Tuesday, November 13, 2018
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भारत भूमि- गौरव गाथा

भारत की पावन भूमि का, क्यों न हम गुणगान करें
भारत की धरती पर जन्में, क्यों न हम अभिमान करें
सागर, नदियां, नहर और झरने, यहां सदियों से बहते हैं
कहीं पहाड़, तो कहीं वादियां, कहीं खेतों में हरियाली है
न कोई बंदिश किसी ऋतु पर, हर मौसम से आनंदित हैं
फल-फूल, हवा और खुशबू से, हर एक प्रभावित है
यह धरती वीरों की धरती है, बस इतना याद रहे
कितने वीरों को खोकर हमने, आजादी पाई थी
हर खतरे को झेला था, और जुल्मों में रात बिताई थी
जब आंख खुली तो, आजादी हमने पाई थी
न जाने इसको पाने में, कितनों ने जान गंवाई थी
चाहत है अब तो बस, इस गौरव का एहसास रहे
हर कोशिश हो अपनी ऐसी, यह गौरव अपने पास रहे
संविधान रचा खुद हमने अपना, और अधिकारों की बात कही
शिक्षा और तकनीकी में, हमने अपनी पहचान रची
खेल-प्रतियोगिताओं में हमने, स्वर्ण पदक भी जीते है
विश्व में भारत का स्थान है उत्तम, इसी गर्व से जीते हैं
मिलजुल कर सब साथ रहेंगे, यह सपना साकार करें
हर मजहब के फूलों से, यह गुलशन आबाद रहे
भारत की पावन भूमि का, क्यों न हम गुणगान करें
भारत की धरती पर जन्में, क्यों न हम अभिमान करें
जय हिंद।

– परवेश कुमारी, पालम विहार, गुरूग्राम (हरियाणा),