धरे पग नाप तौल ।
    किसने दी ऋतू में बरफ घोल ।
    प्रभु अग्निदेव तुम धन्य धन्य
    तुम सा नहीं प्रियकर कोई अन्य
    हर ओर शिशिर की मनमानी
    दसों दिशा प्रकम्पित शीत जन्य
    एक तुम हीं अपनी कुनकुन से
    देते पुलकन के द्वार खोल ।
    किसने दी ऋतू में बरफ घोल ।। § Read_More....

  • गजलः आपको देख कर…

    विविधा

    संजय कुमार गिरि

    आपको देख कर मुस्कुराते रहे
    गीत गजलें सभी गुनगुनाते रहे
    प्रेम से वास्ता इस कदर हो गया
    दुश्मनी को भीश् दिल से भुलाते रहे
    छोड़ कर हर बुरा ऐब हम तो यहाँ
    राह के कंटको को हटाते रहे
    डाल कर हाथ में हाथ अपना सनम
    हाल दिल का तुम्हें हम सुनाते रहे
    कर दिया आज झूठा हमी को यहाँ
    हम गमों से जिन्हें ही बचाते रहे
    बात दिल की कहूँ आपसे अब सुनो
    रात भर वो हमें ही रुलाते रहे § Read_More....

  • हाहाकार: पैसा पावर और जुगाड़

    विविधा

     

    -आकांक्षा सक्सेना

    हो, ब्यूटी, टैलेन्ट तो क्या हो बात
    फिर जो बटरिंग कर जाये बेमिशाल….!
    बस उसकी किस्मत उसका राज्य….
    आज कलयुग की है यही डिमाण्ड….!
    आँसुओं का भी हो रहा व्यापार
    पाप की गठरी बस जिन्दाबाद….!
    जनता शोषित बदहाल पड़ी
    उनको तो बस वोट की पड़ी….!
    भैंस भी लाठी बन गयी आज
    न्याय-नैतिकता हुई गुमनाम
    असत्य के साथ चार बाॅडीगार्ड….!
    कोई नही सुनता फरियाद
    गरीब की आस बस भगवान…..!
    सब जानकर बनते अनजान
    चारों तरफ आज हाहाकार…..! § Read_More....

  • कहानीः आवारा

    विविधा

    एम. अफसर खान सागर

    शाम के आठ बज रहे थे, मोबाइल ने घन-घनाना शुरू किया तो रीमा ने करवट बदल कर देखा कि फिर वही नम्बर। पहले तो उसने काल रिसीव नहीं करना चाहा मगर रिंग पर रिंग बजा जा रहा था तो उसने अचानक काल रिसीव कर कहा ‘तुमसा आवारा लड़का मैंने अपने जीवन में नहीं सोचा था’ और काल डिसकनेक्ट हो गया। इतना सुनना था कि फोन करने वाला सन रह गया, मानो उसे सांप ने डस लिया हो। पिछले चार साल के सम्बन्ध में उसने रिंग तो कितनी बार किया होगा मगर शुरूवाती जाड़े की वह शाम उसके लिए तपती गर्मी के झोंकों से कम न था। उस शाम चार साल पहले तक समीर की जिन्दगी विरान सहरा में उड़ते रेत की मानिंद भटक रही थी। कब शाम और कब सुबह होती उसको इसका इल्म न रहता। जिन्दगी की रंगीनियों और प्यार की बारीकियों के बारे में उसने कभी सोचा भी होगा, ऐसा उसे नहीं लगता। बस एक लिखने का धुन सवार रहता उस पर और वह उस धुन में अक्सर बुझा रहता। वक्त की रेत पर जिन्दगी धीरे-धीरे कट रही थी। तभी एक दिन समीर के खास दोस्त की मोबाइल का रिंग बजा। रिसीव करने पर आवाज आयी, हैलो….. आप कौन, चूंकि नम्बर अंजान था सो उसने काल करने वाले से यह सवाल पूछा। उत्तर था, आप से ही बात करनी थी। इतना सुनना था कि दोस्त ने जवाब दिया कि मैं अंजान लोगों से बात नहीं करता और फोन काट दिया। रात बीती सुबह हुआ फिर आयी वो शाम जिसने समीर की जिन्दगी में ऐसा भूचाल पैदा किया कि वह उसे याद कर आज भी यादों की सफर पर चला जाता है। शाम के सात बज रहे थे, बाजार से होता हुआ समीर घर की जानिब मुखातिब हुआ ही होगा कि उसके मोबाइल पर डाइवर्ट काल आया। हैलो… हैलो, काफी नाजुक व मखमली आवाज। आप कौन, ऐसा आवाज कि जिसे सुन कर कोई भी नाम बताने से गुरेज न करे। सो समीर ने जवाब दिया…. समीर कहते हैं लोग। इतना सुनना था कि काल डिसकनेक्ट हो गया। उस मखमली आवाज ने समीर को पूरी रात बेचैन रखा। रात भर वह सोचता रहा, कौन… कहाँ से…. क्यों ? फिर दूसरे दिन उसी नम्बर से काल आया। आप कौन, समीर ने बस यही पूछा था उससे।
    जवाब भी उसने समीर की अन्दाज में ही दिया, रीमा कहते हैं लोग और फिर फोन कट गया। फिर जो सिलसिला चालू हुआ वो दरिया की रवानी की तरह बहता रहा। बीच-बीच में मौजों ने जरूर कभी-कभार हिचकोले लिये होंगे मगर रवानी में कमी न आयी। रोज शाम के वक्त समीर के मोबाइल पर उसी नम्बर से काल और मिसकाल आता रहा। फिर शुरू हुआ बातों का ऐसा दौर जिसने दोनों को एक अन्जान रिश्ते में कैद कर दिया। § Read_More....

  • लोगों का फेवरेट शो बना ‘क्या हाल मि. पांचाल’ और फेवरेट कॉमेडियन स्टार बने मि. राहुल सिंह

    मनोरंजन, मुख्य समाचार, युवा जगत, विविधा

    सेलेब टाकः हास्य अभिनेता राहुल सिंह
    खेतों से टीवी तक का सफर
    जमुई से मुम्बई तक बजा हास्य का डंका
    नमस्ते दोस्तों,
    आइये आपको रूबरू कराते हैं बिना इंजेक्शन वाले डाक्टर जोकि दवा के रूप में मुस्कॉन बाँट कर देश – दुनियाँ के लोगों का तनाव दूर कर रहे हैं। जो हैं, टीवी सीरियल की दुनियाँ की जानी-मानी शख्शियत राहुल सिंह जी से। जो स्टार भारत टीवी चैनल पर सोमवार से शुक्रवार रात 8 बजे अपने नये और खूबसूरत कॉन्सेप्ट के साथ आपके बीच आपको गुदगुदाने के लिये एक बेहतरीन कहानी क्या हाल मि. पांचाल सीरियल के जरिये आपके दिलों में उतरने के लिये पूरी ईमानदारी से अहम किरदार के साथ दस्तक दे रहे हैं।
    देश के लाफ्टर ऐक्सप्रेस के विनर, हास्यरत्न, मनोरंजन के महारथी, कॉमेडी किंग, बहुमुखी प्रतिभा के धनी, बेमिशाल बेदाग सच्ची शख्शियत, सम्मानीय व्यक्तित्व राहुल जी से बातचीत के कुछ अंशः
    आकांक्षा- नमस्ते सर।
    राहुल- नमस्ते आकांक्षा
    आकांक्षा – आपका पूरा नाम सर ?
    जवाब- मेरा नाम राहुल सिंह हैं।
    आकांक्षा- आपका जन्म स्थान कहाँ है ? आपका इस फील्ड में क्या संघर्ष रहा ?
    राहुल- मेरा जन्म बिहार के जमुई जिला में हुआ। हमने पढ़ाई देवघर से की और पढ़ाई के साथ- साथ ऐक्टिंग भी करते रहे, बड़े स्टेज पर नही बल्कि खेतों में कभी अकेले घूमते हुये कभी दोस्तों के साथ खेलते हुये। कभी कुछ लोग हंसते भी थे पर धीरे-धीरे उन्हें समझ आया कि मैं तो सीरियस हूं तो वो सब समझने लगे और फिर दो से चार और चार से आठ लोग जुड़ते गये। फिर एक नाट्य संस्था बनाई और प्रोक्टिस जारी रही। मेरी फेमली की इच्छा से मेरा ऐडमिशन मेडीकल में हो रहा था पर हमने पूरे विश्वास से पापा जी से कहा मुझे तो मुम्बई जाना है। यह सुनकर वह चैकें और डरे कि वहाँ अपना कोई नही कहाँ रहेगा और कैसे क्या करेगा। फिर, मेरी ऊर्जा मेरी माँ ने उनको भी मना लिया और मुझे बहुत सपोर्ट किया और जब मैं मुम्बई पहुँचा तो यहाँ का नजारा इकदम अलग था। कुछ समझ नही आ रहा था क्या करूँ और कहाँ रहूँद्य फिर मुम्बई यूनीवर्सटी में एडमीशन लिया और हर छोटे-बड़े कॉलेज में जाकर प्रोग्राम किये फिर किशोर अमित कपूर ऐक्टिंग लैव ज्वाइन की। फिर, लाफ्टर एक्सप्रेस एज ए राइटर ज्वाइन किया। वहाँ के क्रिएटिव हैड ने मुझसे कहा, तुम भी हिस्सा लो और फिर, मैने पूरे आत्मविश्वास से भाग लिया और लाफ्टर एक्सप्रेस का विनर भी रहा।
    मैं कभी हतास नही हुआ और हर परिस्थिति में हमेशा ऐक्टिंग के जुनून को जगाये रखा।

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  • सताने को मुझे कुछ इस कदर बेताब है……

    विविधा

    अमिता दीक्षित, कानपुर

    सताने को मुझे कुछ इस कदर बेताब है ये दिल,
    निगाहें उनकी चिलमन पर लगाये आज बैठा है।
    ये उल्फत है दिल नादाँ, मेरा महबूब है जालिम,
    जलाने को मुझे, शम्मा जलाये आज बैठा है।
    मेरी हर एक धड़कन की सदा, उस ओर जाती है,
    वो जज़्बातों को बेदर्दी दबाये आज बैठा है।
    उम्मीदों के परों पर आसमाँ में उड़ रहा पंछी,
    तेरी राहों पे वो पलकें बिछाये आज बैठा है।
    उसी के तीर है दिल पर, वही हमदर्द है मेरा,
    कि जख्मों पर मेरे मरहम लगाये आज बैठा है।
    मोहब्बत की उमर क्या है मेरे दिल से ये न पूछो,
    कि सूने घर में एक दीपक जलाए आज बैठा है।
    ना सुनता है किसी की ये बड़ा मगरूर आशिक है,
    तेरी चौखट पे सर अपना झुकाये आज बैठा है।

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  • हिंदी पखवाड़े के उपलक्ष्य में अखिल भारतीय साहित्य गोष्ठी

    विविधा

    संजय कुमार गिरि, बाहरी दिल्ली। भारतीय विकास समिति दिल्ली प्रदेश (रजि.) एवम नवधारा साहित्य कला केंद्र के संयोजन से हिंदी पखवाड़े के उपलक्ष्य में कल शाम सुल्तान पुरी, बाहरी दिल्ली में अखिल भारतीय साहित्य गोष्ठी का आयोजन किया गया, इस सुन्दर आयोजन की अध्यक्षता उस्ताद हिन्दुस्तान के जाने माने शायर देवेंद्र माँझी और वरिष्ठ अतिथि गीतकार जयसिंह आर्य रहे। माँ शारदे के चित्र के समक्ष दीप प्रज्व्व्लित करने के उपरान्त गोष्ठी का प्रारम्भ किया गया, ग़ज़लकार दुर्गेश अवस्थी के संचालन में आगरा से इंद्रपाल ‘इन्द्र’, बुलंदशहर यू.पी.से यूसुफ सहराई एवं ऐन मीन कौसर, गुड़गांव से राजीव परासर, कुरुक्षेत्र हरियाणा से दीपक मासूम, मनजीत, बिजनौर से बुनियादी भारती, दिल्ली से  § Read_More....

..प्रकाशकः श्याम सिंह पंवार
कार्यालयः 804, वरुण विहार थाना-बर्रा जिला-कानपुर-27 (उ0 प्र0) भारत
सम्पर्क सूत्रः 09455970804
jansaamna@gmail.com ..

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