इटावा, राहुल तिवारी। इटावा जनपद के थाना बसरेहर क्षेत्र के अंतर्गत रजपुरा गांव में जमीन के विवाद में 65 वर्षीय बुजुर्ग की हत्या। जानकारी के मुताबिक प्रभात यादव नाम का एक व्यक्ति जो कि पुलिस में सिपाही है और इस समय जलेसर में पोस्ट है वो व्यक्ति सड़क पर कब्ज़ा कर दीवार बना रहा था उसकी के परिवार के ताऊ ने इसका विरोध किया तो प्रभात ने अपने चाचा रामबरन सिंह की पिटाई कर दी जिससे उनकी मृत्यु हो गई। जानकारी के मुताबिक एक दरोगा और एक सिपाही की मौजूदगी में प्रभात यादव दीवार का निर्माण कर रहा था। जिस समय घटना को अंजाम दिया गया उक्त दरोगा और सिपाही घटना पर मौजूद थे और उनके सामने ही बुजुर्ग की पिटाई की गई। एसपी ग्रामीण ओमवीर सिंह, सीओ सैफई चंद्रपाल सिंह और बसरेहर इंस्पेक्टर जे के शर्मा मौके पुलिस बल के साथ पर मौजूद। वही हत्या की वारदात को अंजाम देकर फरार हुए सिपाही की बिना नम्बर प्लेट की स्कार्पियो गाड़ी से अवैध देशी शराब के क्वार्टर हुए बरामद, ग्रामीणों ने हत्यारोपी पुलिसकर्मी पर अवैध शराब और हथियारों की तस्करी का लगाया आरोप, पुलिस आरोपी की गाड़ी को जब्त कर तलाश में जुटी।जमीनी विवाद में 65 वर्षीय बुजुर्ग की हत्या
इटावा, राहुल तिवारी। इटावा जनपद के थाना बसरेहर क्षेत्र के अंतर्गत रजपुरा गांव में जमीन के विवाद में 65 वर्षीय बुजुर्ग की हत्या। जानकारी के मुताबिक प्रभात यादव नाम का एक व्यक्ति जो कि पुलिस में सिपाही है और इस समय जलेसर में पोस्ट है वो व्यक्ति सड़क पर कब्ज़ा कर दीवार बना रहा था उसकी के परिवार के ताऊ ने इसका विरोध किया तो प्रभात ने अपने चाचा रामबरन सिंह की पिटाई कर दी जिससे उनकी मृत्यु हो गई। जानकारी के मुताबिक एक दरोगा और एक सिपाही की मौजूदगी में प्रभात यादव दीवार का निर्माण कर रहा था। जिस समय घटना को अंजाम दिया गया उक्त दरोगा और सिपाही घटना पर मौजूद थे और उनके सामने ही बुजुर्ग की पिटाई की गई। एसपी ग्रामीण ओमवीर सिंह, सीओ सैफई चंद्रपाल सिंह और बसरेहर इंस्पेक्टर जे के शर्मा मौके पुलिस बल के साथ पर मौजूद। वही हत्या की वारदात को अंजाम देकर फरार हुए सिपाही की बिना नम्बर प्लेट की स्कार्पियो गाड़ी से अवैध देशी शराब के क्वार्टर हुए बरामद, ग्रामीणों ने हत्यारोपी पुलिसकर्मी पर अवैध शराब और हथियारों की तस्करी का लगाया आरोप, पुलिस आरोपी की गाड़ी को जब्त कर तलाश में जुटी।
Jansaamna
कानपुर देहात, जन सामना ब्यूरो।
प्रयागराज, जन सामना ब्यूरो।
कोरोना के चलते पूरे भारत में ग्रामीण संकट गहरा रहा है काम की मांग बढ़ती जा रही है, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना मांग को पूरा करने के लिए आगामी बजट में जोर-शोर से देखी जा रही हैं। ग्रामीण गरीबी से लड़ने के लिए सरकार के शस्त्रागार में यह एकमात्र गोला-बारूद हो सकता है। हालांकि, योजना को कर्कश, बेकार और अप्रभावी रूप हमने भूतकाल में देखे हैं महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत ग्रामीण नौकरियों की मासिक मांग 20 मई तक 3.95 करोड़ पर एक नई ऊंचाई को छू गई थी, और महीने के अंत तक 4 करोड़ को पार कर गई। इस साल मई में चारों ओर बड़े पैमाने पर नौकरी के नुकसान का संकेत आया, विशेष रूप से अनौपचारिक क्षेत्र में, जहां लाखों कर्मचारी अचानक तालाबंदी के कारण बेरोजगार हो गए हैं।
कोविड – 19 के संक्रमण से बचाव स्वरूप अपनाए गए लॉकडाउन के कारण उत्पन्न हुई बेरोजगारी को दूर करने की पहल केंद्र सरकार की गरीब कल्याण रोजगार योजना मील का पत्थर साबित हो इसके लिए जोर-शोर से इसे लागू किया गया। यह योजना अभी ६ राज्यों उत्तर प्रदेश , बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, उड़ीसा व राजस्थान के ११६ जनपदों में लागू की जा चुकी है। योजना के शुरू होने पर केंद्र सरकार ने कहा कि यह हमारा प्रयास है कि श्रमिकों को उनके घर के पास ही काम मिले , जो कार्य करके अब तक आप शहरों का विकास कर रहे थे वही काम अपने घर के निकट करके आप अपने गाँव के विकास में योगदान करें। इस योजना के सुंदरतम स्वरूप को देखते हुए यह कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा कि यह योजना हमारे श्रमिकों , जो बेरोजगार हो चुके हैं के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है। महामारी रूपी लॉकडाउन ने जहाँ उनकी रोजी-रोटी छीन ली थी उसी रोजी-रोटी को फिर से बहाल करने के लिए केंद्र सरकार ने यह गरीब कल्याण रोजगार योजना चलाकर बड़ा ही नेक कार्य किया है। इससे जनता में केंद्र सरकार के प्रति सुंदरतम संदेश का संचार भी तेजी से हो रहा है।
बदलते दौर में भारत के गांवों में चल रहे परंपरागत व्यवसायों को भी नया रूप देने की जरूरत है। गांवों के परंपरागत व्यवसाय के खत्म होने की बात करना सरासर गलत है। अभी भी हम ग्रामीण व्यवसाय को थोड़ी-सी तब्दीली कर जिंदा रख सकते हैं। ग्रामीण भारत अब नई तकनीक और नई सुविधाओं से लैस हो रहा हैं। भारत के गांव बदल रहे हैं, तो इनको अपने कारोबार में थोड़ा-सा बदलाव करने की जरूरत है। नई सोच और नए प्रयोग के जरिए ग्रामीण कारोबार को जिन्दा रखकर विशेष हासिल किया जा सकता है और उसे अपनी जीविका का साधन बनाया जा सकता है।