Sunday, April 21, 2019
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महिला जगत

महिला किसान… महिला सम्मान की हकदार..?

यूं तो महिला दिवस 8 मार्च को मनाया जाता है और बड़े बड़े आयोजन भी होते हैं उस दिन, लेकिन फिर भी कहीं न कहीं लोग मूल मुद्दे से भटक जाते हैं। महिला दिवस मेरी समझ से मानवीय मूल्यों, स्त्री हकों और उनके उत्थान के लिए प्रयासरत और जो आवाज उठाती हैं, जागरूकता पैदा करती हैं वो ही महिला दिवस को सार्थक करते हैं। आज एक पिछड़े तबके की ओर ध्यान ले जाना चाहूंगी जो समाज में कार्य की दृष्टि से पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कार्य कर रहीं हैं और कहीं ज्यादा मेहनती भी हैं लेकिन उनका दर्जा दोयम से भी नीचे है। मैं बात कर रही हूं महिला किसानों की।

महिला किसान दिवस 15 अक्टूबर को मनाया जाता है। महिला किसान दिवस जिसका उद्देश्य महिलाओं में खेती किसानी में भागीदारी को बढ़ावा देना है। मेरी नजर में महिला दिवस के दिन महिला किसान की बात ना करके उनके साथ अन्याय करना होगा। महिला किसान जो बीजारोपण,रोपाई, उर्वरक वीटा, फसल कटाई और भंडारण वगैरह में पुरुषों के साथ बराबरी में काम करती है और एक बात स्पष्ट कर देना चाहूंगी कि किसान महिला खेतों में काम करने के बाद घर भी संभालती है और वहीं पुरुष अपना समय मनोरंजन में व्यतीत करता है। पुरुषों के मुकाबले में महिला किसान ज्यादा काम करती है तो उसे भेदभाव का सामना क्यों करना पड़ता है? क्यों उन्हें किसान का दर्जा नहीं मिल पाता है? किसान की पत्नी के रूप में ही क्यों पहचानी जाती हैं? सबसे बड़ा भेदभाव उनकी मजदूरी को लेकर होता है। पुरुषों के मुकाबले में उन्हें कम मजदूरी मिलती है। ज्यादातर किसान महिलाओं को नियम कानून की जानकारी नहीं होती है। पति की मृत्यु के बाद परिवार की जिम्मेदारी पत्नी पर आ जाती है लेकिन नियम कानून की जानकारी ना होने की वजह से वह अपनी जमीन पर मजदूरों की तरह काम करती है क्योंकि परिवार के पुरूष ( देवर, जेठ, भाई) महिला की जानकारी के अभाव के कारण उनका बेजा फायदा उठाते हैं। कई किसान महिलाएं कोर्ट कचहरी के चक्कर से बचने के लिए अपनी लड़ाई नहीं लड़ती हैं। सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयासों के बावजूद इनकी  स्थिति में कोई सुधार नहीं आ रहा है।

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महिला दिवस क्या एक फैशन..?

मैं वोमे्न्स डे वाले दिन कुछ नहीं कहती एक चिढ़ सी होती है, इसलिए नहीं कि लड़कियां अभी भी पीछे हैं। सामाजिक रूप से गौर किया जाए तो कई पहलू दिखाई देते हैं कहीं आर्थिक स्थिति, कहीं अशिक्षा, कहीं धर्मांधता या परिवेश ऐसा होता है कि लड़कियां आगे बढ़ नहीं पाती हैं। लेकिन मुझे क्रोध इसलिए आता है महिला सम्मान या महिला दिवस सिर्फ मीटिंग, इटिंग और फंक्शन मात्र तक सिमट रहे हैं और जमीनी हकीकत से दूर हो रहें हैं। मैं ऐसा नहीं कह रही कि लड़कियों का विकास नहीं हो रहा है या वह नए कीर्तिमान नहीं स्थापित कर रही हैं, लेकिन अभी भी कहीं न कहीं स्त्रियां दुखी और पीड़ित हैं। उनकी भावनाओं की कद्र नहीं होती है और उन्हें दोयम दर्जा मिलता है। अखरने वाली बात यह भी लगती है कि महिला का सम्मान किसी एक दिन का मोहताज क्यों? जब वो सम्माननीय है तो उसे सहयोग कर उसका सम्मान बढ़ाइये।

महिला दिवस क्यों मनाया जाता है इसकी जानकारी भी सही तरीके से लोगों नहीं होती है। लेकिन प्रचार-प्रसार करने में लोग आगे रहते हैं। एक नजर इस बात पर कि महिला दिवस क्यों मनाया जाता है? 8 मार्च को पूरी दुनिया में महिला दिवस मनाया जाता और करीब 29 देशों में इस दिन सार्वजनिक छुट्टी होती है। साधारणतया इस दिन लोग महिला के त्याग, समर्पण या किसी उपलब्धि की सराहना करते हैं। स्त्री को कोई उपहार देकर महिला दिवस की खुशी जाहिर करते हैं। सही है, लेकिन ये सिर्फ एक मनोरंजन का साधन भर होता है। स्त्रियों को पूजना या उपहार देना महिला दिवस नहीं है बल्कि सही मायनों में उनका आत्मबल बढ़ाना और और जमाने के साथ कदमताल मे सहयोग करना, उनके लिए सम्मान से कम नहीं है।

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महिलाओं के लिए ये कैसी लड़ाई जिसे महिलाओं का ही समर्थन नहीं

मनुष्य की आस्था ही वो शक्ति होती है जो उसे विषम से विषम परिस्थितियों से लड़कर विजयश्री हासिल करने की शक्ति देती है। जब उस आस्था पर ही प्रहार करने के प्रयास किए जाते हैं, तो प्रयास्कर्ता स्वयं आग से खेल रहा होता है। क्योंकि वह यह भूल जाता है कि जिस आस्था पर वो प्रहार कर रहा है, वो शक्ति बनकर उसे ही घायल करने वाली है।
पहले शनि शिंगणापुर, अब सबरीमाला। बराबरी और संविधान में प्राप्त समानता के अधिकार के नाम पर आखिर कब तक भारत की आत्मा, उसके मर्म, उसकी आस्था पर प्रहार किया जाएगा?
आज सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह उठ रहा है कि संविधान के दायरे में बंधे हमारे माननीय न्यायालय क्या अपने फैसलों से भारत की आत्मा के साथ न्याय कर पाते हैं। क्या संविधान और लोकतंत्र का उपयोग आज केवल एक दूसरे की रक्षा के लिए ही हो रहा है। कहीं इनकी रक्षा की आड़ में भारत की संस्कृति के साथ अन्याय तो नहीं हो रहा?

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केवल पुरुषों को दोष देने से काम नहीं चलेगा

पुरानी यादें हमेशा हसीन और खूबसूरत नहीं होती। मी टू कैम्पेन के जरिए आज जब देश में कुछ महिलाएं अपनी जिंदगी के पुराने अनुभव साझा कर रही हैं तो यह पल निश्चित ही कुछ पुरुषों के लिए उनकी नींदें उड़ाने वाले साबित हो रहे होंगे और कुछ अपनी सांसें थाम कर बैठे होंगे। इतिहास वर्तमान पर कैसे हावी हो जाता है मी टू से बेहतर उदाहरण शायद इसका कोई और नहीं हो सकता।
दरअसल इसकी शुरुआत 2006 में तराना बुरके नाम की एक 45 वर्षीय अफ्रीकन- अमेरिकन सामाजिक कार्यकर्ता ने की थी जब एक 13 साल की लड़की ने उन्हें बातचीत के दौरान बताया कि कैसे उसकी मां के एक मित्र ने उसका यौन शोषण किया। तब तराना बुरके यह समझ नहीं पा रही थीं कि वे इस बच्ची से क्या बोलें। लेकिन वो उस पल को नहीं भुला पाईं, जब वे कहना चाह रही थीं, ‘मी टू’, यानी ‘मैं भी’, लेकिन हिम्मत नहीं कर पाईं।
शायद इसीलिए उन्होंने इसी नाम से एक आंदोलन की शुरुआत की जिसके लिए वे 2017 में ‘टाइम परसन आफ द ईयर’ सम्मान से सम्मानित भी की गईं।
हालांकि मी टू की शुरुआत 12 साल पहले हुई थी लेकिन इसने सुर्खियाँ बटोरी 2017 में जब 80 से अधिक महिलाओं ने हाॅलीवुड प्रोड्यूसर हार्वे वाइंस्टीन पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया जिसके परिणामस्वरूप 25 मई 2018 को वे गिरफ्तार कर लिए गए। और अब भारत में मी टू की शुरुआत करने का श्रेय पूर्व अभिनेत्री तनुश्री दत्ता को जाता है जिन्होंने 10 साल पुरानी एक घटना के लिए नाना पाटेकर पर यौन प्रताड़ना के आरोप लगाकर उन्हें कठघड़े में खड़ा कर दिया। इसके बाद तो ‘मी टू’ के तहत रोज नए नाम सामने आने लगे। पूर्व पत्रकार और वर्तमान केंद्रीय मंत्री एम जे अकबर, अभिनेता आलोक नाथ, रजत कपूर, गायक कैलाश खेर, फिल्म प्रोड्यूसर विकास बहल, लेखक चेतन भगत, गुरसिमरन खंभा, फेहरिस्त काफी लम्बी है।
मी टू सभ्य समाज की उस पोल को खोल रहा है जहाँ एक सफल महिला, एक सफल और ताकतवर पुरुष पर आरोप लगा कर अपनी सफलता अथवा असफलता का श्रेय मी टू को दे रही है। यानी अगर वो आज सफल है तो इस ‘सफलता’ के लिए उसे ‘बहुत समझौते’ करने पड़े। और अगर वो आज असफल है, तो इसलिए क्योंकि उसने अपने संघर्ष के दिनों में ‘किसी प्रकार के समझौते’ करने से मना कर दिया था।

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घर पर करें स्मोकी आई मेकअप

हम सभी को आई मेकअप करना पसन्द होता है और स्मोकी आई मेकअप तो हर फीमेल की फर्स्ट चाॅइस होती है, क्योंकि यह मेकअप उनके अपीयरेंस मे ग्लेमर तो ऐड करता ही है, साथ ही साथ देखने वाले को भी आकर्षित करता है। फ्रेंड्स की शादी से लेकर नाईट पार्टीज तक यह मेकअप हर तरह की ड्रेस के साथ सूट करता है।
यह स्मोकी आई मेकअप सुंदर लगने के साथ साथ फैशन में भी बना रहता है पर हम में से अधिकतर को परेशानी आती है की स्मोकी आई मेकअप कैसे किया जाए ? चूंकि यह आई मेकअप करना हार्ड लगता है इसलिए हम में से कई लोग इसके लिए महंगे पार्लर या सैलून में जाते है और पैसे के साथ अपना अमूल्य समय भी खर्च करते हैं।
जरा सोचिए अगर यही स्मोकी आई मेकअप आप अपने घर पर बैठे अपने आप कर सकें तो आप अपना हार्ड अर्न मनी और टाइम दोनों बचा सकतें हैं। इसीलिए आज हम लाये है जन सामना की ब्यूटी एडवाइजर व सी डब्लू सी ब्यूटी एन मेकअप स्टूडियो की सेलिब्रिटी मेकओवर एक्सपर्ट शालिनी योगेन्द्र गुप्ता के साथ घर पर ही स्मोकी आई मेकअप करने का मैथड।
यह स्मोकी आई मेकअप दिखने मे क्लासी तो होता ही है साथ ही यह कुछ ही मिनटों मे आसानी से हो जाता है। आपको सिर्फ मेरे बताये गए मैथड को फाॅलो करने की जरुरत है और आप भी कर सकती हैं घर पर पार्लर जैसा स्मोकी आई मेकअप।
स्मोकी आई मेकअप करने के लिए हमें चाहिये: कंसीलर, फाउंडेशन या बेस (अपनी स्किन के अनुसार) , लूज पाउडर, गोल्डन वाइट हाइलाइटर, आई शैडो (ब्लू और ब्लैक) , आई लाइनर, काजल, मस्कारा

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पूजा को मि. इण्डिया राइजिंग स्टार अवार्ड से नवाजा गया

कानपुरः जन सामना ब्यूरो। पनकी निवासी मुन्नी देवी व दशरथ सिंह यादव की नई नवेली बहू पूजा यादव को मि. इण्डिया राइजिंग स्टार अवार्ड से नवाजा गया।
यह कार्यक्रम गुड़गांव स्थित एक माल में ग्लैमर गुड़गांव के तत्वावधान में आयोजित किया गया था। इस मौके पर पनकी डी ब्लाक निवासी पूजा यादव ने मि. इण्डिया प्राइड आफ नेशन 2018 कम्पटीशन में प्रतिभाग किया था और 14 सितम्बर को सेमी फिनाले में अपनी एक्टिंग से सभी का मन मोह लिया था। उन्हें इस मौके पर संस्था द्वारा मि. इण्डिया राइजिंग स्टार अवार्ड दिया गया। कम्पटीशन में देशभर से 90 महिलाओं ने प्रतिभाग किया था।
पूजा यादव ने ‘जन सामना’ को बताया कि मैं बहुत खुश हूं। इस कामयाबी के पीछे उनके पति कैप्टन अभिषेक कुमार का भरपूर सहयोग व उनके सास-ससुर की शुभकामनाएं हैं।

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सजना है मुझे सजना के लिए

एक लड़की के लिए दुल्हन बनना उसका सबसे खास सपना और उसके लिए सबसे खास दिन होता है जिसका वो बचपन से ही इन्तजार कर रही होती है और यह लड़की शादी वाले दिन चाहती है कि उस दिन सब कुछ उसके लिए अच्छा हो जैसे की दुल्हन का मेकअप और एक दुल्हन का शादी के दिन अच्छा दिखना या लगना उसके मेकअप के ऊपर निर्भर करता है। इसीलिये जन सामना की ब्यूटी एडवाइजर व सी डब्लू सी ब्यूटी एन मेकअप स्टूडियो की सेलिब्रिटी मेकओवर एक्सपर्ट शालिनी योगेन्द्र गुप्ता बता रहीं हैं टिप्स
अपनी त्वचा को तैयार करेंः किसी भी तरह के मेकअप को लगाने से पहले हमेशा इस बात का ध्यान रखे कि आप की त्वचा मेकअप के लिए तैयार हो। अपनी त्वचा को मेकअप के लिए तैयार करने के लिए आपको चाहिए कि आप सबसे पहले अपनी त्वचा को नमी प्रदान करें। अपने चेहरे को नमी देने के लिए आप चेहरा धो लें और उसके बाद हल्का माॅस्चराइजर का उपयोग कर सकती है
प्राइमर लगाना न भूलेः अगर आप अपनी शादी में लंबे समय तक मेकअप को रखना चाहती है तो प्राइमर को लगाना न भूले। प्राइमर शादी वाले दिन आपके मेकअप को आपके चेहरे पर देर तक रखने में आपकी मदद करता है। इसके लिए आपको चाहिए कि आप मेकअप से पहले अपनी स्किन पर प्राइमर को लगा ले, और मेकअप कि चिंता से मुक्त हो जाए क्योकि न सिर्फ प्राइमर मेकअप देर तक चलने में मदद करता है बल्कि ये आपके चेहरे से झुर्रिया, लाइनें भी हटा देता है।
माॅस्चराइजर लगाने के बाद और फाउंडेशन लगाने से पहले आप प्राइमर का उपयोग कर सकती है।
फाउंडेशन लगाए: प्राइमर लगाने के तक बाद एक दुल्हन को चाहिए कि वो फाउंडेशन का उपयोग करे, क्योकि कई बार ये कंफ्यूजन हो जाता है कि पहले फाउंडेशन लगाए या प्राइमर। लेकिन मेरी बात माने तो प्राइमर के बाद हमेशा फाउंडेशन को ही यूज में ले, क्योकि इसे सूखने में थोड़ा समय लगता है।
एक गलती जो हम आम तौर पर करते है कि हम मेकअप को हर स्टेप पर सूखने नहीं देते है इसीलिए ऐसा करने से बचे।

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रेट्रो लुक मेकअप में ना करें गलतियां

आजकल फिल्मों के जरिए रेट्रो लुक फैशन की दुनियां में वापसी कर रहा है। खास बात यह है कि यह रेट्रो लुक युवाओं में काफी प्रसिद्ध हो रहा है। महिलाएं काॅलेज के साथ-साथ आॅफिस जाने के लिए भी प्रयोग कर रहीं हैं।
आजकल रेट्रो लुक मेकअप महिलाओं में काफी पसंद किया जा रहा है। इसमें साठ के दशक की तरह स्किन पर मैट फिनिश टच दिया जाता है। खास बात यह है कि यह लुक इंडियन फीचर्स और ट्रेडिशन इंडियन कपड़ों को सूट भी करता है। इसीलिए विस्तार से जानिए जन सामना की ब्यूटी एडवाइजेर व सलेब्रिएटी मेकअप आर्टिस्ट शालिनी योगेन्द्र गुप्ता से।
शालिनी के अनुसार रेट्रो लुक के लिए जो मेकअप आइटम प्रयोग किए जाते हैं उनमें लिप ग्लाॅस, फ्राॅस्टेड लिपस्टिक, म्यूटेड ब्लशर कलर्स, आई लाइनर, आई शैडो और मस्कारा शामिल हैं। दरअसल, उन दिनों पीच और लाइट पिंक ब्लशर इन थे, इसलिए ब्लशर को नैचरल ग्लो लाने के लिए यूज करें।
फेसः फेस वाॅश से साफ करके लिक्विड टिंटेड फाउंडेशन लगाएं। मैक का डीप ब्ल्यू आईशैडो आइलिड से बाहर की तरफ फैलाएं। अच्छी तरह ब्लेंड करें। हेवी आइलाइनर अपर एंड लोअर लैशलाइन पर लगाएं। फाॅल्स आइलैशेज लगाएं और मस्कारा के दो कोट लगाएं। मैक का पीच कलर ब्लशर लगाएं। ब्राॅन्जर से हाइलाइट करें। कोरल लिपस्टिक लगाएं। फिर ट्रासपेरेंट ग्लाॅस लगाएं।
हेयरः आगे के बालों को पीछे की तरफ ले जाकर क्राउन एरिया पर आगे की तरफ प्रेस करते हुए साइड पोनी बनाएं। फ्रिंज को एक साइड में क्लीन सेट करें।
बालों के एक तरफ बिग मैंचिग एक्सेसरीज लगाएं।
चीक्स-गलतीः चीकबोंस को शेप देने के लिए डार्क शेड वाला ब्लश इस्तेमाल करती हैं। इस तरह चीक्स अलग से हाइलाइट होने लगते हैं, जो आपके काॅम्प्लेक्शन को दबा देते हैं।
सलूशनः चीक्स को शेप देने के लिए काॅम्प्लेक्शन के हिसाब से ही ब्लशर चुनें। बजाय ढेर सारा ब्लशर बर्बाद करने के हलका ब्राॅन्जर चीक्स एपल के साइड पर नाक की सीध से हेयरलाइन तक ले जाते हुए लगाएं। ब्लशर का ऐसा शेड चुनें जो आपकी स्किन टोन से मेल खाता हो। मसलन- फेयर स्किन के लिए रोज शेड्स चुनें। आॅलिव स्किन के लिए पीच शेड्स। खासतौर पर मिनरल ब्लशर चुनें। डार्क स्किन के लिए रेड और एप्रिकाॅट शेड्स चुनें।

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मास्टर क्लास व ब्राइडल कम्पटीशन में शालिनी का दिखा जलवा

नंद गाँव, छत्तीस गढ़ः जन सामना संवाददाता। रेनुका ब्यूटी ग्रुप और आर्गनाइजर आर. माने के सहयोग से एक दिन का मेकअप मास्टर क्लास व ब्राइडल कम्पटीशन का आयोजन ए बी एस ग्रीन राज नंद गाँव छत्तीस गढ़ में सफलता पूर्वक सम्पन्न हुआ
इस शो को सफल बनाने में कानपुर की सेलेब्रिटी मेकअप आर्टिस्ट शालिनी योगेन्द्र गुप्ता और मुम्बई के जाने माने हेयर एक्सपर्ट सेलेब्रिटी उदय टक्के ने अपनी कला का प्रदर्शन कर ब्यूटीशियन को नये नए मेकअप और हेयर के टिप्स दिए
ब्राइडल कम्पटीशन के विनर सगुन ब्यूटी सलून अकोला, आयुषी ब्यूटी सलून राज नंद गाँव, खुशबू ब्यूटी सैलून दुर्ग रहे
इस प्रोग्राम के स्पेशल गेस्ट अंकिता सलून की रेखा साहू, रायपुर से सपना कुकरेजा और विजया सैलून रायपुर से विजयी रही।
रेनुका ब्यूटी ग्रुप से रेणुका माने, किरन,वर्षा डोगरे, राजेश गेदान ने सबका स्वागत किया।

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फॉर्बिडेन अमेरिका में ऑनर किलिंग की बदसूरत सच्चाई का खुलासा करती है

⇒न्यूयॉर्क इंडियन फिल्म फेस्टिवल 2018 में प्रीमियर में अमेरिकी दर्शकों को किया सन्न, वास्तविक जीवन की कहानी से प्रेरित है फॉर्बिडेन
मुंबईः जन सामना ब्यूरो। अभिनेत्री सलोनी लूथरा की आने वाली थ्रिलर श्फॉर्बिडेनश् अंतरराष्ट्रीय फिल्म सर्किट में एक आंख खोलने वाली फिल्म है। ये फिल्म पश्चिमी दुनिया में ऑनर किलिंग की सच्चाई उजागर करती है.। अभिनेत्री सलोनी लूथरा ने लगातार अपने आकर्षक और शानदार प्रदर्शन से दर्शकों और आलोचकों का मन जीता है। सलोनी ने फिल्म में मुख्य किरदार निभाया हैं।
फॉर्बिडेन जसलिन नाम की एक लड़की की सच्ची कहानी पर आधारित है, जो न्यूयॉर्क में पैदा हुई और पेशे से एक डॉक्टर थी। उसने 25 साल की उम्र में अपना जीवन खो दिया था।
सलोनी लूथरा कहती हैं, फॉर्बिडेन न्यूयॉर्क शहर में पैदा हुई एक बहुत ही साहसी लड़की की एक सच्ची जिंदगी की प्रेम कहानी है । उसे अपने दिल की आवाज सुनने की कीमत चुकानी पडी थी। ऑनर किलिंग का मुद्दा सिर्फ तीसरी दुनिया की समस्या नहीं है. यह सीमाओं, धर्मों और समाज के हर वर्ग में मौजूद है। इस फिल्म के साथ, मैं आशा करती हूं और प्रार्थना करती हूं कि मैं इस साहसी लड़की की जीवन की कहानी के साथ न्याय कर सकूं। इस फिल्म का मिशन अपने मूल देशों के बाहर रहने वाली महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा को समाप्त करना है। इसके अलावा, यह एक सामाजिक परिवर्तन को भी प्रेरित करना चाहता, जिससे कि कानून ऐसे अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए मजबूर हो जाए, जो सम्मान के नाम पर महिलाओं के खिलाफ गंभीर अपराध करते हैं।
वीमेन एडवोकेसी ग्रुप के निष्कर्ष के अनुसार, ऑनर किलिंग के कारण हर साल 20,000 महिलाएं और लड़कियां मारी जाती हैं। यूनाइटेड नेशंस कमिशन ऑन ह्यूमन राइट्स को प्रस्तुत रिपोर्ट से पता चलता है कि कम से कम 26 देशों में ये क्रूर प्रथा जारी है। 26 में से 9 पश्चिमी देश हैं। इसमें अमेरिका, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम और जर्मनी भी शामिल हैं, जहां आप्रवासी समुदाय की संख्या बहुत अधिक है।

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