Monday, September 24, 2018
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सफेद गाजर की कृषि को भी कृषक जाने

सफेद गाजर की कृषि को भी कृषक जाने, कृषि विविधिकरण की जनपद में असीम सम्भावनायें
सफेद गाजर में पाया जाने वाला अल्फा और बीटा केटोरीन शरीर को रोगों से राहत दिलाने में बहुत मदद करता है
कानपुर देहात, जन सामना ब्यूरो। सफेद गाजर की कृषि को भी कृषक जाने तथा जनपद में कृषि विविधिकरण की असीम सम्भावनायें है। जनपद में सफेद गाजर सहित कई कृषि विविधिकरण से संबंधित कृषि को किया जाना है जिसकी जनपद में असीम संभावनायें है। सफेद गाजर में पाया जाने वाला अल्फा और बीटा केटोरीन शरीर को रोगों से राहत दिलाने में बहुत मदद करता है, मुबारकपुर आजमगढ़ जाकर प्रगतिशील कृषि सफेद गाजर की ले जानकारी, मुबारकपुर सफेद गाजर का हलुवा विश्व प्रसिद्ध, जो मांग व रिश्तेदारों भेटस्वरूप दुबई अन्य खाड़ी देशों में भी जाता है। सफेद गाजर एक औषधी गाजर है। गाजर लाल नारंगी के अलावा विश्व के अलग-अलग भागों में बैंगनी, पीली, काली तथा सफेद रंग की भी गाजर पायी जाती है। गाजर देखने में जितनी अच्छी लगती है उतनी ही सेहत के लिए भी लाभप्रद होती है। इसका कच्चा और पका दोनो रूप में सेवन किया जा सकता है। सफेद गाजर में पाया जाने वाला अल्फा और बीटा केटोरीन शरीर को रोगों से राहत दिलाने में बहुत मदद करता है खासकर यह हृदय रोग की संभावना कम करती है। गाजर में बीटामिन ए होने के साथ ही बिटामिन सी के, बी-1 बी2, बी3, बी 6 व बी इ भी पायी जाती है इसमें फाइबर प्रोटेसिम, कापर फोलेट, जिंक आदि भी पाया जाता है। इसके खाने से कई जान लेवा बीमारियां फटकने नहीं पाती है इसमें एंटीआॅक्सीडेंट न्यूट्रिएंट्स और फाइटोन्येट्रिएंट्स जैसे फेल्कारीनाॅल होते है। इसमें पाये जाने वाला बीटा कैरोटीन एक एंटीआॅक्सीडेंट है जो शरीर में मेटोबालेजम में बदलाव होने की बजह से डेमज हो रहे सेल्स को रोकता है यानी एंटी एजिंग प्रोसेस को धीमा करता है। इससे कैसियम और इसके खाने से बाॅडी में कैल्सियम की मात्रा बढ़ती है। इससे मिलने वाले कैल्सियम जल्दी अवशोषित करता है। सफेद गाजर आजमगढ़ के मुबारकपुर क्षेत्र में प्रचुर मात्रा में होती है वहां के लोग सफेद गाजर से सफेद हलुवा तैयार करते है जिसकी मांग देश के विभिन्न क्षेत्रों सहित दुबई आदि अरब देशो में है जिसकी मांग है आजमगढ़ मुबारकपुर से तैयार सफेद गाजर का हलुवा हवाईजहाज के माध्यम से विदेशो में पहुंचता है। युवती व छात्रा प्रिया ने बताया कि उनके रिश्तेदार जनपद आजमगढ़ में रहते है जो कि कानपुर देहात सहित दुबई प्रत्येक वर्ष सफेद गाजर का हलुवा भेटस्वरूप पार्सल करते है और यह सफेद गाजर का हलुवा लगभग एक माह तक खराब नही होता है। खाने के शौकीन लोगों के मुंह में गाजर का हलुवा नाम सुनते ही अक्सर पानी आ जाता है यदि आप सफेद गाजर का हलुवा खा लेगे तो उंगलियां चाटते ही रह जायेंगे।
कृषि वैज्ञानिकों व किसानों से कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक डा. अरविन्द कुमार यादव ने आग्रह किया है कि वे आजमगढ़ मुबारकपुर क्षेत्र में जाये वहां से सफेद गाजर की खेती सीख कर आये। सफेद गाजर की जन जन में जानकारी गांधी फैजेआम विद्यालय के प्रबन्धक अब्दुल हक, रेहान सिद्दीकी, राजेश कुमार गौतम, प्रिया आदि द्वारा भी दी गयी जिन्होंने बताया कि सफेद गाजर का आजमगढ़ मुबारकपुर से उनके रिश्तेदार व परिचित अक्सर भेजते है जिसका हम लोग भरपूर लुत्फ लेते है। एक परिवार ने अपनी पुत्री की शादी के कार्ड के साथ ही सफेद गाजर भी भेंट की।