मजबूत इच्छाशक्ति, सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास कोविड.19 मरीजों और कोविड योद्धाओं की ताकतः एड किशन भावनानी
गोंदिया . कोविड.19 महामारी ने पूरे विश्व में एक भय का वातावरण निर्माण कर दिया है। आज अगर हम वैश्विक रूप से देखें तो मानवीय जीवन में खुशियां गायब हुई है और एक भय का वातावरण निर्माण हो गया है। हालांकि कुछ ही देश हैं जो कोरोना महामारी पर विजय प्राप्त करने की ओर अग्रसर हैं और वहां जश्न मनाने के समारोह हम टीवी चैनलों के माध्यम से देख रहे हैं। अमेरिका ने भी 12 से 15 वर्ष की आयु वालों को टीकाकरण की अनुमति जारी कर दी है। भारत ने भी बायोटेक को कोवैक्सीन 2 से 18 वर्ष के बच्चों पर ट्रायल की अनुमति दे दी है। और बुधवार दिनांक 12 मई 2021को इंटरनेशनल नर्सिंग डे हैं और विश्व की सभी नर्सेस को सकारात्मक प्रोत्साहन देना लाज़मी भी हैं।… बात अगर हम कोरोना महामारी से लड़ाई की करें तो चिकित्सीय तकनीकी, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से हर देश कोविड.19 से जंग लड़ रहा है और कामयाबी की ओर बढ़ भी रहे हैं।
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Jansaamna
कानपुर देहात।
कानपुर देहात।
बुन्देलखण्ड में दूर.दराज गांवों में अखती अपने ही ढंग से मनाई जाती है। अब से 45 वर्ष पूर्व के वो दिन मुझे याद हैं जब मेरे जन्म स्थान खुटगुवां ग्राम उ.प्र. में अलग ही तरह से अक्षय तृतीया मनाई जाती थी। इसे खेल और पूजा दोनों तरह से मनाते थे। वहां इसे अकती कहते हैं। यह तो मुझे बाद में ज्ञात हुआ कि अक्षय तृतीया का ही अपभ्रंस अकती है। अकती. अखती. आखाती. अक्षय तीज. अक्षय तृतीया। यहां यह मुख्यता से महिलाओं का त्योहार बन गया है। विशेषतः कुँवारी कन्याएँ इसमें भाग लेती हैं। वैशाख शुक्ल तृतीया के दिन घर में मिट्टी के छोटे छोटे कलश, एक बड़ा कलश, भींगी हुई चने की दाल आदि रखकर पूजा करतीं। दूसरे दिन रात्रि को ग्राम के बाहर जाकर लगभग एक घंटे तक बरगद के पेड़ की पूजा करने के बाद पुतरा.पुतरिया (गुड्डा.गुड्डी) द्ध का ब्याह रचाया जाता। जिसमें विवाह की सभी रश्में की जाती। लड़कियाँ पूजा से लौटते समय रास्ते में मिलने वाले लोगों को सौन भेंट करती आती हैं। वे झुंड बनाकर घर.घर जाकर शगुन गीत गाती हैं और सोन बांटतीं है।
आगरा।
फिरोजाबाद।