क्लब पदाधिकारियों ने दुख की घड़ी में बिटिया की मदद कर दिलाया भरोसा JYC आपके साथ!
जायसवाल युवा क्लब के शीर्ष नेतृत्व के निर्देशन में परिवार से मिला क्लब का प्रतिनिधि मंडल, आर्थिक मदद के साथ दिलाया हर संभव मदद का भरोसा
जौनपुर। वैश्विक महामारी कोरोना से हर तरफ तबाही का मंजर है। खतरनाक संक्रमण ने न जाने कितने परिवारों की खुशियां छीन ली, लोग चाहकर भी अपनो को नहीं बचा सके। न जाने कितने लोग काल बने कोरोना के गाल में समा गए। तबियत बिगड़ने पर कोई खराब सिस्टम की भेंट चढ़ गया तो कहीं आर्थिक परिस्थितियों ने मरने पर मजबूर किया। लेकिन इन सबके बीच मानव कल्याण का भाव रखने वाले जनसेवियों ने लोगों की मदद करने में कोई कसर नहीं छोड़ी! यूपी के एक गांव में परिवार की परिस्थितियों की सूचना मिलते ही संगठन जायसवाल युवा क्लब द्वारा परिवार की मदद और दिया गया भरोसाए रीढ़ की हड्डी साबित हुआए जिसकी लोग सराहना कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि मानवता अभी भी जिंदा है। दरअसल उत्तर प्रदेश के लोगों ने जब अखबार उठाया तो उसमें एक आश्चर्यजनक और अत्यंत दुखद खबर से प्रदेशवासियों का सामना हुआ, खबर संक्षेप में यह थी कि एक 21 वर्षीय बिटिया जिसके पिता का साया उसके सिर से 18 वर्षों पूर्व ही उठ गया था। और जिस समय बच्चों को अपने अभिभावक की आवश्यकता सर्वाधिक होती है कोरोना ने उस बिटिया से उसकी मां को भी छीन लिया ।
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Jansaamna
कानपुर देहात।
चकिया, चन्दौली।
एक अमीर व्यक्ति था। उसने समुद्र में अकेले घूमने के लिए एक नाव बनवाई और छुट्टी के दिन वह नाव लेकर अकेले समुद्र की सैर करने निकल पड़ा। वह समुद्र में थोङा आगे पहुंचा ही था कि अचानक एक जोरदार तूफान आ गया। उसकी नांव पुरी तरह से तहस-नहस हो गइ लेकिन वह लाइफ जैकेट के साथ समुद्र में कूद गया। जब तूफान शान्त हुआ तब वह तैरता-तैरता एक टापु पर जा पहुंचा। मगर वहां भी कोई नहीं था। टापु के चारों ओर समुद्र के अलावा क़ुछ भी नजर नहीं आ रहा था।
कोरोनावायरस महामारी के दौरान केन्द्र, राज्य सरकारें तथा प्रशासन अपने स्तर पर मुस्तैदी से काम कर रहा है। सरकार के इन प्रयासों के साथ-साथ देश भर की कई धर्मार्थ संस्थाएं और गैर सरकारी संगठन सफल बनाने में जुटे हैं ताकि देश में इस महामारी से ज्यादा से ज्यादा लोगों की जिंदगी बचायी जा सके। एनसीसी, एनएसएस के स्काउट्स कहाँ है ? जिन पर अरबों रुपये सालाना खर्च होते है और जो सरकारी नौकरी में एक्स्ट्रा मार्क्स लेते है. आज जब उनकी सेवाओं की देश को जरूरत है तो वो घर बैठे है. मगर आपने देखा होगा की सामान्य दिनों में अरबों की सरकारी सहायता प्राप्त कर मीडिया जगत में छाये रहने वाले और जगह-जगह अपनी ब्रांच का प्रचार करने वाले पंजीकृत गैर सरकारी संगठन यानी एनजीओ इस दौरान न जाने कहाँ दुबके रहे ?
झबरेड़ा/हरिद्वार।
जीवनसाथी का मतलब क्या होता है, एक लड़की या स्त्री को क्या चाहिए? अच्छा घर, अच्छा पति, अच्छे सास- ससुर, दो बच्चे और दो वक्त का खाना और कपड़े। क्या सारी जरूरतें खत्म हो गई? यही है क्या स्त्री की जरूरतें।