आज पूरा विश्व कोरोना जैसी महामारी से जुझ रहा है ऐसे में एक नयी मुसीबत बन कर उभरा है टिडडो का दल जो इन दिनों हमारे फसलों को बर्बाद कर रहा। पूर्वी अफ्रीका में पैदा होने वाला यह टिड्डी दल पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में आतंक मचा कर अब भारत के कुछ राज्यों जैसे पंजाब, राजस्थान और अब झांसी भी इसकी चपेट में आ चुका है। इन टिडडो के झुंड ने फसलों को पूरी तरह से नष्ट कर दिया है। ये एक दिन में इतना खाना खा सकते हैं जितना 2500 लोग खा सकते हैं।बाइबल में भी इनका जिक्र है और पहले भी इनका झुंड नुकसान पहुंचाता था परन्तु पिछले 20 वर्षों में इनका अटैक सबसे ख़तरनाक साबित हुआ है, इसका मुख्य कारण जलवायु परिवर्तन, बेमौसम बारिश और नमी को माना जा रहा है। इनकी आबादी को बढ़ावा देता है और हाल ही में बंगाल में आया तूफान भी एक कारण है।
Jansaamna
प्रयागराज, जन सामना ब्यूरो।
कानपुर नगर, फैसल निहाल।
नीति आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत, इतिहास में अपने ‘सबसे खराब’ जल संकट का सामना कर रहा है। गर्मियों में नल सूख गए हैं, जिससे अभूतपूर्व जल संकट पैदा हो गया है। एशियाई विकास बैंक के एक पूर्वानुमान के अनुसार, भारत में 2030 तक 50% पानी की कमी होगी। हाल ही के अध्ययनों में कम पानी की उपलब्धता के मामले में मुंबई और 27 सबसे कमजोर एशियाई शहरों में शीर्ष पर मुंबई और दिल्ली शामिल हैं। यूएन-वॉटर का कहना है कि “जलवायु परिवर्तन के पानी के प्रभावों को अपनाने से स्वास्थ्य की रक्षा होगी और जीवन की रक्षा होगी”। साथ ही, पानी का अधिक कुशलता से उपयोग करने से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम होगा। हालांकि, कोविड-19 महामारी के जवाब में, हाथ धोने और स्वच्छता पर अतिरिक्त ध्यान केंद्रित किया गया है।
कानपुर नगर, जन सामना ब्यूरो।
कानपुर नगर, अर्पण कश्यप।
अगर वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिकीय में यह भुला दिया जाता है कि मानवाधिकारों का आदर या सम्मान नहीं होगा तो, किसी भी तरह का विकास टिकाऊ साबित नहीं होगा। इन्हीं मानवाधिकारों में ‘निजता का अधिकार’ भी शामिल है। सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों के अनुसार, भारतीय संविधान के अनुच्छेद-21 के अंतर्गत ‘निजता का अधिकार’ मूल अधिकारों की श्रेणी में रखा गया है।