• गजलः आपको देख कर…

    विविधा

    संजय कुमार गिरि

    आपको देख कर मुस्कुराते रहे
    गीत गजलें सभी गुनगुनाते रहे
    प्रेम से वास्ता इस कदर हो गया
    दुश्मनी को भीश् दिल से भुलाते रहे
    छोड़ कर हर बुरा ऐब हम तो यहाँ
    राह के कंटको को हटाते रहे
    डाल कर हाथ में हाथ अपना सनम
    हाल दिल का तुम्हें हम सुनाते रहे
    कर दिया आज झूठा हमी को यहाँ
    हम गमों से जिन्हें ही बचाते रहे
    बात दिल की कहूँ आपसे अब सुनो
    रात भर वो हमें ही रुलाते रहे § Read_More....

  • हाहाकार: पैसा पावर और जुगाड़

    विविधा

     

    -आकांक्षा सक्सेना

    हो, ब्यूटी, टैलेन्ट तो क्या हो बात
    फिर जो बटरिंग कर जाये बेमिशाल….!
    बस उसकी किस्मत उसका राज्य….
    आज कलयुग की है यही डिमाण्ड….!
    आँसुओं का भी हो रहा व्यापार
    पाप की गठरी बस जिन्दाबाद….!
    जनता शोषित बदहाल पड़ी
    उनको तो बस वोट की पड़ी….!
    भैंस भी लाठी बन गयी आज
    न्याय-नैतिकता हुई गुमनाम
    असत्य के साथ चार बाॅडीगार्ड….!
    कोई नही सुनता फरियाद
    गरीब की आस बस भगवान…..!
    सब जानकर बनते अनजान
    चारों तरफ आज हाहाकार…..! § Read_More....

  • कहानीः आवारा

    विविधा

    एम. अफसर खान सागर

    शाम के आठ बज रहे थे, मोबाइल ने घन-घनाना शुरू किया तो रीमा ने करवट बदल कर देखा कि फिर वही नम्बर। पहले तो उसने काल रिसीव नहीं करना चाहा मगर रिंग पर रिंग बजा जा रहा था तो उसने अचानक काल रिसीव कर कहा ‘तुमसा आवारा लड़का मैंने अपने जीवन में नहीं सोचा था’ और काल डिसकनेक्ट हो गया। इतना सुनना था कि फोन करने वाला सन रह गया, मानो उसे सांप ने डस लिया हो। पिछले चार साल के सम्बन्ध में उसने रिंग तो कितनी बार किया होगा मगर शुरूवाती जाड़े की वह शाम उसके लिए तपती गर्मी के झोंकों से कम न था। उस शाम चार साल पहले तक समीर की जिन्दगी विरान सहरा में उड़ते रेत की मानिंद भटक रही थी। कब शाम और कब सुबह होती उसको इसका इल्म न रहता। जिन्दगी की रंगीनियों और प्यार की बारीकियों के बारे में उसने कभी सोचा भी होगा, ऐसा उसे नहीं लगता। बस एक लिखने का धुन सवार रहता उस पर और वह उस धुन में अक्सर बुझा रहता। वक्त की रेत पर जिन्दगी धीरे-धीरे कट रही थी। तभी एक दिन समीर के खास दोस्त की मोबाइल का रिंग बजा। रिसीव करने पर आवाज आयी, हैलो….. आप कौन, चूंकि नम्बर अंजान था सो उसने काल करने वाले से यह सवाल पूछा। उत्तर था, आप से ही बात करनी थी। इतना सुनना था कि दोस्त ने जवाब दिया कि मैं अंजान लोगों से बात नहीं करता और फोन काट दिया। रात बीती सुबह हुआ फिर आयी वो शाम जिसने समीर की जिन्दगी में ऐसा भूचाल पैदा किया कि वह उसे याद कर आज भी यादों की सफर पर चला जाता है। शाम के सात बज रहे थे, बाजार से होता हुआ समीर घर की जानिब मुखातिब हुआ ही होगा कि उसके मोबाइल पर डाइवर्ट काल आया। हैलो… हैलो, काफी नाजुक व मखमली आवाज। आप कौन, ऐसा आवाज कि जिसे सुन कर कोई भी नाम बताने से गुरेज न करे। सो समीर ने जवाब दिया…. समीर कहते हैं लोग। इतना सुनना था कि काल डिसकनेक्ट हो गया। उस मखमली आवाज ने समीर को पूरी रात बेचैन रखा। रात भर वह सोचता रहा, कौन… कहाँ से…. क्यों ? फिर दूसरे दिन उसी नम्बर से काल आया। आप कौन, समीर ने बस यही पूछा था उससे।
    जवाब भी उसने समीर की अन्दाज में ही दिया, रीमा कहते हैं लोग और फिर फोन कट गया। फिर जो सिलसिला चालू हुआ वो दरिया की रवानी की तरह बहता रहा। बीच-बीच में मौजों ने जरूर कभी-कभार हिचकोले लिये होंगे मगर रवानी में कमी न आयी। रोज शाम के वक्त समीर के मोबाइल पर उसी नम्बर से काल और मिसकाल आता रहा। फिर शुरू हुआ बातों का ऐसा दौर जिसने दोनों को एक अन्जान रिश्ते में कैद कर दिया। § Read_More....

  • लोगों का फेवरेट शो बना ‘क्या हाल मि. पांचाल’ और फेवरेट कॉमेडियन स्टार बने मि. राहुल सिंह

    मनोरंजन, मुख्य समाचार, युवा जगत, विविधा

    सेलेब टाकः हास्य अभिनेता राहुल सिंह
    खेतों से टीवी तक का सफर
    जमुई से मुम्बई तक बजा हास्य का डंका
    नमस्ते दोस्तों,
    आइये आपको रूबरू कराते हैं बिना इंजेक्शन वाले डाक्टर जोकि दवा के रूप में मुस्कॉन बाँट कर देश – दुनियाँ के लोगों का तनाव दूर कर रहे हैं। जो हैं, टीवी सीरियल की दुनियाँ की जानी-मानी शख्शियत राहुल सिंह जी से। जो स्टार भारत टीवी चैनल पर सोमवार से शुक्रवार रात 8 बजे अपने नये और खूबसूरत कॉन्सेप्ट के साथ आपके बीच आपको गुदगुदाने के लिये एक बेहतरीन कहानी क्या हाल मि. पांचाल सीरियल के जरिये आपके दिलों में उतरने के लिये पूरी ईमानदारी से अहम किरदार के साथ दस्तक दे रहे हैं।
    देश के लाफ्टर ऐक्सप्रेस के विनर, हास्यरत्न, मनोरंजन के महारथी, कॉमेडी किंग, बहुमुखी प्रतिभा के धनी, बेमिशाल बेदाग सच्ची शख्शियत, सम्मानीय व्यक्तित्व राहुल जी से बातचीत के कुछ अंशः
    आकांक्षा- नमस्ते सर।
    राहुल- नमस्ते आकांक्षा
    आकांक्षा – आपका पूरा नाम सर ?
    जवाब- मेरा नाम राहुल सिंह हैं।
    आकांक्षा- आपका जन्म स्थान कहाँ है ? आपका इस फील्ड में क्या संघर्ष रहा ?
    राहुल- मेरा जन्म बिहार के जमुई जिला में हुआ। हमने पढ़ाई देवघर से की और पढ़ाई के साथ- साथ ऐक्टिंग भी करते रहे, बड़े स्टेज पर नही बल्कि खेतों में कभी अकेले घूमते हुये कभी दोस्तों के साथ खेलते हुये। कभी कुछ लोग हंसते भी थे पर धीरे-धीरे उन्हें समझ आया कि मैं तो सीरियस हूं तो वो सब समझने लगे और फिर दो से चार और चार से आठ लोग जुड़ते गये। फिर एक नाट्य संस्था बनाई और प्रोक्टिस जारी रही। मेरी फेमली की इच्छा से मेरा ऐडमिशन मेडीकल में हो रहा था पर हमने पूरे विश्वास से पापा जी से कहा मुझे तो मुम्बई जाना है। यह सुनकर वह चैकें और डरे कि वहाँ अपना कोई नही कहाँ रहेगा और कैसे क्या करेगा। फिर, मेरी ऊर्जा मेरी माँ ने उनको भी मना लिया और मुझे बहुत सपोर्ट किया और जब मैं मुम्बई पहुँचा तो यहाँ का नजारा इकदम अलग था। कुछ समझ नही आ रहा था क्या करूँ और कहाँ रहूँद्य फिर मुम्बई यूनीवर्सटी में एडमीशन लिया और हर छोटे-बड़े कॉलेज में जाकर प्रोग्राम किये फिर किशोर अमित कपूर ऐक्टिंग लैव ज्वाइन की। फिर, लाफ्टर एक्सप्रेस एज ए राइटर ज्वाइन किया। वहाँ के क्रिएटिव हैड ने मुझसे कहा, तुम भी हिस्सा लो और फिर, मैने पूरे आत्मविश्वास से भाग लिया और लाफ्टर एक्सप्रेस का विनर भी रहा।
    मैं कभी हतास नही हुआ और हर परिस्थिति में हमेशा ऐक्टिंग के जुनून को जगाये रखा।

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  • सताने को मुझे कुछ इस कदर बेताब है……

    विविधा

    अमिता दीक्षित, कानपुर

    सताने को मुझे कुछ इस कदर बेताब है ये दिल,
    निगाहें उनकी चिलमन पर लगाये आज बैठा है।
    ये उल्फत है दिल नादाँ, मेरा महबूब है जालिम,
    जलाने को मुझे, शम्मा जलाये आज बैठा है।
    मेरी हर एक धड़कन की सदा, उस ओर जाती है,
    वो जज़्बातों को बेदर्दी दबाये आज बैठा है।
    उम्मीदों के परों पर आसमाँ में उड़ रहा पंछी,
    तेरी राहों पे वो पलकें बिछाये आज बैठा है।
    उसी के तीर है दिल पर, वही हमदर्द है मेरा,
    कि जख्मों पर मेरे मरहम लगाये आज बैठा है।
    मोहब्बत की उमर क्या है मेरे दिल से ये न पूछो,
    कि सूने घर में एक दीपक जलाए आज बैठा है।
    ना सुनता है किसी की ये बड़ा मगरूर आशिक है,
    तेरी चौखट पे सर अपना झुकाये आज बैठा है।

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  • हिंदी पखवाड़े के उपलक्ष्य में अखिल भारतीय साहित्य गोष्ठी

    विविधा

    संजय कुमार गिरि, बाहरी दिल्ली। भारतीय विकास समिति दिल्ली प्रदेश (रजि.) एवम नवधारा साहित्य कला केंद्र के संयोजन से हिंदी पखवाड़े के उपलक्ष्य में कल शाम सुल्तान पुरी, बाहरी दिल्ली में अखिल भारतीय साहित्य गोष्ठी का आयोजन किया गया, इस सुन्दर आयोजन की अध्यक्षता उस्ताद हिन्दुस्तान के जाने माने शायर देवेंद्र माँझी और वरिष्ठ अतिथि गीतकार जयसिंह आर्य रहे। माँ शारदे के चित्र के समक्ष दीप प्रज्व्व्लित करने के उपरान्त गोष्ठी का प्रारम्भ किया गया, ग़ज़लकार दुर्गेश अवस्थी के संचालन में आगरा से इंद्रपाल ‘इन्द्र’, बुलंदशहर यू.पी.से यूसुफ सहराई एवं ऐन मीन कौसर, गुड़गांव से राजीव परासर, कुरुक्षेत्र हरियाणा से दीपक मासूम, मनजीत, बिजनौर से बुनियादी भारती, दिल्ली से  § Read_More....

  • पर्पल पेन द्वारा ‘जश्न ए अल्फाज’ का आयोजन किया गया

    मुख्य समाचार, विविधा

    2017.09.18.03. SSP. pupleनई दिल्ली, जन सामना ब्यूरो। साहित्यिक ग्रुप पर्पल पेन ने अपना द्वितीय वार्षिक उत्सव का शानदार आयोजन कल शाम विष्णु दिगम्बर मार्ग, हिंदी भवन में आयोजित किया गया। जिसमें पंजाब शिरोमणि विश्वविख्यात गजलकार राजेंद्र नाथ रहबर मुख्य अतिथि के रूप में एवं आकाशवाणी के पूर्व महानिदेशक एवं प्रख्यात साहित्यकार लक्ष्मीशंकर वाजपयी एवं मशहूर शायर मलिकजादा जावेद विशिष्ट अतिथि रहे। माँ शारदे के चित्र के सम्मुख अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित करने के उपरांत कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ।
    कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों को मोतियों की माला एवं अंगवस्त्र पहनाकर व पुष्प गुच्छ भेंट कर संस्था की संस्थापिका वसुधा कनुप्रिया ने सम्मानित किया । समूह में विशेष सक्रियता एवं साहित्यिक योगदान के लिए ष्साहित्य सेवी सम्मानष् से सम्मानित रचनाकारों में सुश्री नीलोफर नीलू, वंदना गोयल, इंदिरा शर्मा रहे तथा साहित्यिक एवं मीडिया क्षेत्र के माध्यम से प्रचार प्रसार के लिए साहित्य साधक सम्मान वरिष्ठ कवि अशोक कश्यप (संस्थापक -नवांकुर साहित्य सभा), ओम प्रकाश शुक्ल (संस्थापक-युवा उत्कर्ष साहित्यिक मंच), विजय कुमार दिवाकर (विजय न्यूज) सैफुद्दीन सैफी (संपादक -लोक जंग) को प्रदान किया गया। इस सुअवसर पर संस्था द्वारा आयोजित सभी कार्यक्रमों में विशेष सहयोगिता के लिए दिनेश गोस्वामी जी को सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह के उपरांत काव्य की अविरल गंगा बही जिसमें दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, राजस्थान, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश से आये हुए लगभग 55 कवियों ने काव्यपाठ किया। § Read_More....

  • जीते जी प्यार दो थोड़ा…

    मुख्य समाचार, विविधा
    Kanchan Pathak

    Kanchan Pathak

    जीते जी प्यार दो थोड़ा सम्मान दो
    वक्त की करवटों पर पिघल जाएँगे
    कल चमकते सितारे भी ढल जाएँगे
    ये जो अट्टालिकाएँ हैं तनकर खड़ी
    खण्डहर में इमारत बदल जाएँगे
    आज कोई गया कल कोई जाएगा
    काल का चक्र है सबको आजमायेगा
    और ये पूजन, ये तर्पण, पितरपक्ष से
    ताप मरुथल का क्या सिक्त हो पाएगा
    बुझ गया जो अतृप्ति में जलकर दीया
    वह अँधेरा क्या फिर दीप्त हो पाएगा ?
    जल चढ़ाकर हो भक्ति किसे दे रहे
    पिंड तर्पण की मुक्ति किसे दे रहे § Read_More....

  • “स्वतंत्रता दिवस मात्र नहीं हम सबका अभिमान भी”

    विविधा
    kanchan pathak

    कंचन पाठक. कवियित्री, लेखिका

    यह स्वतंत्रता दिवस मात्र नहीं हम सबका अभिमान भी है
    देशप्रेमियों का गुरुर है राष्ट्र भक्ति की शान भी है
    आज न कोई शिकवा करना, करना नहीं लड़ाई
    दिल या पुरखों की भूमि हो आज न खींचो खाई
    जात धर्म का रोना धोना कर दो आज किनारे
    इन्सा बन कर एक दूजे को गले लगा लो प्यारे
    गौरव कर लो मातृभूमि पर अवसर है पैगाम भी है
    संवरी-संवरी आज दिशा पर कहता यही दिनमान भी है ।।
    जहरबेल के बीज रोप कर दूरी के कर दिए निशान
    बारूदों की रेत बिछाकर दिल को भी कर दिया मकान
    धूल गर्द में धुँधली शक्लें पहचानी न जाती है
    वहशत की पथरीली आँखों तक पानी न आती है
    लाचारों की शोणित से कंठों को तर कर लेते हैं
    छीन गरीबों की रोटी यह अपना घर भर लेते हैं
    कितनी फूट कहाँ भरनी है इनको यह अनुमान भी है
    और सियासी रहनुमाओं की यही आज पहचान भी है ।। § Read_More....

  • प्राणायाम के पूर्व आवश्यक है यम, नियम और आसन की सिद्धि डॉ. दीपकुमार शुक्ल

    विविधा

    2017.06.28 04 ravijansaamnaबीते 21 जून को विश्व के 180 से भी अधिक देशों में तीसरा अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया। भारत की धरती पर हजारों वर्ष पूर्व प्रस्फुटित, पुष्पित एवं पल्लवित हुए योगज्ञान के प्रति आज पूरे विश्व में उत्साह दिखायी दे रहा है। प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी की अप्रतिम पहल के परिणामस्वरूप ही यह सम्भव हो पाया है। भारतीय ऋषियों ने योग का मानव जीवन के साथ अटूट सम्बन्ध देखकर मनुष्य को योगमय जीवन व्यतीत करने की प्रेरणा दी थी। ऋषि-महर्षियों ने आत्मकल्याण और लोककल्याण के सन्मार्ग का अनुसन्धान समाधिस्थ अवस्था में योगारूढ़ होकर ही किया था। वेद, शास्त्र, उपनिषद, पुराण, गीता आदि धर्मग्रन्थ योगदर्शन के अनेकानेक चमत्कारों से आच्छादित हैं। योगज्ञान का ग्रन्थ रूप में संकलन इस बात की स्वतः पुष्टि है कि हमारे ऋषि-मुनि इस ज्ञान को जनसामान्य तक पहुँचाने के लिए सतत प्रयत्नशील रहे परन्तु भौतिक प्रगति की घुड़दौड़ में शामिल रहने वाले अनेक राजा-महराजाओं और बादशाहों द्वारा जहाँ इस ज्ञान की उपेक्षा की गयी वहीँ कट्टर मुस्लिम और अंग्रेजी शासकों द्वारा इस ज्ञान का मजाक उड़ाते हुए इसे पद्द्वलित करने का भी बारम्बार प्रयास किया गया। इसके बावजूद भी भारत के विभिन्न मनीषियों द्वारा सीमित संसाधनो के माध्यम से इस दिव्य और लोकोपयोगी ज्ञान को सुरक्षित रखा गया। इनमें से अनेक मनीषी ऐसे हैं जिनका नाम हममे से शायद ही किसी को ज्ञात हो। § Read_More....

..प्रकाशकः श्याम सिंह पंवार
कार्यालयः 804, वरुण विहार थाना-बर्रा जिला-कानपुर-27 (उ0 प्र0) भारत
सम्पर्क सूत्रः 09455970804
jansaamna@gmail.com ..

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