मोटरसाइकिल चलाना आजकल एक ऐसा स्टाइल स्टेटमेंट बन गया है कि महिला कलाकारों ने भी बाइक चलाना शुरू कर दिया है। कुछ अभिनेत्रियाँ अपनी स्क्रिप्ट की मांग से इतर भी बाइक चलाना सीखने को लेकर जुनूनी हैं। ऐसी ही एक साहसी अभिनेत्री हैं श्वेता भट्टाचार्या जो शो ‘जय कन्हैया लाल की’ में डाॅली की भूमिका निभा रहीं हैं। हाल ही में, ऐसी खबर थी कि श्वेता ‘जय कन्हैया लाल की’ के सेट पर अपने को-स्टार विशाल वशिष्ठ से हिंदी सीख रहीं हैं। श्वेता हमेशा नई चीजें सीखने में खुद को व्यस्त रखती हैं। उसकी इस सूची का नवीनतम शगल बाइक चलाना है। श्वेता बेसब्री से बाइक चलाना सीख रही हैं। बाइक चलाने के बारे में कोई जानकारी नहीं होने के कारण श्वेता ने कोशिश करने का फैसला किया और अभी तक सफल रही हैं।
इस बारे में बताते हुए श्वेता कहती हैं, “मुझे हमेशा से बाइक चलाने में डर लगता था। मेरा एक दोस्त बाइक चलाना सीखाने में मेरी मदद कर रहा है। मैंने सोचती थी कि बाइक खतरनाक स्पीड मशीन है लेकिन मैंने बाइक चलाना सीखकर अपना डर दूर करने का फैसला किया। बाइक चलाना आसान नहीं है। इसके लिए कड़ी मेहनत और समर्पण की जरूरत है।
मनोरंजन
काल भैरव रहस्य की एक्ट्रेस सरगुन कौर को पसंद है पेंटिंग
स्टार भारत की मिस्ट्री थ्रिलर ‘काल भैरव रहस्य’ ने अपनी रोमांचक कहानी से दर्शकों को बांध रखा है। एक्टिंग के अलावा शो के कुछ कलाकारों की छिपी हुई प्रतिभाएं उनके खाली समय में सामने आती रहतीं हैं। ऐसी ही एक एक्टर सरगुन कौर हैं जो न केवल खूबसूरत हैं बल्कि चित्रकार भी हैं। उन्हें पेंटिंग पसंद है। शूटिंग से मिले खाली समय में वह पेंटिंग करना उनका शगल है।
पेंटिंग से अपने लगाव के बारे में सरगुन कहती हैं, “मुझे आर्ट पसंद है। कला हमारे जीवन में रंग भरती है, कल्पनाशील बनाती है और हमें ऐसी दुनिया प्रदान करती है जिसमें उड़ान भर सकते हैं. जब मैं पेंटिंग कर रही होती हूँ तब मुझे अंदर और बाहर शांति की अनुभूति होती है। मेरे लिए पेंटिंग एक जीवित भाषा है जो एहसास और भावनाओं को अभिव्यक्त करती है। मैं कोई महान चित्रकार नहीं हूँ लेकिन जो भी मैं पेंट करती करती हूँ वह सीधे मेरे दिल से आता है। दिल्ली में मेरे माता-पिता मेरी पेंटिंग की प्रदर्शनी लगाते हैं। आपको अपने जुनून को जिंदा रखना जरूरी है।
कभी देखा है पर्दे पर ऐसा रंगीला डॉन?
डॉन या गैंगस्टर… सिल्वर स्क्रीन पर ये किरदार बहुत पुराने हैं दर्शकों का खूब मनोरंजन किया है मगर समय के अनुसार ये किरदार और इनके स्वरूप बदलते रहे। 70 के दशक में डॉन खूब छाए पर्दे पर। अगर किसी खलनायक ने डॉन की भूमिका निभाई तो वो किरदार अक्सर नेगेटिव होते थे जहां खून खराबे, स्मगलिंग, महिलाओं की तस्करी वगैरह करता था वो गैंगस्टर लेकिन अगर जब कोई हीरो पर्दे पर डॉन बनता था तब वो या तो जुल्म से सताए जाने के बाद डॉन बनता था या फिर गरीबी से तंग आकर गैंगस्टर बनता था हालांकि वो भी खतरों से खेलता था और ड्रनग्स या सोने की तस्करी करता था। डॉन का लुक और अंदाज भी निराले हुवा करते थे।
मगर मिलेनियम आने के बाद फिल्मों का रुख हुवा कॉमेडी की तरफ लेहाजा इन कॉमेडी फिल्मों में अगर कोई डॉन बना तो वो भी कॉमिक डॉन बन गया। डेविड धवन की कई फिल्मों में आशीष विद्यार्थी कॉमिक गैंगस्टर बने। सलमान खान की फिल्म पार्टनर में राजपाल यादव छोटा डॉन बने थे और खूब मनोरंजन किया था दर्शकों का। पिछले साल आई फिल्म मुन्ना माइकल में नवाजुद्दीन सिद्दीकी गैंगस्टर बने थे। ये गैंगस्टर एक लड़की के प्यार में डांस सीखने के पीछे पागल था ताकि वो उस लड़की पर अपना प्रभाव छोड़ सके।
‘नित खैर मांगा’ आज रिलीज हुआ
लखनऊ हमेशा सांस्कृतिक रूप से समृद्ध रहा है और इसकी सुंदरता रेड के अगले मधुर ट्रैक नित खैर मांगा की धुनों में घुली-मिली हैं, जो ख्यात गायक नुसरत फतेह अली खान के गीतों का पुनः संस्करण है। कई प्रमुख फिल्मे इस प्रतिष्ठित शहर में फिल्माई गईं हैं लेकिन बहुत कम फिल्म निर्माताओं ने लखनऊ की वास्तविक खासियत का प्रदर्शन किया है। निर्देशक राजकुमार गुप्ता ने गीतों के सौंदर्य चित्रण के साथ लखनऊ की सुंदरता और खासियत को वास्तव में बढ़ाया है। यह रोमांटिक ट्रैक अजय देवगन पर चित्रित किया गया है।
Read More »चर्चा मेंः अमृत सिन्हा की फिल्म ‘‘फैरस’’
बिहार के छोटे से शहर सहरसा का एक लड़का इन दिनों मुंबई की माया नगरी में फिल्म निर्देशन के जरिए अपनी धाक जमा रहा है जिसका नाम है अमृत सिन्हा। अमृत सिन्हा ने रंगमंच के द्वारा फिल्मों का सफर तय किया है। अमृत सिन्हा ने महज दो वर्ष पूर्व तनय इंटरनेशनल फिल्म प्रोडक्शन हाउस की नीव रखी थी जो आज सफलता का पर्याय साबित हुआ है। विगत वर्ष 2016 में आयी अमृत सिन्हा और आनंद दाय गुप्ता की फिल्म खजुरवाटिका फिल्म का प्रदर्शन भी देश सहित अंतरराष्ट्रीय मंचो पर किया गया था। इस फिल्म में खजुराहो में बने पोराणिक मंदिर की मूर्तिकला को व उससे जुड़े तथ्यों का फिल्मांकन किया गया था। इसके बाद 2017 इसी फिल्म का नाम व पटकथा परिवर्तन करके नयी खजुरवाटिका फिल्म का निर्माण हुआ जो विश्व पटल पर काफी सराही गयी। जोकि काफी फिल्म अवार्ड अपने नाम कर पाने में सफल रही। फिर 2017 में आयी फिल्म रक्तप्रदाता जीवनदाता जोकि हैदराबाद के ब्लड डोनर पर आधारित थी जिसमें रक्तदान के प्रति जागरूकता दिखाई गयी थी। इसी क्रम में अमृत की दूसरी फिल्म ए शॉल देट बीट्स आयी जोकि खाने की बर्बादी के प्रति जागरूकता फैलाती फिल्म थी। यह दोनों सामाजिक फिल्में अवार्ड के लिये बेस्ट फिल्म के नाम से नॉमीनेट हो चुकी है। और अब अमृत सिन्हा और शौर्य सिंह की दो घंटे दस मिनट अवधि की फिल्म ‘‘फैरस’’ चर्चा में हैं जोकि आज के परिदृश्य में देश में बढ़ते क्राईम पर आधारित है जिसमें मुख्य भूमिका में वॉलीवुड के चर्चित अभिनेता विजय राज, जाकिर हुसैन, गोपाल सिंह, विक्रमजीत, पंकज झा, राहुल सिन्हा, दियांश शर्मा व मीरा जोशी हैं। अमृत सिन्हा कम समय में अपनी बेमिसाल फिल्मों के जरिए दर्जनों फिल्म फेस्टिवल जैसे- मियामी इपीक ट्रेलर फेस्टिवल, इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल, आचार्य तुलसी शार्ट फिल्म फेस्टिवल,चिल्ड्रन एनीमेशन अवार्ड, इंटरनैशनल फिल्म फेस्टिवल ओडिशा, में प्रतिभागी बन चुके हैं और उनकी फिल्में कई श्रेणी में शामिल हो चुकी हैं।
‘तेनाली रामा’ में मिनिषा लाम्बा की विषकन्या के रूप में हुईं एंट्री
‘तेनाली रामा’ के चाहने वालों के लिये एक नया ट्विस्ट इंतजार कर रहा है। दुश्मन राज्य विजयनगर के राजा कृष्णदेव राय को नुकसान पहुंचाने के लिये एक गुप्तघाती को भेजा गया है।
बाॅलीवुड की खूबसूरत अभिनेत्री मिनिषा लाम्बा छल से हत्या करने वाली चंद्रकला का किरदार निभा रही हैं। वह एक विषकन्या है, जिसके खून में जहर है। चंद्रकला एक सुंदर महिला है और वह अपनी संुदरता से अपने दुश्मनों को जाल में फंसा सकती है। बहुत ही छोटी उम्र से उसे थोड़ा-थोड़ा जहर खाने में दिया जाता है और उस जहर के काट को भी। इस वजह से ही वह जहर को पचा लेती है। समय के साथ-साथ उसका शरीर जहरीला बन गया है।
चंद्रकला विजयनगर पहुंचती है और राजा के करीब जाने का जाल बिछाती है। वह तथाचार्य (पंकज बेरी) को महल में घुसने का माध्यम बनाती है। राजा की हत्या को अंजाम देने के लिये वह रानी तिरूमलम्बा से दोस्ती कर लेती है! रूप बदलने में माहिर चंद्रकला कई अलग-अलग रूप धारण करती है, वह अपने काम को पूरा करने के लिये किसी भी हद तक जा सकती है।
क्या चंद्रकला अपने दुश्ट इरादों में सफल हो पायेगी? क्या तेनाली रामा उसके छुपे इरादों को समझ पायेगा और राजा को बचा पायेगा?
मातृभाषा दिवस पर अभिनेत्री-निर्माता नीतू चंद्रा जारी करेंगी एक गीत
मुंबईः जन सामना ब्यूरो। अभिनेत्री- निर्माता नीतू चंद्र जल्द ही अपने नए भोजपुरी गीत को अपने यूट्यूब चैनल पर, जिसे पहले नियो बिहार के नाम से जाना जाता था, रिलीज करेंगी। उनके भाई और राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता निर्देशक नितिन चंद्रा द्वारा निर्देशित इस गीत का लक्ष्य भोजपुरी भाषा और इसकी समृद्ध संस्कृति के महत्व को बताना है। इस गीत को दुनिया भर में मातृभाषा दिवस पर रिलीज किया जाएगा। गीत के बारे में नीतू चन्द्रा कहती हैं, मुझे इस पर गर्व है कि डिजिटल प्लेटफाॅर्म पर इस वीडियो को रिलीज कर के मुझे अपनी जड़ से जुड़ने का अवसर मिला है। मैं दुनिया को अपनी मातृभाषा भोजपुरी से रूबरू करना चाहती हूं, ताकि दुनिया भर के लोग इस भाषा की जीवंतता और समृद्ध संस्कृति के बारे में जान सके।
भारत, अमरीका, संयुक्त अरब अमीरात, कनाडा, सिंगापुर, नीदर लैंड, आॅस्ट्रेलिया और ब्रिटेन सहित आठ देशों में इस गीत के लिए वीडियो शूट किया जा रहा है। ये उस गर्व को दर्शाता है, जो नीतू चन्द्रा को अपनी मातृभाषा भोजपुरी को ले कर है। नीतू चन्द्रा हमेशा अपनी मातृभाषा का समर्थन करने वाली अभिनेत्री के रूप में जानी जाती है। नीतू हमेशा बिहार और दुनिया के दूसरे हिस्सों में रहने वाले भोजपुरी भाषी लोगों को अपनी मातृभाषा पर गर्व महसूस करने की वजह देती है। डिजिटली इस गाने को रिलीज करने के बारे में नीतू का मानना है कि डिजिटलीकरण के कारण यह गीत दुनिया भर के दर्शकों के लिए सुलभ हो सकेगा और यही उनका मकसद भी है।
कुंती और परी के बीच है ऑफ-स्क्रीन बहुत ही प्यारा संबंध
स्टार भारत की सबसे प्यारी माँ ‘क्या हाल मिस्टर पांचाल’ की कंचन गुप्ता उर्फ कुंती देवी ने अपने कन्हैया (मनिंदर सिंह) की परफेक्ट मईया होकर अपने दर्शकों के दिलों को जीत लिया है। वे केवल ऑन-स्क्रीन ही लोकप्रिय नहीं हैं बल्कि सेट पर भी उनके ढेरों प्रशंसक हैं। उनकी तारीफ उनके को-स्टार्स भी करते हैं, विशेष रूप से परी का किरदार निभा रहीं ओजस्वी आरोड़ा। ओजस्वी को उनकी ऑन-स्क्रीन माँ बहुत प्यार करती हैं। कुंती (कंचन गुप्ता) और परी (ओजस्वी अरोड़ा) के बीच बहुत प्यारा संबंध है। कुंती सेट पर परी की सभी समस्याओं का समाधान सुझाने वाली व्यक्ति हैं। कुंती ने हाल ही में परी द्वारा सोशल मीडिया पर शुरू की गई कॉमेडी वाइन्स में भी उनकी मदद की है।
शो में परी की भूमिका निभा रहीं ओजस्वी आरोड़ा कहती हैं, ‘‘कंचन जी और मैं कुछ विशेष साझा करते हैं। मेरी माँ मुंबई में नहीं रहती हैं लेकिन कंचन जी के साथ समय बिताते हुए मुझे लगता है कि मैं घर पर ही हूँ। मैं उन्हें अपनी वंडर-वुमन कहती हूँ क्योंकि वे बहुत मजबूत और बहुत प्यारी महिला हैं। साथ में लंच करने से लेकर जरूरत पड़ने पर माँ की तरह गले लगने तक और डायलाग के रिहर्सल तक वह मेरे शूटिंग जीवन का एक अभिन्न हिस्सा बन गईं हैं।
काल भैरव रहस्य के सेट पर सबकी चहेती हैं सरगुन कौर
सेट पर सबसे कम उम्र का होने के अपने फायदे हैं। सब लोग हमेशा छोटे और मासूम लोगों को लाड़ प्यार करते हैं। ‘काल भैरव रहस्य’ में गौरी का किरदार निभा रहीं सरगुन कौर को सेट पर सबसे कम की उम्र के होने का फायदा मिलता है। सरगुन अपने परिवार से दूर अकेले मुंबई में रहती हैं। जबकि उनका परिवार दिल्ली में रहता है। शो के कलाकार राहुल शर्मा (राहुल), छवि पाण्डेय (नम्रता) और माधवी गोगटे (कलावती) अपने परिवार के सदस्य की तरह सरगुन का विशेष ख्याल रखते हैं। उनका चुलबुला व्यक्तित्व सभी को भाता है। लेकिन अपने काम को लेकर वे बहुत ही गंभीर हैं। सरगुन अपनी भूमिका के लिए अपना सौ फीसदी देने में कोई कसर नहीं छोड़तीं. कुछ ही समय में वह दर्शकों के साथ-साथ सेट पर भी सबकी चहेती बन गई हैं।
इस बारे में सरगुन कहती हैं, “मुझे उन लोगों से घिरा होना अच्छा लगता है जो मेरी चिंता करते हैं, मेरा ध्यान रखते हैं। चूंकि मैं अपने परिवार के साथ नहीं रहती हूँ इसलिए सेट पर हर कोई मेरा ज्यादा ध्यान रखता है। वे मुझे ऐसा महसूस कराते हैं जैसे मैं घर पर हूँ। यह सभी का प्यार और देखभाल ही है जो मुझे सेट पर इतना सकारात्मक रखता है।
सोनी सब के ‘तेनाली रामा’ में रामा को छोड़ना पड़ेगा विजयनगर
दर्शकों का चहेता रामा हमेशा उन मुश्किल कामों को पूरा करने में सफल रहा है, जो उसे सौंपा गया। चाहे वह अपने दुश्मनों से जीतने की बात हो या फिर कोई कठिन मामला सुलझाने की। अब टेलीविजन के पसंदीदा रामा के लिये इस हफ्ते एक और मुश्किल चुनौती इंतजार कर रही है!
आगामी एपिसोड में हम देखेंगे कि विजयनगर का रहने वाला एक व्यक्ति विश्वनाथ घोड़ागाड़ी चलाने वाले प्रसाद की शिकायत लेकर पहुंचता है। वह कहता है कि उसकी पत्नी को प्रसव के समय उसने मदद नहीं की, जिसकी वजह से बच्चे के जन्म में परेशानी आई। विश्वनाथ ने अपने जीवन की सारी जमापूंजी अपनी पत्नी के इलाज में लगा दिया। अब विश्वनाथ चाहता है कि प्रसाद वह सारा पैसा दे जो उसने खर्च किया है।
रामा (कृष्ण भारद्वाज) प्रसाद को सलाह देता है कि उसे विश्वनाथ को पैसे दे देने चाहिये। लेकिन इससे पहले कि राजा कृष्णदेव राय (मानव गोहिल) अपना फैसला सुनाते, कालुरी नाम का एक व्यक्ति दरबार में पहुंचता है और साबित कर देता है कि रामा की सलाह गलत थी। इसकी जगह वह राजा कृष्णदेव राय को हर हफ्ते इस तरह के मामले सुलझाने के लिये परिवार दरबार लगाने का सुझाव देता है। राजा प्रभावित होते हैं और कालुरी को एक इनाम देते हैं। कालुरी, रामा को उसके बचपन के नाम से बुलाता है, इससे रामा को आश्चर्य होता है कि आखिर कालुरी (अभिषेक रावत) है कौन।
राजा कृष्णदेव राय दोनों के बीच प्रतियोगिता की घोषणा करते हैं। वह एक परिवार दरबार लगाने का फैसला करते हैं। सभी मामले रामा और कालुरी के सामने रखे जायेंगे, जो भी बेहतर सलाह देगा, जीत उसकी होगी।
पहले मामले में राजा कृष्णदेवराय, रामा और कालुरी दोनों की सलाह से सहमत होते हैं और वह दोनों के एक-एक बात को मान लेते हैं। एक दूसरा मामला वरूणमाला का आता है, जिसमें रामा एक अंक से आगे हो जाता है। अगले मामले में दो दंपती दरबार में एक बच्चे के साथ आते हैं। एक उसके जन्मदाता होते हैं और दूसरे उसे पालने वाले। राजा कृष्णदेवराय, कालुरी के तर्कों से सहमत होते हैं और यह घोषणा करते हैं कि बच्चे को अपने जन्मदाता के साथ ही रहना चाहिये। रामा यह अन्याय देखकर दरबार छोड़कर चला जाता है और विजयनगर के प्रमुख सलाहकार के पद से त्यागपत्र दे देता है।
क्या रामा और उसका परिवार विजयनगर छोड़कर चले जायेंगे? क्या राजा कृष्णदेवराय कालुरी की ईष्र्या को देख पायेंगे? किस तरह रानी, रामा की मदद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगी?
Jansaamna